छत्तीसगढ़
पुसगुड़ी में निर्माणाधीन आश्रम भवन में अनियमितताओं के आरोप
Shantanu Roy
27 Dec 2025 12:07 AM IST

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Bijapur. बीजापुर। जिले के पुसगुड़ी गांव में निर्माणाधीन आश्रम भवन के निर्माण कार्य को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों और जानकारों का कहना है कि भवन की नींव, विशेषकर कॉलम बेस के निर्माण में तय तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है। आरोप है कि कॉलम के लिए बनाए गए गड्ढों में कंक्रीट की जगह अधिक मात्रा में रेत और अपेक्षाकृत कम सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती और दीर्घकालिक सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, आश्रम भवन की नींव किसी भी संरचना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। कॉलम बेस में यदि सामग्री का अनुपात सही नहीं रखा गया, तो भवन की भार वहन क्षमता प्रभावित हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर किए जा रहे कार्य में सीमेंट की मात्रा कम और रेत की मात्रा अधिक दिखाई दे रही है, जो स्वीकृत स्टीमेट और सामान्य निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं है। इससे भविष्य में भवन के बैठने, दरार आने या किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
निर्माण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का भी मानना है कि कॉलम बेस किसी भी भवन की “रीढ़” होते हैं। यदि नींव स्तर पर ही लापरवाही बरती जाए, तो पूरा ढांचा कमजोर हो सकता है। खासकर आश्रम जैसे भवन, जहां बच्चों और कर्मचारियों की नियमित आवाजाही रहती है, वहां निर्माण गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता गंभीर परिणाम ला सकता है। मामले को लेकर आदिवासी विकास शाखा के संबंधित इंजीनियर से फोन पर संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि स्वीकृत स्टीमेट के अनुसार कॉलम गड्ढों में रेत डालने का प्रावधान है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी को निर्माण कार्य में गड़बड़ी या मानकों से विचलन की आशंका है, तो इसकी शिकायत जिला कलेक्टर से की जा सकती है। इंजीनियर ने यह भी स्पष्ट किया कि विस्तृत तकनीकी जानकारी के लिए ठेकेदार से चर्चा करना अधिक उपयुक्त होगा।
वहीं, आदिवासी विकास शाखा के सहायक आयुक्त ने कहा कि यदि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो इसकी विधिवत जांच कराई जाएगी। उनके इस बयान के बाद अब यह संभावना जताई जा रही है कि आश्रम भवन निर्माण की तकनीकी जांच हो सकती है और स्टीमेट के अनुरूप कार्य हो रहा है या नहीं, इसकी पड़ताल की जाएगी। फिलहाल ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों द्वारा मांग की जा रही है कि स्वीकृत स्टीमेट और मौके पर किए जा रहे वास्तविक निर्माण कार्य की तुलना कराई जाए। लोगों का कहना है कि यह मामला केवल निर्माण गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि विभागीय निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो सरकारी धन के दुरुपयोग के साथ-साथ भविष्य में जान-माल के नुकसान की आशंका भी बनी रह सकती है।
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