छत्तीसगढ़

बस्तर को मिलेगी रेल कनेक्टिविटी की नई राह, दूरी घटाने की उठी मांग

nidhi
21 Sept 2026 10:59 AM IST
बस्तर को मिलेगी रेल कनेक्टिविटी की नई राह, दूरी घटाने की उठी मांग
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दक्षिण बस्तर में रेल विस्तार की उम्मीद
जगदलपुर: दक्षिण बस्तर को दुर्ग और रायपुर से सीधे जोड़ने के लिए दंतेवाड़ा-बारसूर-नारायणपुर रेल लाइन की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। प्रस्तावित रेल कनेक्टिविटी को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस रेल मार्ग के बनने से यात्रा आसान होने के साथ-साथ समय और ईंधन की भी बचत हो सकती है। प्रस्तावित रेल लाइन के जरिए किरंदुल से दुर्ग की दूरी कम होने की संभावना जताई जा रही है। वर्तमान रेल मार्ग से किरंदुल और दुर्ग के बीच दूरी करीब 454 किलोमीटर है, जो नई रेल लाइन बनने के बाद घटकर लगभग 287 किलोमीटर रह सकती है। इससे करीब 167 किलोमीटर की दूरी कम होने का दावा किया जा रहा है।
124 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का प्रस्ताव
दंतेवाड़ा से नारायणपुर के बीच प्रस्तावित रेल लाइन की लंबाई करीब 124 किलोमीटर बताई जा रही है। इस परियोजना से दक्षिण बस्तर के कई दुर्गम क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की उम्मीद है। क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि बेहतर रेल सुविधा मिलने से लोगों को आवागमन में आसानी होगी। इसके अलावा व्यापार, रोजगार और शिक्षा से जुड़े अवसरों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
स्थानीय लोग इस रेल लाइन को केवल परिवहन सुविधा के रूप में नहीं देख रहे हैं, बल्कि इसे आर्थिक और पर्यटन विकास से भी जोड़कर देख रहे हैं। बारसूर, दंतेवाड़ा और अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं। बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से पर्यटकों की पहुंच आसान हो सकती है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
क्षेत्र के विकास के लिए अहम मांग
दक्षिण बस्तर लंबे समय से बेहतर परिवहन सुविधाओं की जरूरत महसूस कर रहा है। नागरिकों का मानना है कि रेल नेटवर्क के विस्तार से क्षेत्र मुख्य शहरों से तेजी से जुड़ सकेगा। रेल लाइन बनने से स्थानीय उत्पादों के परिवहन में भी सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे व्यापारिक गतिविधियों को गति मिल सकती है और क्षेत्र के आर्थिक विकास में मदद मिल सकती है।
लोगों को परियोजना से उम्मीदें
दंतेवाड़ा-बारसूर-नारायणपुर रेल लाइन को लेकर स्थानीय लोगों में उम्मीद बढ़ी है। उनका कहना है कि यह परियोजना केवल यात्रा का माध्यम नहीं होगी, बल्कि दक्षिण बस्तर के सामाजिक और आर्थिक बदलाव का जरिया भी बन सकती है। अब लोगों की नजर इस प्रस्तावित रेल परियोजना को लेकर आगे होने वाली कार्रवाई पर है।
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