छत्तीसगढ़

बंगाल चुनाव : मुस्लिम तुष्टिकरण पर भारी पड़ गया वंदे मातरम

Nilmani Pal
5 May 2026 9:23 AM IST
बंगाल चुनाव : मुस्लिम तुष्टिकरण पर भारी पड़ गया वंदे मातरम
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डॉ. अनिल द्विवेदी

75 साल के लम्बे संघर्ष और इंतजार के बाद, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस, माकपा और टीएमसी के गढ़ को ध्वस्त करते हुए बंगाल फतह कर लिया। विधानसभा चुनाव में हुए 92 प्रतिशत मतदान ने इस कयास पर मुहर लगा दी थी कि राज्य के 10 करोड़ से अधिक बंगाली, दीदी—राज से उब चुके हैं और अब वे मोदी राज के साथ चलना चाहते हैं। पश्चिम बंगाल, असम और पुदुच्चेरी में हिंदुत्व की विजय केवल राजनीतिक नहीं बल्कि, सनातन मूल्यों, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास की पुनर्स्थापना है। यह प्रचंड जनादेश भय, तुष्टीकरण और घुसपैठियों के संरक्षकों को बंगाल की जनता का करारा जवाब है। यह लैण्ड स्लाइड विक्ट्री भाजपा के पितृ—पुरूष पं. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है।

भाजपा क्यों जीती : भाजपा के बंगाल फतह के दो प्रमुख कारण हैं : प्रधानमंत्री नरेंद्र_मोदी की लोकप्रियता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चुनाव रणनीति। गुजरे 2011 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी का वोट बैंक 50—50 था। कुछ मुसलमान थे तो कुछ हिन्दु थे लेकिन 15 सालों में जिस तरह के साम्प्रदायिक फैसले दीदी ने किए, उससे हिन्दु वोट उससे दूर होता चला गया। आप पीएम मोदी को सिक्किम में फुटबाल खेलते जरूर देखें होंगे लेकिन बंगाल में भाजपा ने 5000 स्थानों पर 'नरेन्द्र—कप' स्पर्धा कराते हुए 70 हजार युवाओं को जोड़ा और उनके मार्फत तीन लाख लोगों तक पहुंची। 40 लाख युवाओं से नौकरी के फॉर्म भरवाए गए। नौ परिवर्तन यात्राएं चलाई गईं जिसमें 10 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए। जाहिर है इन प्रयोगों ने भाजपा के प्रति विश्वास जगाया। चुनाव के समय नौ हजार से ज्यादा नुक्कड़ सभाएं, नौ हजार प्रवासी कार्यकर्ताओं को चुनाव में झोंकना, पीएम मोदी की 19 सभाएं और रोड शो तथा अमित शाह की 40 सभाएं और रोड शो जैसे प्रयोगों ने भाजपा की जीत आसान कर दी। दिल में काबा, आंखों में मदीना.. जैसे गीतों ने हिन्दुओं के मन में दीदी की इमेज साम्प्रदायिक बना दी जिससे हिन्दुओं में ध्रुवीकरण हुआ। इसके जवाब में भाजपा ने वन्दे मातरम गीत कार्यक्रम करके दो लाख लोगों से संपर्क साधा।

केंद्रीय आलाकमान के निर्देश पर छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश महामंत्री संगठन पवन साय जी ने महीनों बंगाल में डेरा डाले रखा। उनके जिम्मे 100 से ज्यादा विधानसभा सीटें थी। साय ने अपने विश्वस्त नेताओं और कार्यकर्ताओं की टीम तैयार करके उन्हें एक—एक सीट की जिम्मेदारी दी और भाजपा को विजयश्री दिलवा दी। ईनाम के तौर पर साय को पार्टी भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।

दीदी क्यों हारी : ममता बनर्जी की सरकार ने 15 सालों में जो बोया, वह काटा। महिला वोट बैंक टीएमसी का एक बड़ा हथियार था जिस पर भाजपा ने सेंध लगाई। लगातार होती रेप की घटनाएं, दुर्गा पूजा के साम्प्रदायिक फैसले, मोदी की नारी शक्ति वंदन योजना, तीन तलाक जैसे कानून ने स्त्री शक्ति में भाजपा के प्रति विश्वास प्रगट किया। दीदी उन्हें एण्टी हिंदु लगने लगी। महिला शक्ति टीएमसी की बड़ी ताकत थी इसलिए उसे लुभाने के लिए भाजपा ने एक करोड़ सात लाख महिलाओं से फार्म भरवाते हुए वादा किया कि यदि प्रदेश में सरकार बनी तो वह मासिक धनराशि खाते में डालेगी। भाजपा ने सबूत के तौर पर अपनी नारी शक्ति वंदन योजना को पेश किया जिस पर महिलाओं ने भरोसा कर लिया। रेप पीड़िता की मां को टिकट देना जैसे फैसले ने सहानुभूति पैदा की।

भाजपा का लक्ष्य : एसआईआर में 92 लाख अवैध मतदाताओं का कटना, भाजपा को 40 से ज्यादा सीटों पर फायदा दे गया। बंगाल के करोड़ों हिन्दु, बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ, उनके अत्याचार और दीदी सरकार का संरक्षण मिलने से परेशान थे, आतंकित थे। सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं और आरएसएस के स्वयंसेवकों ने इसकी कीमत जान देकर चुकाई है। बीजेपी की जीत के नायक ऐसे हजारों कार्यकर्ता है जिन्होंने टीएमसी के अत्याचारों को सहकर भी चुनाव—दर—चुनाव भाजपा का कमल खिलाते रहे। नई भाजपा सरकार को ला एण्ड आर्डर और गुड गवर्नेस देकर इससे निबटना होगा ताकि वह जनता की आशाओं और उम्मीदों पर खरा उतर सके।

अब जबकि पश्चिम बंगाल की कमान भाजपा संभालने जा रही है, कुछ वादे तत्काल पूरा करने होंगे। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA)लागू करने का वादा, आयुष्मान भारत योजना को पहले ही दिन से लागू करना, राज्य के कर्मचारियों के लिए 45 दिनों के भीतर सातवां पे कमीशन लागू करना, सीमा सुरक्षा और घुसपैठ पर ज़ीरो इन्फिल्ट्रेशन नीति तत्काल लागू करना तथा सिट गठित कर राजनीतिक हिंसा की जांच और पीड़ितों को मुआवज़ा देना प्रमुख तौर पर शामिल है। ताजा चुनावों में मुंह की खाए राजनीतिक दल अपनी हार का ठीकरा भले ही ईवीएम और चुनाव आयोग पर फोड़ रहे हों, लेकिन सच्चाई यह है कि बंगाल सहित देश की जनता ने तगड़ा संदेश दे दिया है कि आप अल्पसंख्यकों की राजनीति कीजिए मगर बहुसंख्यकों की आस्था और विश्वास के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नही होगा।

— लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं

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