छत्तीसगढ़

हिस्ट्रीशीटर तोमर बंधुओं की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

Shantanu Roy
20 Aug 2025 10:23 PM IST
हिस्ट्रीशीटर तोमर बंधुओं की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
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छग
Raipur. रायपुर। हिस्ट्रीशीटर तोमर बंधुओं को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रहे 6 अलग-अलग मामलों में दायर की गई अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। जमानत याचिका खारिज होने के पीछे एक मुख्य वजह यह भी बताई जा रही है कि आरोपियों ने अपने आवेदन के साथ आवश्यक शपथ पत्र (Affidavit) जमा नहीं किया था।
क्या है मामला
तोमर बंधुओं पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और उन्हें पुलिस रिकॉर्ड में हिस्ट्रीशीटर घोषित किया गया है। इन पर धोखाधड़ी, रंगदारी और जमीन हड़पने जैसे कई आरोप हैं। हाल ही में इन पर दर्ज 6 अलग-अलग आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी, जिसके चलते उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए CBI कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई थी।
याचिका खारिज होने का कारण
याचिका पर सुनवाई के दौरान, CBI कोर्ट ने पाया कि तोमर बंधुओं द्वारा दायर की गई अग्रिम जमानत याचिकाओं में कानून द्वारा अनिवार्य शपथ पत्र संलग्न नहीं था। बिना शपथ पत्र के किसी भी जमानत याचिका को अधूरा माना जाता है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने इस तकनीकी कमी को गंभीरता से लेते हुए, आरोपियों की याचिका को तत्काल प्रभाव से खारिज कर दिया।
कानूनी जानकारों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की महत्वपूर्ण याचिकाओं में तकनीकी खामियां बेहद गंभीर होती हैं। उनका कहना है कि शपथ पत्र के बिना, यह साबित नहीं होता कि याचिका सही जानकारी के आधार पर दायर की गई है और यह याचिकाकर्ता द्वारा ही दी गई है। यह एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसका पालन करना सभी के लिए अनिवार्य होता है। इस मामले में, तोमर बंधुओं की ओर से यह चूक उनके लिए भारी पड़ गई।
आगे की राह
CBI कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद, अब तोमर बंधुओं के पास आगे की कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना ही एकमात्र रास्ता बचा है। उन्हें या तो उच्च न्यायालय में अपील करनी होगी या फिर आत्मसमर्पण करके नियमित जमानत के लिए आवेदन करना होगा। यह फैसला दर्शाता है कि कोर्ट कानूनी प्रक्रियाओं और नियमों को लेकर सख्त है, और किसी भी तरह की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा, भले ही आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। यह घटना उन सभी के लिए एक सबक है जो कानूनी प्रक्रियाओं को हल्के में लेते हैं।
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