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Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर की सेंट्रल जेल में जिला प्रशासन और पुलिस की छापेमारी से पहले सूचना लीक होने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। दावा किया जा रहा है कि जेल में दबिश की जानकारी पहले ही पहुंच गई थी, जिसके बाद रात करीब दो बजे इमरजेंसी सायरन बजाकर बैरकों से कथित आपत्तिजनक सामान हटवा दिया गया। छापेमारी के दौरान टीम को कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं होने की बात सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, सूचना लीक होने और सामान हटवाने के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
क्राइम ब्रांच से सूचना लीक होने का दावा
सामने आई जानकारी के अनुसार, रायपुर सेंट्रल जेल में पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई से पहले ही छापेमारी की सूचना जेल के भीतर पहुंचने का आरोप लगाया जा रहा है। दावा है कि यह जानकारी क्राइम ब्रांच से लीक हुई थी। हालांकि, सूचना किसने और किस माध्यम से दी, इस संबंध में कोई पुष्ट तथ्य सामने नहीं आया है। यदि सूचना लीक होने का आरोप सही पाया जाता है, तो यह जेल की सुरक्षा और गोपनीय कार्रवाई से जुड़ा गंभीर मामला होगा।
रात दो बजे इमरजेंसी सायरन बजाने का आरोप
आरोपों के मुताबिक, छापेमारी की जानकारी मिलने के बाद रात करीब दो बजे जेल परिसर में इमरजेंसी सायरन बजाया गया। इसके बाद बैरकों से कथित आपत्तिजनक सामान हटवाने की बात कही जा रही है। जेल अधीक्षक पर भी रात में सामान हटवाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, सायरन बजने का कारण और बैरकों से सामग्री हटाए जाने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जेल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष भी उपलब्ध नहीं है।
छापेमारी के दौरान नहीं मिला आपत्तिजनक सामान
बताया जा रहा है कि जब जिला प्रशासन और पुलिस की टीम जेल परिसर में दबिश देने पहुंची, तो तलाशी के दौरान कोई आपत्तिजनक सामान बरामद नहीं हुआ। आरोप यह भी है कि जेल प्रशासन ने छापेमारी के लिए पहुंची टीम को बाहरी गेट और मुख्य प्रवेश द्वार के बीच काफी देर तक इंतजार कराया। इस देरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, टीम को कितनी देर रोका गया और इसके पीछे क्या कारण था, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
जेल के भीतर मोबाइल इस्तेमाल करने के आरोप
मामले में जेल के भीतर कुछ बंदियों द्वारा कथित रूप से मोबाइल फोन इस्तेमाल किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। मुकेश बनिया, गौरव हैपट और रक्सेल नामक व्यक्तियों पर जेल के अंदर मोबाइल इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए हैं। दावा है कि पुलिस और क्राइम ब्रांच के पास कथित मोबाइल नंबरों की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। इन आरोपों की पुष्टि करने वाले तकनीकी रिकॉर्ड या आधिकारिक जांच निष्कर्ष उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए संबंधित व्यक्तियों की संलिप्तता को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
जेल से धमकी और वसूली का नेटवर्क चलने का दावा
जेल से बाहर आए एक युवक द्वारा कथित तौर पर किए गए खुलासों में जेल के अंदर से धमकी और वसूली से जुड़ी गतिविधियां संचालित होने का दावा किया गया है। इन दावों ने जेल के भीतर संचार व्यवस्था और सुरक्षा निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, युवक के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल छापेमारी की सूचना लीक होने, मोबाइल इस्तेमाल और कथित वसूली नेटवर्क के संबंध में आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं। इन आरोपों की वास्तविक स्थिति जेल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की जांच तथा स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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