छत्तीसगढ़

भूत-प्रेत, जादू टोना और कथित चमत्कारों पर भरोसा लोगों के लिए खतरनाक: डॉ. दिनेश मिश्रा

Shantanu Roy
7 Oct 2025 10:08 PM IST
भूत-प्रेत, जादू टोना और कथित चमत्कारों पर भरोसा लोगों के लिए खतरनाक: डॉ.  दिनेश मिश्रा
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Raipur. रायपुर। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने प्रदेशवासियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि भूत-प्रेत, जादू टोना, टोनही जैसी मान्यताओं का कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं है। उनका कहना है कि इन बातों पर विश्वास रखने वाले लोग मनोविकार और अंधविश्वास के शिकार हैं। ऐसे लोगों को बीमारियों और चिकित्सा विज्ञान के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है। डॉ. दिनेश मिश्र ने स्पष्ट किया कि मानसिक रोग भी अन्य शारीरिक बीमारियों की तरह वास्तविक हैं। उन्होंने बताया कि कैंसर, डायबिटीज जैसी बीमारियों की तरह मानसिक रोग भी चिकित्सकीय दृष्टि से गंभीर हैं। अक्सर लोग मानसिक रोग को भूत-प्रेत की बाधा समझ लेते हैं और इसे बाबाओं या जादू टोने के जरिए ठीक करने की कोशिश करते हैं। डॉ. मिश्र ने जोर देकर कहा कि ऐसा करना न केवल गलत है, बल्कि रोगियों के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
डॉ. मिश्र ने कहा, “मानसिक रोग के उपचार के लिए झाड़-फूंक, मारपीट या चमत्कार पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। ऐसे रोगियों को अस्पताल जाकर चिकित्सकीय जांच और उपचार कराना चाहिए। किसी भी धर्म या मजमे के प्रचारक द्वारा आयोजित कथित दिव्य दरबार, भूत-प्रेत भगाने की सभा या चंगाई की गतिविधियाँ किसी भी रोग का समाधान नहीं कर सकतीं।” उन्होंने यह भी कहा कि कथावाचन और धर्म के तर्कसंगत प्रचार में कोई हर्ज नहीं है। अगर कथावाचक समाज को कर्म करने, मेहनत करने और सफलता पाने की सीख दें तो यह समाज के लिए लाभकारी है। लेकिन केवल चमत्कार, भूत-प्रेत और जादू टोने जैसी बातों से लोगों को भ्रमित करना और उनके आर्थिक, मानसिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान करने का झूठा दावा करना गलत है।
डॉ. मिश्र ने मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि झूठे चमत्कार दिखाकर भीड़ इकट्ठा करना और उन्हें भ्रम में डालना अनैतिक है। चमत्कार या टोटकों पर विश्वास रखने वाले लाखों लोग समय बीतने के बाद भी अपनी पूर्व स्थितियों में जीवन यापन करते दिखाई देते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि ये प्रयास किसी वास्तविक समस्या का समाधान नहीं कर सकते। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष ने प्रशासन और शासन को भी जिम्मेदारी का आह्वान किया। उनका कहना है कि प्रशासन को ऐसे मामलों का संज्ञान लेना चाहिए और लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के मद्देनजर आवश्यक कदम उठाने चाहिए। इसके तहत धार्मिक आयोजनों, कथावाचन और भूत-प्रेत के भ्रम फैलाने वाले मजमों की मॉनिटरिंग और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
डॉ. मिश्र ने कहा कि समाज में अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता फैलाना आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी प्रकार के जादू टोने, चमत्कार या भूत-प्रेत के झूठे दावों पर भरोसा न करें। किसी भी बीमारी या मानसिक समस्या के लिए चिकित्सकीय मार्ग अपनाएं। इसके अलावा, बच्चों और युवाओं को भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कसंगत सोच के प्रति संवेदनशील बनाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी बताया कि अंधविश्वास केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि समाज की आर्थिक और मानसिक स्थिति को भी प्रभावित करता है। कई लोग झूठे चमत्कारों और टोटकों के कारण बड़ी रकम गंवा देते हैं, और उनके स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे मामलों में सामाजिक और सरकारी जागरूकता कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
डॉ. मिश्र के अनुसार, धार्मिक कथावाचन और तर्कसंगत प्रचार में कोई बाधा नहीं है। लेकिन किसी भी व्यक्ति की समस्याओं को दूर करने का दावा करते हुए चमत्कार दिखाना और लोगों को विश्वास में लेना समाज और प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं ताकि जनता सुरक्षित और जागरूक रह सके। अंततः डॉ. मिश्र ने यह संदेश दिया कि मानव जीवन की समस्याओं का समाधान केवल मेहनत, चिकित्सा और तर्कसंगत दृष्टिकोण से ही संभव है। भूत-प्रेत, जादू टोना, टोटके और कथित चमत्कार केवल भ्रम फैलाने वाले उपकरण हैं। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इस प्रकार के अंधविश्वास से दूर रहकर अपने जीवन में वास्तविकता और विज्ञान की ओर बढ़ना चाहिए।
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