छत्तीसगढ़
Anti-ragging कार्यशाला का आयोजन, पुलिस ने छात्रों को बताए रैगिंग के कानूनी परिणाम
Shantanu Roy
28 Oct 2026 4:39 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में विद्यार्थियों को रैगिंग के दुष्परिणामों, कानूनी प्रावधानों और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से रायपुर कमिश्नरेट द्वारा विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को श्री बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेस में आयोजित एंटी रैगिंग कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित तुकाराम कांबले और डीसीपी नॉर्थ जोन दीपमाला कश्यप ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। इस दौरान छात्रों को रैगिंग की रोकथाम, नशा मुक्ति, महिला सुरक्षा, पिंक पेट्रोलिंग और साइबर अपराधों से बचाव के महत्वपूर्ण उपायों की जानकारी दी गई।
रैगिंग मुक्त परिसर बनाने के लिए विद्यार्थियों को किया जागरूक
कार्यशाला के दौरान डीसीपी नॉर्थ जोन दीपमाला कश्यप ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन (PPT) के माध्यम से विद्यार्थियों को रैगिंग के विभिन्न स्वरूपों और उसके दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रैगिंग केवल शारीरिक उत्पीड़न तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक प्रताड़ना, अपमानजनक व्यवहार और किसी छात्र को जबरन अनुचित गतिविधियों में शामिल करना भी इसके अंतर्गत आ सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को आपसी सम्मान, सहयोग और अनुशासन की भावना अपनाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने के लिए सभी विद्यार्थियों की भागीदारी जरूरी है।
रैगिंग करने वालों पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित तुकाराम कांबले ने अपने संबोधन में रैगिंग से संबंधित कानूनी प्रावधानों और संभावित दंडात्मक कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि यदि किसी छात्र के साथ रैगिंग की घटना होती है, तो उसे छिपाने के बजाय तत्काल संस्थान के जिम्मेदार अधिकारियों या पुलिस को सूचना दें। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और अनुशासित शैक्षणिक वातावरण तैयार करना केवल संस्थान प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
नशा मुक्ति और महिला सुरक्षा पर दिया विशेष जोर
कार्यक्रम में युवाओं को नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान के बारे में भी जागरूक किया गया। पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने और समाज में नशा मुक्ति का संदेश फैलाने की अपील की। इसके अतिरिक्त पिंक पेट्रोलिंग और महिला सुरक्षा से जुड़ी जानकारी दी गई। छात्राओं को किसी भी असुरक्षित परिस्थिति या उत्पीड़न की स्थिति में पुलिस से सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।
साइबर ठगी से बचने के बताए उपाय, हेल्पलाइन 1930 की दी जानकारी
रायपुर कमिश्नरेट के साइबर जागरूकता अभियान और 'साइबर संकल्प' के तहत विद्यार्थियों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के उपाय बताए गए। कार्यक्रम में फर्जी लिंक, सोशल मीडिया के दुरुपयोग, डिजिटल भुगतान से जुड़ी ठगी और संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, पासवर्ड या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। साथ ही साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने की जानकारी दी गई।
सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण बनाने का दिया संदेश
कार्यशाला में संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारी, शिक्षाविद और विद्यार्थी उपस्थित रहे। पुलिस अधिकारियों ने छात्रों को जिम्मेदार नागरिक बनने और कानून का पालन करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को रैगिंग, नशे और साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के साथ महाविद्यालय परिसर में सुरक्षित, अनुशासित और सकारात्मक वातावरण को बढ़ावा देना रहा। रायपुर कमिश्नरेट की इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं।
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