छत्तीसगढ़
बारनवापारा अभ्यारण्य का जंगल सफारी के अधीन, देखें आदेश...
Shantanu Roy
29 Sep 2023 6:03 PM GMT

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छग
पिथौरा। क्षेत्र के प्रमुख बारनवापारा अभ्यारण्य को अंततः सामान्य वन मंडल से हटाकर जंगल सफारी के अधीन कर दिया गया है. इसका आदेश 15 सितंबर को शासन ने जारी कर दिया है. अब माना जा रहा है कि अभ्यारण्य के लिए अलग से बजट मिलेगा, जिसे सामान्य वन मंडल की तरह किसी भी परिक्षेत्र में खर्च नहीं किया जा सकेगा. वर्षों से अनदेखी झेल रहे बार अभ्यारण्य को अब अपना एक पृथक वन मंडल मिल गया है. ज्ञात हो कि पूर्व में भी बार अभ्यारण्य एक पृथक वन मंडल ही हुआ करता था. उस दौरान अभ्यारण क्षेत्र में प्रशासनिक कसावट भी उच्च स्तर की थी, परंतु इसके बाद सन 2000 में छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद बहुत से वन मंडल जैसे उत्पादन अभ्यारण सामाजिक वानिकी जैसे पृथक वन मंडल समाप्त कर सामान्य वन मंडल के अंतर्गत विलीन कर दिए गए. इसमें सबसे ज्यादा असर कार्य योजना वन मंडल (वर्किंग प्लान) को समाप्त करने का हुआ, जो आज तक अपना प्रभाव दिखा रहा है. इसके परिणाम स्वरूप आज तक कई वन मंडल की कार्य योजना लंबित पड़े हुए हैं.
बता दें कि अभ्यारण वन मंडल की परिकल्पना सेवानिवृत्ति प्रधान मुख्य वन संरक्षक आरएन मिश्रा (भारतीय वन सेवा) ने बहुत पहले की थी. उनका कहना था कि अभ्यारण में पदस्थ अधीक्षक एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी सामान्य वन मंडल अधिकारी के आगे बजट एवं धनादेश के लिए क्यों हाथ फैलाए, उनकी अपनी प्रशासनिक व्यवस्था है. यहां यह बताना लाजिमी होगा कि अभ्यारण एवं राष्ट्रीय उद्यान की प्रशासनिक व्यवस्था के तहत मुख्य वन संरक्षक, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक व प्रधान वन संरक्षक पूर्व से ही पदस्थ हैं. मात्र वन मंडल की ही कमी थी, जो अब शासन के आदेश के तहत पूरी हो रही है. इससे प्रशासनिक कसावट तो आएगी ही. बजट का पूर्ण लाभ भी मिल पाएगा.
पूर्व में समान वन मंडल को जो बजट मिलता था उसे वन मंडल अधिकारी सामान्य द्वारा अपने मुताबिक विभिन्न वन परिक्षेत्र में आवंटन कर देता था और इसके पीछे यह दलील दी जाती थी कि वन्य प्राणी तो सामान्य परिक्षेत्र में भी हैं, अतः वहां भी यह किया जाना है. विगत वर्षों में ऐसा कोई सामान्य वन मंडल अधिकारी पदस्थ नहीं रहा, जो अभ्यारण के प्रति पूरी तरह समर्पित होकर बजट आवंटित करता हो. इससे सामान्य परिक्षेत्र की तुलना में अभ्यारण को कम बजट मिलता है. बार अभ्यारण एवं भोरमदेव अभ्यारण को जंगल सफारी वन मंडल के अधीन करने से दोनों का वन्य प्राणी के लिए प्रबंधन कार्य सम हो जाएगा, परंतु यहां एक बात कहना उचित होगा कि अभ्यारण एवं जंगल सफारी में ऐसे वन अधिकारी एवं कर्मचारियों की ही नियुक्ति की जाए, जिनकी रुचि वन्य प्राणी के प्रति हो. वन्य प्राणी प्रबंधन में हो और वह इस कार्य को सजा के बतौर ना ले. अभ्यारण्य में उन्हें ही पदस्थ किया जाए, जिन्हें कम से कम 10 वर्षों 10 से 15 वर्षों तक वन्य प्राणी या अभ्यारण वन मंडल का अनुभव हो. साथ ही इन्हें जल्दी से हटाया ना जाए और पदोन्नति, स्थानांतरण, पदस्थापना भी अभ्यारण शाखा द्वारा ही किया जाए. इसमें सामान्य वन मंडल का हस्तक्षेप न हो, तभी यह सपना कारगर हो सकता है, नहीं तो पूर्व की तरह ही वन्य प्राणी परेशान होते रहेंगे और अभ्यारण में कुव्यवस्था बनी रहेगी.
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Shantanu Roy
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