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रायपुर: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने जमानत (बेल) प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और स्पष्टता लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। हाईकोर्ट ने जमानत आवेदनों के मौजूदा स्वरूप (फारमेट) में संशोधन करते हुए अब अभियुक्तों के लिए विस्तृत जानकारी देना अनिवार्य कर दिया है। सोमवार, 11 मई 2026 को जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, 'छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय नियम, 2007' में तत्काल प्रभाव से बदलाव किए गए हैं।
नए नियमों के तहत, अग्रिम और नियमित जमानत आवेदनों में पहले इस्तेमाल होने वाली सामान्य जानकारियों को हटा दिया गया है। अब आवेदकों को एक निर्धारित 'टेबल (टैबुलर फार्म) में अपनी पूरी कानूनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इस आदेश के बाद अब जमानत की अर्जी देना पहले के मुकाबले अधिक विस्तृत और तथ्यात्मक हो जाएगा।
हाईकोर्ट ने नए आवेदन फॉर्म को छह मुख्य भागों में विभाजित किया है. ताकि सुनवाई के दौरान अदालत के पास मामले का पूरा लेखा-जोखा हो। केस का विवरण-एफआईआर नंबर, तारीख, थाना और लगाई गई धाराओं के साथ-साथ उनमें मिलने वाली अधिकतम सजा का ब्यौरा देना होगा।
गिरफ्तारी की तारीख और अब तक जेल में बिताई गई कुल अवधि की सटीक जानकारी देनी होगी। ट्रायल का स्टेटस, केस किस स्तर पर है (जांच, चार्जशीट या ट्रायल), कुल कितने गवाह है और कितनों के बयान दर्ज हो चुके हैं, यह स्पष्ट करना अनिवार्य है।
आवेदक के खिलाफ पहले से दर्ज एफआईआर और पुराने मामलों की वर्तमान स्थिति (लंबित, बरी या सजा) की जानकारी देनी होगी। पिछली जमानत अर्जीः क्या पहले भी जमानत के लिए आवेदन किया गया था? यदि हां, तो किस कोर्ट में और उसका क्या नतीजा रहा।
यदि आवेदक के खिलाफ कोई गैर-जमानती वारंट जारी हुआ हो या उसे 'भगोड़ा अपराधी घोषित किया गया हो, तो उसका विवरण भी टेबल में देना होगा।
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