छत्तीसगढ़

दंतेवाड़ा से रायपुर लौटे अमित शाह, गृह विभाग की लेंगे अहम बैठक

Nil dhankar
5 April 2025 5:33 PM IST
दंतेवाड़ा से रायपुर लौटे अमित शाह, गृह विभाग की लेंगे अहम बैठक
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रायपुर। दंतेवाड़ा से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह वापस रायपुर लौट आए है, वे देर रात गृह विभाग की अहम बैठक लेंगे। जिसमें पुलिस विभाग के बड़े अफसर मौजूद रहेंगे। बता दें कि आज सुबह अमित शाह दंतेवाड़ा दौरे पर गए थे जहां वे “बस्तर पंडुम“ कार्यक्रम में शामिल हुए। और कार्यक्रम को संबोधित किया। इसके बाद वे जवानों से मिलने कैम्प पहुंचे थे।

अमित शाह का ट्वीट - जो बस्तर-सुकमा क्षेत्र कभी लाल आतंक (नक्सलवाद) का गढ़ था, वहाँ की डोंडरा पंचायत में सोलर पैनल पर लेटकर मोबाइल चलाते बच्चों को देखकर मन आनंदित है। विकास और विश्वास को दर्शाती यह तस्वीर आपसे साझा कर रहा हूँ।

“बस्तर पंडुम“ कार्यक्रम में अमित शाह ने क्या कहा जानिए

जहाँ कभी गोलियों की गूंज थी, आज वहाँ मशीनों की आवाज आती है। गाँव जो वीरान थे, वहाँ अब स्कूलों की घंटियां बज रही हैं। जहाँ सड़क बनाना भी सपने जैसा लगता था, वहाँ राजमार्ग बन रहे हैं और जहाँ बच्चा स्कूल जाने को डरता था, वहीं अब कम्प्यूटर के माध्यम से पूरे विश्व के साथ बात कर रहा है। बस्तर का विकास इसलिए हो रहा है क्योंकि अब नक्सलवाद के साथ कोई नहीं जुड़ रहा है।

वर्ष 2024 में 881 नक्सलियों ने सरेंडर किया और 2025 में अब तक 521 नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। जो सरेंडर करेंगे, वो मेनस्ट्रीम में आएंगे और जो हथियार लेकर चलेंगे उनके लिए हमारे सुरक्षाकर्मी मोर्चा संभालेंगे। अगले मार्च तक पूरा देश लाल आंतक से मुक्त होकर रहेगा। बस्तर अब भय नहीं, भविष्य का पर्याय बनेगा।

वो जमाना चला गया जब यहाँ पर गोलियां चलती थी, बम धमाके होते थे। जिनके हाथों में हथियार हैं उनसे विनती करता हूँ कि हथियार डालकर मेनस्ट्रीम में आइए क्योंकि आप हमारे अपने हैं। कोई नक्सली मारा जाता है किसी को आनंद नहीं होता है। इस क्षेत्र को विकास चाहिए। बीते 50 वर्षों में जो विकास यहाँ नहीं पहुंचा, मोदी जी 5 साल में विकास को यहाँ पहुंचाएंगे।

बस्तर में शांति तभी हो सकती है, जब बच्चे स्कूल में जाएं, माताओं के स्वास्थ्य की चिंता हो, आदिवासी युवा कुपोषण से पीड़ित ना हो और उसकी पढ़ाई लिखाई की व्यवस्था हो, हर गाँव में एक दवाखाना हो, हर तहसील में अस्पताल हो, हर घर में 7 किलो चावल मुफ्त पहुंचता हो, सभी के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड और स्वास्थ्य का बीमा हो। यह तभी हो सकता है जब बस्तर के लोग तय करें कि, यहाँ का हर गांव नक्सलमुक्त बनेगा।

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