छत्तीसगढ़

रायपुर में मनाई गई बकरीद, अफीफ और हम्ज़ा की मासूम दुआओं ने जीता दिल

Shantanu Roy
7 Jun 2025 6:41 PM IST
रायपुर में मनाई गई बकरीद, अफीफ और हम्ज़ा की मासूम दुआओं ने जीता दिल
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Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर में आज मुस्लिम समुदाय ने पारंपरिक उल्लास, श्रद्धा और सौहार्द्र के साथ बकरीद का त्योहार मनाया। सुबह से ही शहर की विभिन्न मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग जुटने लगे। सफेद कपड़े पहने, टोपियां सजाए और दिलों में इबादत का भाव लिए हजारों मुस्लिम श्रद्धालुओं ने बकरीद की नमाज अदा की। शहर की जामा मस्जिद, तेलीबांधा मस्जिद, मौदहापारा मस्जिद, कलेक्टोरेट मस्जिद सहित कई स्थानों पर विशेष नमाज का आयोजन किया गया।
बकरीद, जिसे ईद-उल-अजहा भी कहा जाता है, इस्लाम धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है जो हजरत इब्राहिम की अपने बेटे की कुर्बानी की भावना की याद में मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से कुर्बानी दी जाती है, जिसे गरीबों, जरूरतमंदों और रिश्तेदारों में बांटा जाता है। रायपुर में भी इस परंपरा को श्रद्धापूर्वक निभाया गया। कई मुस्लिम घरों में बकरे की कुर्बानी दी गई और इसे जरूरतमंदों में बांटा गया।
इस अवसर पर समाजिक सौहार्द्र की भी झलक देखने को मिली। हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल देते हुए कई गैर-मुस्लिम नागरिकों ने भी अपने मुस्लिम दोस्तों को ईद की बधाई दी और उनके घर जाकर मिठाइयों का स्वाद चखा। बाजारों में भी चहल-पहल रही, खासकर मीठे पकवानों जैसे सेवईं और शीर खुरमा की खुशबू हर गली में महसूस की गई।

इस पर्व की एक खास बात इस बार दो मासूम बच्चों अफीफ और हम्ज़ा द्वारा की गई दिल छू लेने वाली दुआ रही। महज़ 6 और 8 साल के ये दो भाई जब अपने छोटे-छोटे हाथ उठाकर प्रदेशवासियों की सलामती, अमन-चैन और तरक्की के लिए दुआ कर रहे थे, तो वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। नन्हीं उम्र में भी इन बच्चों की मासूमियत और भावनाएं इतनी गहरी थीं कि उन्होंने हर वर्ग, हर धर्म के लोगों की खुशहाली की दुआ की।
अफीफ ने नमाज के बाद कहा, “हमने अल्लाह से सबके लिए दुआ की है, ताकि सब खुश रहें, किसी को
तकलीफ
न हो।” वहीं हम्ज़ा ने मुस्कुराते हुए बताया, “मैंने अपने दोस्तों और स्कूल के सभी बच्चों के लिए भी दुआ की है, ताकि सब अच्छे से पढ़ाई करें और अच्छे इंसान बनें।” इन बच्चों की मासूम दुआ ने बकरीद की इस खुशी में एक नई और दिल को छू लेने वाली मिठास घोल दी। स्थानीय लोगों ने भी इन बच्चों की सराहना की और कहा कि यही भारत की असली तस्वीर है — जहां बच्चे भी सबके लिए सोचते हैं, दुआ करते हैं और एकता का संदेश देते हैं।
रायपुर पुलिस और जिला प्रशासन ने भी त्योहार को शांतिपूर्वक और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष तैयारियां की थीं। शहर के प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहा और ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए। कुल मिलाकर, रायपुर में इस बार की बकरीद ना केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक रही, बल्कि इसमें भाईचारे, मासूमियत और सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल भी देखने को मिली। अफीफ और हम्ज़ा की मासूम दुआ ने इस पर्व को और भी खास बना दिया।
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