छत्तीसगढ़

भिलाई के कलाकार का अद्भुत कमाल! चने के दाने जितनी छोटी मां दुर्गा की मूर्ति बनाकर किया हैरान

Shubhra Nandy
20 Oct 2026 10:25 AM IST
भिलाई के कलाकार का अद्भुत कमाल! चने के दाने जितनी छोटी मां दुर्गा की मूर्ति बनाकर किया हैरान
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आधे सेंटीमीटर की प्रतिमा
भिलाई : छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध सूक्ष्म मूर्तिकार डॉ. अंकुश देवांगन ने नवरात्रि के अवसर पर संगमरमर के पत्थर से मां दुर्गा की बेहद छोटी और आकर्षक प्रतिमा तैयार की है। इस अद्भुत कलाकृति का आकार मात्र आधा सेंटीमीटर यानी करीब पांच मिलीमीटर है। चने के दाने के बराबर आकार वाली यह मूर्ति इतनी छोटी है कि इसे उंगली के नाखून पर आसानी से रखा जा सकता है। इसके बावजूद कलाकार ने मां दुर्गा के स्वरूप को बेहद बारीकी से उकेरा है। कलाकार ने इसे दुनिया की सबसे छोटी दुर्गा प्रतिमा बताया है। हालांकि, इस विशेष मूर्ति के विश्व रिकॉर्ड होने की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। 15 अक्टूबर 2026 को इस कलाकृति की जानकारी सार्वजनिक हुई थी।
आधे सेंटीमीटर की मूर्ति में मां दुर्गा के आठ हाथ
डॉ. अंकुश देवांगन द्वारा तैयार इस सूक्ष्म प्रतिमा में मां दुर्गा सिंह पर विराजमान दिखाई देती हैं। मात्र आधे सेंटीमीटर की मूर्ति में देवी के आठों हाथों को भी उकेरा गया है। इन हाथों में खड्ग, तलवार, त्रिशूल, गदा और विभिन्न अस्त्र-शस्त्र दिखाए गए हैं। इतने छोटे आकार में देवी का स्वरूप और उनके आयुधों को उकेरना सूक्ष्म कला की विशेषता को प्रदर्शित करता है। संगमरमर जैसे पत्थर को तराशकर बनाई गई यह कलाकृति नवरात्रि के अवसर पर धार्मिक आस्था और रचनात्मक कला के संगम के रूप में सामने आई है।
1985 से कर रहे हैं सूक्ष्म कलाकृतियों का निर्माण
डॉ. अंकुश देवांगन लंबे समय से सूक्ष्म मूर्तिकला के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने वर्ष 1985 में इस कला के साथ अपना रचनात्मक सफर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने विभिन्न धर्मों के देवी-देवताओं, महापुरुषों, ऐतिहासिक इमारतों और महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों की छोटी-छोटी प्रतिमाएं तैयार कीं। उनकी कलाकृतियों की विशेषता बेहद छोटे आकार में किसी आकृति की पहचान और उसके महत्वपूर्ण विवरणों को प्रदर्शित करना है।देवांगन इससे पहले भगवान गणेश की महज 0.4 मिलीमीटर आकार की मूर्ति भी बना चुके हैं, जिसके लिए उन्हें रिकॉर्ड संबंधी पहचान मिली थी।
हिंसा छोड़ो, कला से नाता जोड़ो अभियान से जुड़े
डॉ. अंकुश देवांगन सूक्ष्म मूर्तिकला का उपयोग केवल अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश देने के लिए भी करते रहे हैं। उनके अनुसार, वर्ष 1989 में चीन के तियानमेन चौक पर लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसक कार्रवाई के बाद उन्होंने कला के माध्यम से शांति का संदेश देने का निर्णय लिया। इसी सोच के साथ उन्होंने माओवादी हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में 'हिंसा छोड़ो, कला से नाता जोड़ो' अभियान शुरू किया।इस अभियान का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को सृजनात्मक गतिविधियों से जोड़ना तथा उन्हें शिक्षा, रचनात्मकता और शांतिपूर्ण जीवन की ओर प्रोत्साहित करना है। देवांगन का मानना है कि कला बच्चों में सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
बच्चों को कला से जोड़ने का प्रयास
मूर्तिकार देवांगन के अनुसार, उनके अभियान से अनेक बच्चों को कला और शिक्षा के प्रति प्रेरणा मिली है। वे चाहते हैं कि बच्चे अपनी रचनात्मक क्षमता पहचानें और समाज के विकास में योगदान देने वाले कार्यों में रुचि लें। इसी उद्देश्य से वे देवी-देवताओं, महापुरुषों और ऐतिहासिक विषयों से संबंधित सूक्ष्म कलाकृतियों का निर्माण करते हैं। उनकी मान्यता है कि कला के प्रति रुचि बच्चों को अनुशासन, धैर्य और नई चीजें सीखने के लिए प्रेरित कर सकती है। हालांकि, इस अभियान से लाभान्वित बच्चों की संख्या का स्वतंत्र मूल्यांकन उपलब्ध नहीं है।
लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में मिल चुकी है पहचान
डॉ. अंकुश देवांगन को सूक्ष्म मूर्तिकला के क्षेत्र में पहले भी सम्मान मिल चुका है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वर्ष 2003 में उनकी सूक्ष्म कलाकृतियों को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से संबंधित राष्ट्रीय स्तर की पहचान मिली थी। उन्होंने भगवान गणेश की बेहद छोटी प्रतिमा बनाकर भी विशेष पहचान बनाई। इसके अतिरिक्त वे ललित कला अकादमी, नई दिल्ली के कार्यकारी बोर्ड से जुड़े रहे हैं। उनकी कला यात्रा में पारंपरिक मूर्तिकला और आधुनिक सूक्ष्म तकनीक का संयोजन देखने को मिलता है।
भिलाई इस्पात संयंत्र में भी कार्यरत हैं कलाकार
डॉ. अंकुश देवांगन भिलाई इस्पात संयंत्र के चिकित्सा विभाग में कार्यरत बताए जाते हैं। अपने पेशेवर दायित्वों के साथ वे मूर्तिकला के लिए भी समय निकालते हैं और निरंतर नई कलाकृतियां तैयार करते रहते हैं। उन्होंने नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संगमरमर से बनी एक सूक्ष्म प्रतिमा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को भी भेंट की थी। इस कलाकृति में भगवान राम के मंदिर की प्रतिकृति भी शामिल थी।
छत्तीसगढ़ की कला को मिली विशेष पहचान
छत्तीसगढ़ अपनी लोककला, शिल्प और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। राज्य के कलाकार विभिन्न माध्यमों से अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करते रहे हैं। डॉ. अंकुश देवांगन की सूक्ष्म मूर्तिकला इसी रचनात्मक परंपरा का एक उदाहरण है। चने के दाने जितनी छोटी मां दुर्गा की प्रतिमा में देवी का स्वरूप तैयार कर उन्होंने बारीक शिल्पकला का प्रदर्शन किया है। उनकी यह कलाकृति धार्मिक श्रद्धा के साथ-साथ कला के माध्यम से शांति, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का प्रयास भी है।
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