छत्तीसगढ़

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया संविधान निर्माण में छत्तीसगढ़ का योगदान पुस्तक का विमोचन

Shantanu Roy
2 Dec 2025 10:48 PM IST
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया संविधान निर्माण में छत्तीसगढ़ का योगदान पुस्तक का विमोचन
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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता कालीन योगदान और संविधान निर्माण में उसकी भूमिका पर आधारित लेखक जागेश्वर प्रसाद की महत्वपूर्ण पुस्तक ‘संविधान निर्माण में छत्तीसगढ़ का योगदान’ का विमोचन शनिवार को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह द्वारा उनके निवास कार्यालय में किया गया। विमोचन कार्यक्रम में संस्कृति कर्मी अशोक तिवारी, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी अध्यक्ष शशांक शर्मा, तथा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. देवधर महंत विशिष्ट अतिथि और वक्ता के रूप में उपस्थित थे। डॉ. रमन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान निर्माण पर कई किताबें उपलब्ध हैं, मगर छत्तीसगढ़ के योगदान का व्यवस्थित और लिखित विवरण अब तक सामने नहीं आया था। उन्होंने कहा कि- “जागेश्वर की यह पुस्तक एक ऐतिहासिक कदम है और आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगी।” उन्होंने संविधान के हिन्दी प्रारूप तैयार करने में दुर्ग निवासी धनश्याम सिंह गुप्ता की भूमिका को विशेष रूप से याद किया।


डॉ. सिंह ने बताया कि जब गुप्ता संविधान को हिन्दी में लिख रहे थे, तब प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू भी भाषा के कठिन और गूढ़ हिस्सों को समझने के लिए उनसे परामर्श के लिये बुलाये थे। इसके साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ की छह प्रमुख विभूतियों- ठाकुर छेदीलाल, रविशंकर शुक्ल, ठाकुर राम प्रसाद पोटाई, पं. किशोरी मोहन त्रिपाठी, दीवान ठाकुर रघुराज सिंह का उल्लेख किया, जिन्होंने संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अफसोस जताया कि इतने बड़े योगदान के बावजूद आज मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ या
सीपी-बरा
क्षेत्र में इन विभूतियों के नाम पर कोई उल्लेखनीय स्मारक, सड़क या संस्थान नहीं मिलता। डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि संविधान निर्माण में छत्तीसगढ़ के योगदान पर शोधकार्य जारी रहना चाहिए। “जरूरत पड़े तो एक वर्ष लग जाए, लेकिन इस विषय पर एक व्यापक और प्रमाणिक दस्तावेज तैयार होना चाहिए। प्रकाशन सहित आवश्यक सहयोग मैं व्यक्तिगत रूप से उपलब्ध कराऊंगा,” उन्होंने आश्वासन दिया। कार्यक्रम में राहुल कुमार सिंह, डॉ. के.के. अग्रवाल, रामेश्वर शर्मा, रसिक बिहारी अवधिया, राकेश तिवारी, वैभव बेमेतरिहा, संजीव साहू, गोविंद धनगर, ममता अहार, इंद्रदेव यदु, जयंत साहू सहित बड़ी संख्या में लेखक, पत्रकार, इतिहासकार, रंगकर्मी और साहित्यकार उपस्थित रहे।
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