बड़ों पर करम छोटों पर सितम, ऐ जाने वफा तू जुल्म न कर...

ज़ाकिर घुरसेना-कैलाश यादव
पिछले दिनों राजधानी रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र में देर रात एक तेज रफ्तार फॉर्च्यूनर कार बेकाबू होकर डिवाइडर से टकराई और पलट गई, यह घटना नेशनल हाईवे पर हुई, जहां युवक शराब के नशे में धुत होकर तेज गति से गाड़ी चला रहा था। कार के अंदर से पांच बीयर मिली। शराब के प्रभाव में और तेज रफ्तार में गाड़ी चलाते हुए वे तेलीबांधा चौक के पास नियंत्रण खो दिया और कार पलट गई। घटनास्थल पर जब पुलिस ने गाड़ी की तलाशी ली, तो गाड़ी के अंदर से 6 फूटी हुई बीयर की बोतलें और एक बेसबॉल बैट भी बरामद हुआ। यह उसके हिंसक इरादों की संभावना को भी दर्शाता है। शराब पीकर वाहन चलाना कानून के खिलाफ है और यह हादसा इसका ज्वलंत उदाहरण है। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करेंगे और शराब के नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सडक़ सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस विभाग द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद नशे में गाडिय़ां शहर में में और आउटर में चल रही है ये कैसा सडक़ सुरक्षा अभियान है ,बड़ी गाड़ी को देखकर ही लगता है छोटों पर सितम और बड़ो पर करम। कई थानों के सामने से गुजरने के बाद भी गाड़ी को नहीं रोक पाए और टू व्हीलर वालों को जबरदस्ती दौडक़र कर पकड़ कर अपना इतिश्री कर रहे हैं और तो और थाने में बिठा भी रहे हैं। जनता में खुसुर फुसुर है कि यदि गाड़ी पलटती नहीं तो पुलिस को पता ही नहीं चलता, एक को माँ और एक को मौसी का दर्जा क्यों। इस दुर्घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि तेज रफ्तार और शराब के नशे में गाड़ी चलाना न केवल चालक की, बल्कि अन्य सडक़ उपयोगकर्ताओं की जान को भी खतरे में डालता है। लेकिन बड़े लोगों की चेकिंग कौन करेगा ? इसी बात पर फिल्म आंखे का एक गाना फिट बैठ रहा है बड़ों पे करम छोटों पे सितम, एै जाने वफा तू जुल्म न कर।
नगर निगम अधिकारी फुल फार्म में
राजस्व वसूली को लेकर निगम के अधिकारी फुल फार्म में नजऱ आ रहे हैं बड़े बकायादारों को समय देने के बावजूद भी टैक्स नहीं पटाने पर उनकी सम्पति पर ताला लगा रहे हैं। ऐसा करने पर कई बड़े बकायादार टैक्स भी भरने लगे हैं। अच्छी बात है समय से टैक्स भरकर अच्छे नागरिक होने का परिचय देना भी चाहिए , निगम के भी अपने खर्चे है , बहरहाल यहाँ तक तो ठीक है जब किसी पर कार्रवाई करने की बारी आती है तो बगल झाँकने लगते हैं और चेहरा देखकर कार्रवाई करते हैं। शहर भर में गरीबों के ठेले गुमटी को हटाने में एक मिनट देर नहीं करते वहीँ पंडरी कपडा मार्केट में दुकानदारों के वजह से जाम की स्थिति बनती है उसे नहीं देख पाते उन पर कार्रवाई करने में पसीना छूटता है। इन बड़े कारोबारियों के वजह से हजारों लोग जाम में फंस रहे हैं निगम के अधिकारी कर्मचारी नहीं देख पाते। जनता में खुसुर फुसुर है कि अब तो प्रदेश में ट्रिपल इंजन की सरकार है ऐसे में जनता को भरपूर फायदे मिलना चाहिए डर कहे का।
डॉक्टर किसके मर्जी से काम करे
केंद्र सरकार ने आज एक विज्ञापन प्रकाशित किया है जिसमें हर नागरिक को हर साल 30 हजार फायदा होने की बात कही। यह सच भी है मरीज आधी उम्र तो महंगी दवाई का नाम सुनते ही बीमार औऱ ज्यादा बीमार हो जाता है। वह सस्ती दवाई के चक्कर में बैगा गुनिया के शरण में पहुंचा जाता है। इसके पीछे के कारणों को विभिन्न बीमारियों से पीृडि़तों ने बताया कि जिस डाक्टर से हम इलाज करा रहे वह सस्ती दवाई ही नहीं लिखता है। जब पर्ची लेकर जनऔषधि केंद्र जाते है तो उस नाम की दवाई ही नहीं होती है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि सरकार डाक्टरों जनऔषधि केंद्र से ही दवाई लिखने के लिए आदेश जारी करे तो शायद मरीजों को राहत की उम्मीद है। नहीं तो यह ढर्रा तो कई सालों से चल रहा है । सस्ती दवाई भी वही काम करती है जो महंगी दवाई काम करती है फिर डाक्टर इसे क्यों अपने रूटीन में शामिल नहीं करते है। क्या इस दवाी लिखने के पीछे डाक्टर के व्दारा कंपनी को फायदा पहुंचाना है या और कोई बात है एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान उन्हें इस बात की शिक्षा देनी चाहिए कि वो जिसने सरकार बनाई है जो वास्तिवक सरकार है । जनता के हित में काम कर रही है उसकी जनकल्याण के हितों को ध्यान में रखते हुए सस्ती दवाई लिखे ताकि सरकार ने जो बात कही है वो सच साबित हो सके। सरकारी नोकर है तो सरकार की मर्जी के खिलाफ नहीं जाकर सस्ती दवाई लिखने के आदेश का अनुपालन कर लोगों को राहत पहुंचाए। क्योंकि सरकार भी पैसा खर्च करती है तो सरकारी संदेश जन-जन तक पहुंचे।
घोटाला कोई न कोई नया रास्ता निकाल लेेगा
उच्च शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय में अपर संचालक के डिजिटल हस्ताक्षर कापी पर लाखों रुपए रुपए के घोटाले संबंधित मामले में तौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे है। उच्च शिक्षा विभाग में लिखित में शिकायत की गई है कि लाखों के घोटाले का जिस पर आरोप लगा है वो जांच हो जाती तो सरकार का लाखों रुपए बच सकता था। जनता में खुसुर-फुसुर है कि जांच होने के बाद अब कार्रवाई का इंतजार है। अभी तक शि7ा विभाग व्दारा किसी तरह का न तो आदेश निकाला गया है औऱ न ही पुलिस से शिकायत की गई है। जिन अधिकारियों के संरक्षण में घोटाला किया गया उन वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ तक नहीं हुई है। लगता है उच्च् शिक्षा विभाग में जो घालमेल चलता है उसकी ऊपर तक पहुंच होने की भी बात कही जा रही है ताकि सबको बचाते रहे तो हम बचेंगे वाला खेल उच्च् शिक्षा विभाग में चल रहा है।
चल गया विष्णु का सुदर्शन चक्र
ढाई सौ करोड के मुआवजा घोटाले में एसडीएम, तहसीलदार सहित कई अधिकारियों के पर विष्णु के सुदर्शन ने कतर दिए हैं। अब उसी मुआवजा घोटाले में डिप्टी कलेक्टर भी नप गए , उन्हें भी निलंबित कर दिया गया है। साथ ही सीजीएमएससी घोटाले में दो आईएएस से एसीबी ने कई घंटों पूछताछ कर यह बता दिया कि विष्णु का सुदर्शन चक्र अब रूकने वाला नहीं है। सिर्फ इन दोनों जगह लगभग सात सौ करोड़ का घोटाला किया गया है, तो अन्य विभागों का क्या आलम होगा इन सब को देखते हुए मुख्यमंत्री साय ने अपनी नजरे टेढ़ी कर ली है। रिश्वतखोर अधिकारियों और कर्मचारियों में भगदड़ मची हुई है। कल तक जो लोग बोला करते थे विष्णुदेव साय सीधे साधे इंसान हैं वो आज उनका भ्रष्टाचारियों के खिलाफ रौद्र रूप देखकर भौचक रह गए हैं। जनता में खुसुर-फुसुर है कि जो जैसा बोता है वैसा पाता है। स्वर्ग-नर्क यहीं है औऱ कोई जगह नहीं है। कहते है ऊपर की लाठी में आवाज नहीं होती है। वह बिना आवाज के ही अपना फैसला सुना देती है। आईएएस आईपीएस, आईएफएस जैसे अन्य प्रशानिक सेवा के अधिकारी जिन्हें धरती का भगवान बोला जाता है वही भगवान पैसे का खुर्द-बुर्द करने में लगे है। तो छोटे अधिकारी का क्या आलम होगा। बड़े भगवान ही जाने।





