छत्तीसगढ़
ऑनलाइन सट्टा कारोबारियों को छुटभैय्या नेताओं ने पुलिस से छुड़ाया
Shantanu Roy
4 Sept 2025 4:52 AM IST

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छग
रायपुर। राजधानी के राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र से एक बार फिर पुलिस और सट्टा कारोबारियों के बीच मिलीभगत का बड़ा मामला सामने आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, थाना इलाके में संचालित ऑनलाइन सट्टे का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने छापामार कार्रवाई में 11 मोबाइल, 3 लैपटॉप और एक लग्जरी थार गाड़ी समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से गजानंद एप और रेड्डी अन्ना एप के जरिए चलाए जा रहे अवैध ऑनलाइन सट्टे के ठोस सबूत भी मिले थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाने की बजाय पुलिस पर ही गंभीर आरोप लगने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि पुलिस ने आरोपियों से गुप्त सेटिंग कर उन्हें छोड़ दिया। यही नहीं, आरोपियों के पास से जब्त मोबाइलों में सट्टे से जुड़ी करोड़ों की लेन-देन की जानकारी और लगभग 5 लाख रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन का डेटा मौजूद था, जिसे पुलिस अधिकारियों ने कथित रूप से खुद मोबाइल से मिटा दिया। आरोप है कि थाने के अधिकारियों और आरोपियों के बीच गुप्त सौदेबाजी कर मामले को रफा-दफा कर दिया गया।
आरोपियों के पास से जप्त की गई लग्जरी थार गाड़ी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान रायगढ़ निवासी मुकेश महापत्र, बूढ़ा तालाब पुरानी बस्ती निवासी सत्यजीत चंद्राकर उर्फ सत्या, रायगढ़ निवासी प्रमोद विश्वास और रायगढ़ निवासी घनश्याम मलाकार के रूप में हुई थी। चारों आरोपी लंबे समय से ऑनलाइन एप के जरिए राजधानी समेत प्रदेशभर में सट्टा कारोबार फैला रहे थे। गजानंद एप और रेड्डी अन्ना एप का इस्तेमाल कर यह नेटवर्क प्रतिदिन लाखों का टर्नओवर करता था।
ऑनलाइन सट्टेबाज़ी रैकेट में पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में दावा किया है कि नेटवर्क की कड़ियाँ खाड़ी देशों तक फैली हैं। पुलिस/साइबर सेल ने इस एंगल पर अलग से जांच शुरू कर दी है, ताकि फंडिंग, हैंडलर्स और टेक्निकल सपोर्ट चेन की पुष्टि हो सके। पुलिस ने हाल में छापों के दौरान कई मोबाइल फ़ोन, लैपटॉप, UPI/वॉलेट डिटेल्स और संदिग्ध ट्रांज़ैक्शन रिकॉर्ड बरामद किए। प्रारंभिक पूछताछ में कुछ आरोपियों ने स्वीकारा कि “ऑपरेशन निर्देश” और “पेमेंट रूटिंग” का हिस्सा विदेश-आधारित हैंडलर्स तय करते थे। जांच एजेंसियाँ अब अंतरराज्यीय से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल की संभावना खंगाल रही हैं।
पुलिस के शुरुआती खुलासे में इन चारों की गिरफ्तारी को बड़ी सफलता बताया गया था। थार गाड़ी, 11 मोबाइल और 3 लैपटॉप जब्त कर इस कार्रवाई को "बड़ी उपलब्धि" बताया गया। लेकिन गिरफ्तारी के कुछ ही दिनों बाद आरोपियों को छोड़ देने और मोबाइल से ट्रांजैक्शन डेटा मिटाने की बात सामने आते ही पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों का दावा है कि मामले में "सेटिंग" कर आरोपियों को बचा लिया गया और पूरा केस कमजोर कर दिया गया।
राजधानी रायपुर में ऑनलाइन सट्टा कारोबार कोई नया नहीं है, लेकिन जिस तरह पुलिस-आरोपी गठजोड़ का खेल सामने आ रहा है, उसने पूरे तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर तब, जब इस अवैध कारोबार में आम लोगों की मेहनत की कमाई बर्बाद हो रही है और युवा पीढ़ी जुए-सट्टे की दलदल में फंस रही है।
फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर पुलिस विभाग चुप्पी साधे हुए है। वहीं, स्थानीय लोग और सामाजिक संगठनों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि अगर सचमुच पुलिस ने आरोपियों से सौदेबाजी कर डेटा मिटाया है, तो यह न केवल अपराधियों को संरक्षण देना है बल्कि आम जनता के साथ धोखा भी है।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि राजधानी में सट्टा माफिया कितने संगठित हैं और किस तरह तंत्र की पकड़ से बचने के लिए पुलिस तक से सेटिंग कर लेते हैं। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
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