छत्तीसगढ़

प्रदेश में दूध और दूध से उत्पादित वस्तुएं सभी नकली

Nilmani Pal
2 Dec 2024 12:09 PM IST
प्रदेश में दूध और दूध से उत्पादित वस्तुएं सभी नकली
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बेधडक़ सप्लाई होता है दूसरे जिलों और राज्यों में खप रहे नकली दूध और पनीर

प्रदेश में बेखौफ बिक रहा है नकली दूध और पनीर

अंचल के कस्बों-गांवों में जमी हैं मिलावटी दूध, मावा खपाने का मुख्य केंद्र और नकली फैक्ट्रियां

रायपुर । रायपुर संभाग में नकली दूध,मावा, पनीर और घी का कारोबार बेधडक़ चल रहा है। रायपुर-दुर्ग जिले में इसका सबसे ज्यादा गोरखधंधा चल रहा है। दोनों जिलों में लगभग एक हजार डेयरियां चल रही हैं, जिनमें ज्यादातर अवैध हैं। जनता से रिश्ता की टीम द्वारा पड़ताल किए जाने पर सामने आया कि स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक यूरिया, शैंपू, रिफाइंड तेल व अन्य पदार्थों को मिलाकर बनाया जा रहा नकली दूध और मावा सायपुर सहित आसपास के जिलों के साथ प्रदेश के धमतरी , महासमुंद, दुर्ग, भिलाई, राजनांंदगांव , बिलासपुर, रायगढ़, जगदलपुर , कांकेर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा के अलावा उत्तरप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड और कोलकाता तक सप्लाई किया जा रहा है।

भाटापारा-तिल्दा- नेवरा, हथबंद, मुगेली, बिलासपुर, रायगढ़ से ही प्रतिदिन लगभग पांच लाख लीटर और बिलासपुर से लगभग ढाई लाख लीटर दूध व हजारों किलो नकली मावा प्रतिदिन वाहनों से भेजा जा रहा है। यह नकली दूध और मावा रायपुर के बाजारों में भी बेखौफ बेचा जा रहा है। लेकिन खाद्य विभाग द्वारा कोई बड़ी और ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से मिलावट का कारोबार करने वाले को प्रशासन का भय ही नहीं हैं। इन दिनों प्रदेश सरकार के सख्त होने के बाद कुछ स्थानों पर कार्रवाई की गई है, इससे कुछ असर तो दिखा है, लेकिन जो खौफ मिलावटियों में नजर आना चाहिए और कार्रवाई पर अंकुश लगना चाहिए वह अब भी नजर नहीं आ रहा है।

स्टॉक नहीं, कुछ काउंटर में छिपाकर बेच रहे

रायपुर-बिलासपुर संभाग में नकली दूध, घी और मावे का बड़ा सेंटर है। इन दिनों सरकार इस पर सख्त हो गई है और लगातार कार्रवाई हो रही है, इससे मावा कारोबारियों में खलबली मची है। ज्यादातर मामला ठंडा होने तक मावा बेचने से बच रहे हैं। लेकिन अब भी चोरी छिपे कुछ दुकानदार 220 रुपए किलो में मावा बेच रहे हैं। मावा बनाने वाले बताते हैं कि एक किलो मावा बनाने के लिए कम से कम 4 किलो शुद्ध दूध चाहिए। दूध के दाम इन दिनों 50 से 60 रुपए किलो हैं, एक किलो मावा बनाने के लिए 240 रुपए का दूध लगेगा, इसलिए सवाल उठता है कि ये दुकानदार 220 रुपए किलो में मावा कैसे बेच रहे हैं। जबकि इसमें ईधन, मेहनत और मुनाफा भी शामिल होगा।

जनता से रिश्ता ने इसकी पड़ताल करने के लिए रायपुर में मावे की खरीद फरोख्त के बड़े केन्द्र गोलबाजार में मावा तलाशा तो ज्यादातर दुकानदारों ने कहा कि स्टॉक खत्म है। इन दिनों ज्यादा माल नहीं आ रहा है, लेकिन मावा नहीं आने की वजह नहीं बताई। कुछ दुकानों पर जरूर मावा 220 रुपए किलो के दाम पर बिक रहा था, लेकिन पूरी निगरानी के साथ मावे की टोकरियां काउंटर के अंदर छिपाकर रखी गई थीं। कारोबारियों का दावा था कि मावा सौ फीसदी शुद्ध है, उसमें मिलावट का नामोनिशान नहीं है। जब उनसे कहा कि दूध 60 रुपए किलो है तो उससे बनने वाला मावा 220 रुपए किलो कैसे मिल रहा है, इसका वह जवाब नहीं दे पाए।

शहर में इन इलाकों से आता मावा

जानकारों का कहना है कि शहर में सबसे ज्यादा मावा भाटापारा, तिल्दा-नेवरा, बेमेतरा, कवर्धा-गंडई के देहाती इलाकों से आता है। हर दिन एक दुकान पर 50 किलो से ज्यादा की खपत है। त्योहार के दिनों में बिक्री कई गुना ज्यादा होती है।

हथेली पर गिरे तो छाले पड़ जाएं

नकली दूध के इस्तेमाल होने वाला काला केमिकल इतना हार्ड होता है कि सीधे हथेली पर गिर जाए तो छाले पड़ जाएंगे। यह नकली दूध को सामान्य दूध की तरह कर देता है। यूरिया आदि सभी पदार्थों की गंध को दबा देता है।

छोटे शहरों में लैब नहीं होने से रिपोर्ट आने में लगते हैं कई महीने

मिलावट की पहचान करने के लिए छोटे शहरों और कस्बों में जांच लैब नहीं है, न ही जरूरी संसाधन हैं। यदि खाद्य विभाग की टीम मिलावटी खाद्य पदार्थ पकड़ती है तो अन्य राज्यों में जांच के लिए भेजा जाता है। इसकी रिपोर्ट आने में कई महीने लग जाते हैं। इससे कोई व्यक्ति मिलावट की शिकायत ही नहीं कर पाता। शिकायत से जांच तथा उसके बाद सजा होने तक की प्रक्रिया काफी लंबी है, इस कारण लोग आवाज उठाने से हिचकते हैं।

असली है या मिलावटी पहचान करना नहीं आता

एक दुकानदार ने बताया कि ग्राहक सिर्फ भरोसे पर खरीद करता है। मावा असली है या मिलावटी उसकी पहचान करना लोगों को नहीं आता। कुछ ग्राहक देसी तरीकों से मावे की असलियत पहचानने की कोशिश करते हैं, लेकिन सिंथेटिक मावे की पहचान के सारे देसी तजुर्बे बेअसर हैं।

नकली घी : एक किलो नकली क्रीम में 400 ग्राम घी निकलेगा, इसे बेहतर करने के लिए दही मिलाया जाएगा और मात्रा बढ़ाने के लिए रिफाइंड और सेंट मिलाते हैं, जिससे वजन बढ़ जाता है।

सिर्फ रिफाइंड के उपयोग से भी नकली घी बन रहा है। इसमें सेंट मिलाया जाता है। इसके साथ ही इसमें एक अन्य केमिकल मिलाया जाता है, जिससे यह घी की तरह जम जाता है।

मावा: एक किलो शुद्ध दूध में 100 ग्राम क्रीम और अधिकतम 200 ग्राम मावा निकलता है।

एक किलो नकली दूध में 125 से 150 ग्राम क्रीम, 300 ग्राम के आसपास मावा निकलता है, नकली होता है। ज्यादा रिफाइंड मिला होने पर 350 ग्राम तक हो सकती है।

दही: एक किलो शुद्ध दूध से लगभग 900 ग्राम दही बन जाता है। नकली दूध का दही नहीं जमता, दही जमाने के लिए इसमें दूध पाउडर मिलाना पड़ता है।

पनीर : एक किलो शुद्ध दूध से 200 ग्राम पनीर बनेगा।एक किलो नकली दूध से बमुश्किल 50 ग्राम पनीर बन पाएगा, दूध पाउडर मिलाने पर भी पनीर नहीं बनेगा। अगर बनाएंगे तो यह गंध छोड़ देगा।

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