छत्तीसगढ़

अंबेडकर अस्पताल विवाद: हाईकोर्ट ने 2 लाख रुपए मुआवजा और कड़ी कार्रवाई का दिए निर्देश

Shantanu Roy
15 Oct 2025 10:35 PM IST
अंबेडकर अस्पताल विवाद: हाईकोर्ट ने 2 लाख रुपए मुआवजा और कड़ी कार्रवाई का दिए निर्देश
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Bilaspur/Raipur. बिलासपुर/रायपुर। रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) में एचआईवी पॉजिटिव महिला की पहचान उजागर करने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने राज्य सरकार को दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने और पीड़िता को 2 लाख रुपए मुआवजा देने के निर्देश दिए। अदालत ने इस कृत्य को अमानवीय और नैतिकता तथा निजता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन करार दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि यह घटना न केवल व्यक्तिगत सम्मान का हनन है, बल्कि समाज में भेदभाव और कलंक का भी कारण बन सकती है। कोर्ट ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ने बताया कि एचआईवी पीड़ितों की पहचान उजागर न करने का नियम पहले से स्पष्ट है और सभी चिकित्सा संस्थानों को इसका पालन करने के लिए निर्देशित किया गया है। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि बावजूद इसके अस्पताल कर्मियों की लापरवाही के कारण पहचान उजागर हुई। मामले में एफआईआर दर्ज की गई है और विभागीय जांच जारी है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए। इस विवाद की जड़ एक ऐसा पोस्टर था, जो नवजात शिशु के पास गाइनो वार्ड में और नर्सरी वार्ड में लगाया गया था। पोस्टर में यह लिखा था कि बच्चे की मां एचआईवी पॉजिटिव है। जब बच्चे का पिता शिशु को देखने पहुंचा तो उसने यह पोस्टर देखा और भावुक होकर रो पड़ा। हाईकोर्ट ने इस घटना को अत्यंत अमानवीय, असंवेदनशील और निंदनीय करार दिया।

कोर्ट ने कहा कि यह घटना सीधे तौर पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति का सार्वजनिक करना न केवल निजता का उल्लंघन है, बल्कि सामाजिक कलंक और मानसिक पीड़ा का कारण भी बनता है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पीड़िता के भावनात्मक और सामाजिक नुकसान को ध्यान में रखते हुए मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण संदेश है कि स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों की गोपनीयता और
सम्मान
का कड़ाई से पालन किया जाए। अधिवक्ता यशवंत सिंह ने यह भी बताया कि अस्पताल प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि भविष्य में इस प्रकार की संवेदनशील जानकारी को सार्वजनिक न किया जाए। अस्पताल में सभी कर्मचारियों को गोपनीयता, नैतिकता और संवेदनशीलता के पाठ्यक्रमों के तहत प्रशिक्षण देने का आदेश भी अदालत ने दिया। इस मामले में पीड़िता और उसके परिवार को न्याय मिलने के साथ ही राज्य में स्वास्थ्य संस्थानों और कर्मचारियों के लिए यह एक चेतावनी भी है कि मरीजों की निजता और सम्मान का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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