छत्तीसगढ़

मनमानी फीस और स्कूलों की दादागिरी, छात्र-अभिभावक परेशान

Nil dhankar
30 Jun 2025 11:46 AM IST
मनमानी फीस और स्कूलों की दादागिरी, छात्र-अभिभावक परेशान
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प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना मुश्किल, सरकारी स्कूलों में दलाल सक्रिय

स्कूल स्कूल न होकर बन गया है पैसे वालों का अखाड़ा, राजनीति रसूख का दुरूपयोग

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी, पालकों पर दबाव बनाने बुलाया जाता है बाउंसर को

सरकारी स्कूलों का तो कोई माई -बाप ही नहीं, डीईओ औऱ प्राचार्य कर रहे मनमानी

शिक्षा का हो गया व्यवसायीकरण, धन्नासेठों ने बड़े-बड़े स्कूल खोलकर लूट का लाइसेंस ले लिया

निजी स्कूलों में फीस के नाम पर मचा रखी है लूट, ड्रेस से लेकर कापी -पुस्तक में भारी कमाई

आठवीं फेल राजनीतिक रसूखदार कर रहे निजी स्कूलों की संचालन

रायपुर (जसेरि)। प्रदेश में शिक्षा को गुणवत्ता पूर्ण बनाने के लिए सरकार ने नई शिक्षा नीति 2020 बनाई है जिसमें सरकारी और निजी स्कूलों में होने वाली पढ़ाई में कोताही नहीं बरती जा सके। नई शिक्षा सत्र का आरंभ हो चुका है छत्तीसगढ़ शासन ने सर्व शिक्षा अभियान को बहुत ही गंभीरता से लागू कर अच्छे से जनता के लिए सुविधाओं को प्रचार प्रसार कर नई शिक्षा सत्र का शुभारंभ किया था, लेकिन अधिकांश शासकीय शाला के प्रिंसिपलों की लूट की पोल खुल रही है और दलाल नेता के चुंगल में फंस कर बेवजह पालकों को परेशान कर रहे हैं ।

महंगाई के इस दौर में जहां मां-बाप को स्कूल यूनिफॉर्म, कॉपी किताब और सिलेबस पर उलझ कर कमर तोड़ महंगाई का सामना कर रहे है वहीं मनमाने ढंग से महंगाई का बहुत बड़ा असर स्कूली शिक्षा में पड़ा है। फीस के नाम पर पालकों से मनमाने वसूली हो रही है। फीस में पिछले 5 सालौं में 30 से 50 प्रतिशत का इजाफा हुआ है उसमें से एडमिशन के लिए स्कूलों की मनमानी चल रही है। हद तो तब हो जाती है जब शासकीय स्कूल में भी एडमिशन करने के लिए बहाने बताकर सीट नहीं है जगह खाली नहीं है का एक राग अलापा जाता है। नाडा पजामा छाप दलाल और आदे राजनीतिक और आधे सामाजिक नेता बनकर एडमिसन का दुकाल खोल रखे है। शिक्षा के व्यवसायीकऱण में दलालों का बहुत बड़ा योगदान है जो कही भी किसी भी स्कूल में एडमिशन दिलाने का झांसा देकर लाखों में खेल रहे है।

दलाल टाइप राजनेता किसी भी स्कूल में एडमिशन दिला दूंगा, एडमिशन करा दूंगा का झांसा देकर 10 से 15000 रुपए की रिश्वत की मांग कर रहे हैं प्राइवेट स्कूलों में मनमाने डोनेशन और स्कूल की फीस बढ़ा दी गई है। पालक अभिभावक हलकान है। स्कूल दर स्कूल पालक भटक रहे है। कहीं पर कोई सुनवाई नहीं है और किसी प्रकार का लगाम स्कूलों पर नहीं होने के कारण स्कूल वाले काबोबारी की तरह नफा नुकसान के गुणाभाग में शिक्षण संस्थान मनमानी पर उतर गए हैं और जनता को अनाप-शनाप पैसों के लूट रहे हैं। सभी प्राइवेट स्कूलों में एक तरह का गिरोह सक्रिय होकर संगठित तौर पर स्कूल मैनेजमेंट आम जनता को एडमिशन के नाम पर खुलेआम लूट रहे हैं। किसी का दबाव नहीं होने के कारण बेवजह पैसा वसूला जा रहा है। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और दादागिरी का यह आलम है सीधा पालकों को जवाब दिया जाता है जगह नहीं है सीट नहीं है और थोड़ी सी बात बढऩे पर बाउंसर को बुलाया जा रहा है। अधिकांश प्राइवेट स्कूलों में बड़े अप्रोच लगने के बावजूद सरकार के नुमाइंदों द्वारा फोन करने के बावजूद एडमिशन फीस और डोनेशन भी माफ नहीं किया जाता। राजधानी में लगभग डेढ़ सौ से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों की शिकायत विभिन्न स्तरों में की गई है कुछ एक मामलों में हमारे अखबार के द तर में पालकों ने आकर विस्तार से प्राइवेट स्कूलों की कहानी बतायाऔर भ्रष्टाचार की पोल खोली है। जनता परेशान है स्कूलों की मनमानी और पैसा वसूली से कई प्राइवेट स्कूल विधायकों को भी जगह नहीं है खुलेआम बोलते दिखे हैं। जबकि छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा और एक सूत्री कार्यक्रम सर्व शिक्षा अभियान को सफलतापूर्वक संचालित करने का है। सरकार की उच्च शिक्षा के प्रति जवाबदारी और जि मेदारी निभाने की मंशा के अनुरूप विभाग के सभी कर्मचारियों को कार्य कर जनता की भलाई हेतु सुचारू रूप से व्यवस्था करना था लेकिन सरकारी नियम को सरकार के ही कर्मचारी और अधिकारी धज्जियां उड़ाकर शासन को बदनाम करने में आमादा है। स्कूलों में सैद्धांतिक खामियां होने के बाद भी अधिकारियों से सेटिंग कर मान्याता का खेल चल रहा है। डेढ़ सौ स्कूलों में सवा सौ स्कूल डिफाल्टर श्रेणी में होने के बाद भी उनको मान्यता देकर लूटने का लाइसेंस दिया गया है।

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