छत्तीसगढ़

ट्रेन में 22 किलो गांजा रखने वाले आरोपी को 12 साल की सजा, 2 लाख जुर्माना

Shantanu Roy
9 Aug 2026 10:56 PM IST
ट्रेन में 22 किलो गांजा रखने वाले आरोपी को 12 साल की सजा, 2 लाख जुर्माना
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Raipur. रायपुर। ट्रेन के जरिए गांजा तस्करी के मामले में रायपुर की विशेष NDPS अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश (NDPS एक्ट) किरण थवाईत की अदालत ने आरोपी कैलाश सहनी को दोषी ठहराते हुए 12 साल के सश्रम कारावास और 2 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी के कब्जे से 22 किलो गांजा बरामद हुआ था। यह मामला अप्रैल 2021 का है, जब महासमुंद रेलवे स्टेशन पर ट्रेन की जांच के दौरान आरोपी को गांजा के साथ पकड़ा गया था। अभियोजन के अनुसार, 8 अप्रैल 2021 को ट्रेन नंबर 08518 स्पेशल एक्सप्रेस महासमुंद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर पहुंची थी। ट्रेन में तैनात स्टाफ को दो यात्री संदिग्ध नजर आए। दोनों के पास कुल चार बैग थे।
संदेह होने पर ट्रेन स्टाफ ने दोनों को रोककर पूछताछ की। बाद में उनके बैग की तलाशी ली गई। पूछताछ में दोनों की पहचान बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी कैलाश सहनी और संतोष कुमार के रूप में हुई। तलाशी के दौरान कैलाश सहनी के पास मौजूद दो बैग से कुल 7 पैकेट बरामद किए गए। वहीं संतोष कुमार के बैग की तलाशी लेने पर 5 पैकेट मिले। इस तरह दोनों के बैग से कुल 12 पैकेट बरामद हुए। जब पैकेटों को खोलकर उनकी जांच की गई तो उनमें गांजा पाया गया। मौके पर बरामद सामग्री का वजन किया गया।
अभियोजन के मुताबिक, कैलाश सहनी के कब्जे से कुल 22 किलो गांजा बरामद हुआ था, जबकि सह आरोपी संतोष कुमार के बैग से 17.650 किलो गांजा मिला। इस तरह दोनों आरोपियों के कब्जे से कुल 39.650 किलो गांजा बरामद किया गया था। बरामद गांजे को पुलिस ने जब्त कर मामले की जांच आगे बढ़ाई। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर बताया था कि वे गांजा लेकर भाटापारा के रास्ते दिल्ली जाने की तैयारी में थे। इसके बाद मामले में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट यानी NDPS एक्ट की धारा 20(b)(ii)(C) के तहत अपराध दर्ज किया गया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ चालान अदालत में पेश किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 7 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए गए। इनमें स्वतंत्र गवाहों के अलावा पुलिस अधिकारी और मामले के जांच अधिकारी भी शामिल थे। अभियोजन ने बरामदगी, जब्ती और जांच से जुड़े तथ्यों को अदालत के सामने रखा। अदालत के समक्ष यह साबित करने का प्रयास किया गया कि कैलाश सहनी के कब्जे से गांजा बरामद हुआ था और वह प्रतिबंधित मादक पदार्थ की तस्करी से जुड़ा हुआ था। सुनवाई के दौरान आरोपी कैलाश सहनी ने खुद को निर्दोष बताया। उसने अदालत में कहा कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है। हालांकि, अपने बचाव में आरोपी की ओर से कोई गवाह पेश नहीं किया गया। अदालत ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य तथ्यों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी पाया।
इस मामले में एक अन्य आरोपी संतोष कुमार भी शामिल था, लेकिन वह लगातार अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। उसके खिलाफ अदालत की ओर से स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया और उसे फरार घोषित कर दिया गया। सह आरोपी के लगातार न्यायालय में उपस्थित नहीं होने के कारण उसके संबंध में फैसला नहीं हो सका। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कैलाश सहनी के मामले में फैसला सुनाया। विशेष न्यायाधीश किरण थवाईत ने सुनवाई पूरी होने के बाद कैलाश सहनी को NDPS एक्ट के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने उसे 12 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही आरोपी पर 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत के इस फैसले के बाद आरोपी को निर्धारित सजा भुगतनी होगी।
मामले में करीब पांच साल बाद अदालत का फैसला आया है। वर्ष 2021 में ट्रेन के जरिए बड़ी मात्रा में गांजा ले जाने का यह मामला सामने आया था। रेलवे स्टेशन पर जांच के दौरान हुई बरामदगी के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी। अदालत में लंबी सुनवाई और गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद अब आरोपी कैलाश सहनी को दोषी करार दिया गया है। यह मामला रेलवे के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी पर निगरानी की अहमियत को भी सामने लाता है। ट्रेनें तस्करों के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक प्रतिबंधित
पदार्थ पहुंचाने
का माध्यम बन सकती हैं। ऐसे में रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। महासमुंद रेलवे स्टेशन पर हुई इस कार्रवाई में बड़ी मात्रा में गांजा बरामद हुआ था, जिसके बाद मामला NDPS अदालत तक पहुंचा। अदालत के फैसले के बाद अब इस मामले में फरार घोषित सह आरोपी संतोष कुमार की गिरफ्तारी महत्वपूर्ण होगी। उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा चुका है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां उसके संबंध में आगे कार्रवाई कर सकती हैं। वहीं कैलाश सहनी को अदालत द्वारा सुनाई गई 12 साल की सजा और 2 लाख रुपये के जुर्माने को मादक पदार्थ तस्करी के मामले में महत्वपूर्ण न्यायिक कार्रवाई माना जा रहा है।
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