छत्तीसगढ़
पण्डो जनजाति की जमीन फर्जी तरीके से बेचने का आरोपी गिरफ्तार
Shantanu Roy
1 Oct 2026 3:12 PM IST

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छग
Raigarh. रायगढ़। जिले में भूमि संबंधी फर्जीवाड़े और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे “ऑपरेशन क्लीन हंट” के तहत कापू पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पण्डो जनजाति की भूमि को कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों और गलत पहचान के आधार पर गैर-आदिवासी के नाम रजिस्ट्री कराने के मामले में फरार आरोपी सुखन राठिया को पुलिस ने कोरबा से गिरफ्तार किया है। आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले तमिलनाडु और बाद में कोरबा में अलग-अलग ठिकानों पर रह रहा था। पुलिस के अनुसार आरोपी सुखन राठिया पिता धनाराम राठिया, उम्र 50 वर्ष, निवासी बकालो थाना कापू को हिरासत में लेकर रायगढ़ लाया गया। पूछताछ और दस्तावेजी जांच में उसकी भूमिका सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया।
यह मामला पण्डो जनजाति की जमीन को कथित रूप से फर्जी तरीके से गैर-आदिवासी के नाम विक्रय कराने से जुड़ा है। इसके साथ ही ग्राम पंचायत रायमेर की शासकीय भूमि के फर्जी दस्तावेज और पट्टे तैयार कर दलालों के माध्यम से रजिस्ट्री कराने के मामले की भी जांच की जा रही है। इस प्रकरण में तत्कालीन पटवारी राकेश कुमार साय और रजिस्ट्री के गवाह अगस्तुस खलखो की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। इसके बाद पुलिस ने अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी थी। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी सुखन राठिया पुलिस से बचने के लिए तमिलनाडु चला गया था। बाद में जब उसे पुलिस की तलाश की जानकारी मिली तो उसने अपना ठिकाना बदलकर कोरबा में रहना शुरू कर दिया। कापू पुलिस ने तकनीकी जानकारी और स्थानीय इनपुट के आधार पर उसकी तलाश की और कोरबा से उसे पकड़ लिया।
मामले की जांच में ग्राम डुमरनारा की खसरा नंबर 409 की भूमि को लेकर कई अहम तथ्य सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार यह भूमि पूर्व से पण्डो जनजाति के सदस्यों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज रही है। वर्ष 2023-24 के राजस्व अभिलेखों की जांच में बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के जमीन को सुखन पिता बजरंग, जाति रावत के नाम दर्ज किया जाना पाया गया। इसके बाद 21 फरवरी 2024 को इसी भूमि का पंजीकृत विक्रय पत्र तैयार कर संतोष देवी गुप्ता निवासी रायपुर के नाम जमीन का विक्रय किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि जमीन विक्रेता के रूप में प्रस्तुत व्यक्ति की वास्तविक पहचान सुखन राठिया पिता धनाराम, जाति कंवर के रूप में हुई। पुलिस जांच के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन में फर्जी आधार कार्ड के उपयोग की बात भी सामने आई। इसके अलावा जमीन की बिक्री के लिए चौहद्दी उपलब्ध कराने में तत्कालीन हल्का पटवारी राकेश कुमार साय की भूमिका की भी जांच की गई। पुलिस का कहना है कि इस पूरे लेन-देन में पहचान और दस्तावेजों से जुड़ी गड़बड़ी के कई तथ्य सामने आए हैं। इस मामले में 7 जुलाई 2026 को तहसील कार्यालय कापू के तहसीलदार उन्मेश पटेल की रिपोर्ट पर थाना कापू में अपराध क्रमांक 108/2026 दर्ज किया गया था। प्रकरण में धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120(बी) भादवि के तहत विवेचना शुरू की गई।
जांच के दौरान विक्रेता सुखन राठिया, क्रेता संतोष देवी गुप्ता, साक्षी संतन राठिया और जीवन वर्धन के साथ तत्कालीन हल्का पटवारी राकेश कुमार साय की भूमिका की पड़ताल की गई। दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और रजिस्ट्री से जुड़े अभिलेखों के आधार पर पुलिस ने अलग-अलग व्यक्तियों की भूमिका की जांच की। पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी सुखन राठिया ने अपना वास्तविक नाम सुखन राठिया पिता धनाराम राठिया बताया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने पूछताछ में कहा कि तत्कालीन पटवारी राकेश साय और अन्य आरोपियों ने उसका नाम सुखन पिता बजरंग रावत दर्शाकर जमीन की रजिस्ट्री कराई थी। आरोपी ने यह भी बताया कि इस काम के एवज में उसे 10 हजार रुपये दिए गए थे। इसके बाद उक्त भूमि को संतोष देवी गुप्ता के नाम विक्रय कर दिया गया। विवेचना में पण्डो जनजाति की जमीन की कथित अवैध खरीदी-बिक्री में आरोपी की संलिप्तता पाए जाने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी के मार्गदर्शन और एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी के सुपरविजन में की गई। आरोपी की गिरफ्तारी में कापू थाना प्रभारी निरीक्षक धर्माराम तिर्की, प्रधान आरक्षक सोमेश गोस्वामी, लक्ष्मी कैवर्त, आरक्षक विभूति सिंह, कन्हैया भगत और अन्य स्टाफ की भूमिका रही। पुलिस अब इस प्रकरण में जमीन की रजिस्ट्री, राजस्व रिकॉर्ड, दस्तावेजों में बदलाव और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच आगे बढ़ा रही है।
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