छत्तीसगढ़

अन्नदाता खालिस्तानी हैं या खलिहानिस्तानी

Admin2
4 Dec 2020 6:09 AM GMT
अन्नदाता खालिस्तानी हैं या खलिहानिस्तानी
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ज़ाकिर घुरसेना/कैलाश यादव

अन्नदाता दिल्ली बार्डर पर पिछले एक सप्ताह से प्रदर्शन कर रहे हैं। इनके प्रदर्शन में खालिस्तानी घुस आये हैं, ऐसा सरकार का मानना है। ये किसान अन्नदाता खालिस्तानी हैं या खलिहानिस्तानी हैं समझ में नहीं आ रहा। अगर खालिस्तानी हैं तो सरकार इनसे चर्चा क्यों कर रही है और यदि ये खलिहानिस्तानी हैं तो सरकार इनकी मांगों को पूरा क्यों नहीं कर रही है। सरकार का कहना है कि ये सब विपक्ष द्वारा फैलाया गया भ्रम है, अगर ये भ्रम है तो सरकार इस भ्रम को दूर क्यों नहीं करती। जनता में खुसुर-फुसुर है की किसान भाई डरे हुए हैं और जो भी बात हो लिखित में चाहते हैं क्योंकि एमएसपी का मामला बीएसएनएल जैसा न हो जाये, एक प्राइवेट मोबाइल कम्पनी ने बीएसएनएल को बंद होने के कगार पर ला दिया है।

शहर बसा नहीं... लुटेरे तैयार

एक दिसंबर से धन खरीदी चालू हो गई, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धान खरीदी के दौरान सीमावर्ती राज्यों से लाए जाने वाले धान पर कड़ाई से रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों को सख्त निर्देश देने के बाद सक्रिय हो गए है। वरना कई ट्रक धान दूसरे प्रदेश से लाकर बिचौलिए बेच देते। पिछले दिनों चिल्फी पुलिस ने शानदार काम कर दिखाया कि उत्तर प्रदेश धान बेचने आ रहे ट्रक को सीधा मंडी न ले जाकर थाने पहुंचा दिया। इसे कहते है शहर बसा नहीं लुटेरे तैयार ।

आरटीओ में दलालों की चांदी

आरटीओ कार्यालय में दलाल सक्रिय हैं, देखा जाए तो आरटीओ ऐसा विभाग है जहां का सिस्टम शुरू से दलालों के गिरफ्त में रहा है। विभाग की मूल फाइल के बारे में जितना दलाल जानते है उतना वहां का बाबू नहीं जानता, इसका खामियाजा आम जनता भुगतती है। दलाल अपनी मर्जी से फीस वसूलते है और कभी ऐसा भी होता है कि पैसा लेकर भी काम नहीं होता। वहां ऐसा भी सिस्टम देखा गया है कि आरटीओ का हर बाबू अपने खर्चे पर सहायक रखे हुए है। सारा काम वही करते हंै।

कौन गुंडे-कौन बदमाश

पिछले दिनों डीजीपी साहब ने पुलिस को चुस्त करते हुए कहा कि गुंडे बदमाशों को डंडे का डर दिखाओ, उनमें पुलिस का खौफ होना चाहिए । बहुत अच्छी पहल है, पुलिस डीजी साहब के आदेश का पालन कर रही है, और दहशत तो है लेकिन यह कहीं-कहीं आम जनता में दिखने लगा है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि पिछले दिनों सूरजपुर में पुलिस की पिटाई से विद्युत विभाग के इंजीनियर की मौत हो गई, अब यह समझ में नहीं आ रहा है कि कौन गुंडे और कौन बदमाश हैं, ओरिजनल गुंडे बदमाश तो बेखौफ होकर काम करते हैं इनका दोस्ताना जग जाहिर है। खौफ तो आम जनता में है। उस खौफ का हटना जरूरी है।

चेंबर चुनाव स्थगित

कई महीनों से चेंबर चुनाव की गहमा-गहमी अब शांत हो गई है, चेंबर चुनाव आगामी आदेश तक रोक दी गई है। क्योंकि चेंबर के दो चुनाव अधिकारी एक सप्ताह के भीतर ही दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। जनता में खुसुर-फुसुर है कि जान है तो जहान है,चुनाव तो कभी भी हो सकता है।

छत्तीसगढ़ में रामराज्य आएगा

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि महात्मा गांधी का रामराज्य छत्तीसगढ़ में लाना है, शेर और बकरी को एक घाट में पानी पिलाना है,ऐसा माहौल बनाना है कि सबको लगे कि सरकार उसी की है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि यहां तो शेर और शेर एक घाट में पानी नहीं पी पा रहे हैं तो बकरी और शेर कैसे पानी पी पाएंगे। भाजपाई कभी नहीं मान सकते कि उनकी सरकार हैं, उनको रामराज्य नहीं बल्कि रमन राज्य की दरकार है, भाजपाइयों की तो बात छोड़ कांग्रेसियों की बात करें तो कई कांग्रेसी को नहीं लगता कि उनकी सरकार है, उनको तो इससे अच्छा भाजपा की सरकार लगती थी, दुकानदारी सजी हुई थी, जो अब बंद होने के कगार पर है।

मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता का जवान हो गया कायल

स्पंदन कार्यक्रम में नक्सली हमले में घायल बघेरा में पदस्थ प्रदान आरक्षक अंतोष मरकाम ने अपनी जिंदादिली और जाबाजी की घटना बयां कर वहां उपस्थित अधिकारियों की आंखोंं को नम कर दिया। अंतोष मरकाम ने कहा कि मैं सबसे पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मानवीय संवेदनशीलता को सैल्यूट करता हूं। जिन्होंने नक्सल हमले में घायल पुलिस जवानों की सुध लेकर नया जीवन देने की पहल की है। मुख्यमंत्री के मंशानुरूप डीजीपी डीएम अवस्थी बारी-बारी से पुलिस जवानों की समस्याओं का समाधान कर रहे है। इस तरह के कार्यक्रम से पुलिस जवानों में नई ऊर्जा देखने को मिल रहा है। वे अपनी पीड़ा सीधे अपने मुखिया को बता रहे है, जो तत्काल हल हो रहा है।

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