छत्तीसगढ़
बेमेतरा में 22 से ज्यादा बंदरों की गोली मारकर हत्या का आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश
Shantanu Roy
3 Oct 2026 5:59 PM IST

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Bemetara. बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में बंदरों की मौत का एक गंभीर मामला सामने आया है। दाढ़ी थाना क्षेत्र के देवगांव (डोकरबेला) में 22 से ज्यादा बंदरों को गोली मारकर मौत के घाट उतारने का आरोप लगाया गया है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में हलचल मच गई है। ग्रामीणों और जीव प्रेमियों में नाराजगी है और मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की मांग उठ रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गांव में फसलों की सुरक्षा के लिए कुछ लोगों को चौकीदार के तौर पर रखा गया था। आरोप है कि खेतों में बंदरों के आने और फसलों को नुकसान पहुंचाने से परेशान होकर इन रखवारों ने बंदरों पर गोली चला दी। इस घटना में 22 से अधिक बंदरों की मौत होने की बात सामने आई है। हालांकि मृत बंदरों की वास्तविक संख्या और घटना की पूरी परिस्थितियां जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी।
बताया जा रहा है कि घटना देवगांव के डोकरबेला इलाके में हुई। फसलों को नुकसान से बचाने के लिए खेतों की निगरानी की जा रही थी। इसी दौरान बंदरों के झुंड को लेकर विवाद की स्थिति बनी। आरोप है कि फसल की रखवाली करने वाले लोगों ने बंदरों को भगाने के बजाय उन पर गोली चला दी। गोली लगने से कई बंदरों की मौत हो गई। घटना की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों के बीच भी नाराजगी बढ़ गई। लोगों ने मामले की जांच कर आरोपियों की पहचान करने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीवों को इस तरह मारना गंभीर मामला है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों के मुताबिक बंदरों के फसलों में पहुंचने और नुकसान पहुंचाने की समस्या को लेकर प्रशासन और वन विभाग से शिकायत की जा सकती थी। इसके लिए वन विभाग के स्तर पर नियमानुसार उपाय किए जा सकते थे। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बजाय कथित तौर पर बंदरों पर गोली चला दी गई। मामले में अब वन विभाग और संबंधित अधिकारियों की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच के दौरान मृत बंदरों की संख्या, मौत की वजह, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और गोली चलाए जाने से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा सकती है। इसके अलावा यह भी पता लगाया जाएगा कि कथित रूप से गोली किस हथियार से चलाई गई और उसके लिए किसी तरह की अनुमति थी या नहीं।
वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कई प्रावधान मौजूद हैं। बंदरों से जुड़ी किसी घटना में भी कानूनी कार्रवाई तथ्यों और संबंधित प्रजाति की कानूनी स्थिति के आधार पर तय होती है। इसलिए मामले में आधिकारिक जांच और वन विभाग की रिपोर्ट के बाद ही धाराओं और जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट होगी। घटना के बाद जीव प्रेमियों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि फसल बचाने के लिए वन्यजीवों को मारना समाधान नहीं हो सकता। ग्रामीण क्षेत्रों में मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की स्थिति में संबंधित विभागों की मदद और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है। फिलहाल 22 से अधिक बंदरों की मौत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वास्तविक संख्या, मौत की परिस्थितियां और जिम्मेदार लोगों की भूमिका जांच के बाद ही सामने आएगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
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