छत्तीसगढ़
प्रशासनिक तबादले से वनरक्षकों की वरिष्ठता नहीं होगी खत्म: हाईकोर्ट
Shantanu Roy
10 Aug 2026 10:53 PM IST

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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वन विभाग के वनरक्षकों की वरिष्ठता को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिविजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक आधार पर एक वनवृत्त से दूसरे वनवृत्त में स्थानांतरण होने मात्र से कर्मचारी की भर्ती के समय अर्जित वरिष्ठता समाप्त नहीं की जा सकती। कोर्ट ने वन विभाग की ओर से जारी 31 जुलाई 2014 के सर्कुलर के क्लॉज-5 को संबंधित सीमा तक मनमाना और वैधानिक नियमों के विपरीत मानते हुए निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान उन वनरक्षकों पर लागू नहीं किया जा सकता, जिनकी नियुक्ति सीधी भर्ती के माध्यम से हुई थी और जिन्हें बाद में प्रशासनिक आधार पर दूसरे वनवृत्त में स्थानांतरित किया गया। कोर्ट के इस फैसले से ऐसे कर्मचारियों को राहत मिली है, जिनकी वरिष्ठता को तबादले के बाद नए वनवृत्त में नीचे कर दिया गया था।
मामला उन वनरक्षकों से संबंधित है, जिनकी नियुक्ति 5 जनवरी 2013 को छत्तीसगढ़ क्लास-III फॉरेस्ट सर्विस रिक्रूटमेंट रूल्स, 2012 के तहत सीधी भर्ती से हुई थी। नियुक्ति के बाद उनकी प्रारंभिक पोस्टिंग गरियाबंद वनमंडल में की गई थी। बाद में प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर उन्हें बिलासपुर, मुंगेली और कोरबा क्षेत्र के वनवृत्तों में स्थानांतरित कर दिया गया। तबादले के बाद विभाग ने संबंधित वनरक्षकों को नए वनवृत्त की वरिष्ठता सूची में नीचे कर दिया। 1 सितंबर 2025 को जारी ग्रेडेशन लिस्ट में कुछ कर्मचारियों के नाम के सामने ‘अन्य वृत्त से स्थानांतरण’ का उल्लेख किया गया और उन्हें उन कर्मचारियों के नीचे रखा गया, जो नए वनवृत्त में पहले से कार्यरत थे। इसके बाद प्रभावित वनरक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि उनकी नियुक्ति सीधी भर्ती और मेरिट के आधार पर हुई थी। भर्ती प्रक्रिया के दौरान प्राप्त अंक भी सक्षम अधिकारी द्वारा सत्यापित किए गए थे। इसलिए प्रशासनिक कारणों से किए गए तबादले के आधार पर उनकी मूल वरिष्ठता को समाप्त करना नियमसम्मत नहीं है। उनका कहना था कि प्रशासनिक तबादला उनकी इच्छा से नहीं हुआ था, इसलिए इसके कारण उन्हें सेवा संबंधी नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। वहीं, वन विभाग ने 31 जुलाई 2014 के सर्कुलर का हवाला देते हुए अपनी स्थिति रखी। विभाग का तर्क था कि एक वनवृत्त से दूसरे वनवृत्त में स्थानांतरण होने पर कर्मचारी की वरिष्ठता नए वनवृत्त में पहले से कार्यरत सीधी भर्ती और पदोन्नत कर्मचारियों के नीचे निर्धारित की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और संबंधित नियमों पर विचार करने के बाद कहा कि वरिष्ठता कर्मचारी का महत्वपूर्ण सेवा अधिकार है। इसका सीधा प्रभाव पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों पर पड़ता है। कोर्ट ने माना कि प्रशासनिक या जनहित में किया गया तबादला कर्मचारी का स्वैच्छिक निर्णय नहीं होता। इसलिए केवल प्रशासनिक आदेश का पालन करते हुए दूसरे वनवृत्त में जाने वाले कर्मचारी को उसकी पहले से अर्जित वरिष्ठता से वंचित करना उचित नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने 1961 के नियमों के नियम 12(2)(बी) की भी व्याख्या की। कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान उन परिस्थितियों में लागू होता है, जहां स्थानांतरण भर्ती का माध्यम होता है। मौजूदा मामले में वनरक्षकों की नियुक्ति स्थानांतरण के माध्यम से नहीं, बल्कि सीधी भर्ती के जरिए हुई थी। इसलिए इस नियम के आधार पर उनकी मूल वरिष्ठता समाप्त नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने वन विभाग को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं की वरिष्ठता के दावे पर दोबारा विचार किया जाए। वरिष्ठता तय करते समय 31 जुलाई 2014 के सर्कुलर के क्लॉज-5 को नजरअंदाज करने और भर्ती के समय प्राप्त मूल मेरिट तथा लागू वैधानिक नियमों के आधार पर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने यह पूरी प्रक्रिया प्रमाणित आदेश की प्रति प्राप्त होने के 90 दिनों के भीतर पूरी करने को कहा है।
इसके साथ ही 25 सितंबर 2025 को याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन खारिज किए जाने की कार्रवाई को भी हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया। हालांकि कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि फैसले का वर्तमान वरिष्ठता सूची में शामिल उन कर्मचारियों पर स्वतः प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, जो इन याचिकाओं में पक्षकार नहीं हैं। यदि आवश्यक हुआ तो उन्हें उचित सुनवाई का अवसर देने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकेगी। इस फैसले को वन विभाग के उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनका प्रशासनिक आधार पर एक वनवृत्त से दूसरे वनवृत्त में तबादला किया गया है। कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट संदेश गया है कि प्रशासनिक तबादले को कर्मचारी की भर्ती के समय हासिल वरिष्ठता छीनने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
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