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Durg. दुर्ग। मूक-बधिर युवक को लोन दिलाने और CIBIL स्कोर बढ़ाने का झांसा देकर उसके दस्तावेजों के आधार पर एसी सहित अन्य सामान फाइनेंस कराने का मामला सामने आया है। आरोप है कि सामान अपने पास रखने के बाद आरोपियों ने लोन की किश्तों का भुगतान बंद कर दिया। शिकायत की जांच के बाद पद्मनाभपुर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी है।
पुलिस के अनुसार रायपुर निवासी मनीष कुमार पांडे उम्र 36 वर्ष मूक-बधिर हैं। उनके भाई शुभम पांडे दुभाषिए के रूप में उनके साथ रहते हैं और बातचीत समझने में सहायता करते हैं। मनीष ने पुलिस को दी शिकायत में शेखर देशमुख, अनुराग देशमुख और ऋषभ शर्मा पर लोन और फाइनेंस के नाम पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपियों ने उससे संपर्क कर आसानी से पैसा कमाने और CIBIL स्कोर बेहतर करने का भरोसा दिलाया था। कथित रूप से कहा गया कि उसके नाम पर लोन लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदा जाएगा। सामान आरोपी अपने पास रखेंगे और फाइनेंस की प्रत्येक किश्त का भुगतान भी स्वयं करेंगे। नियमित रूप से किश्त जमा होने पर मनीष का CIBIL स्कोर बढ़ने की बात कही गई थी।
शिकायत में बताया गया है कि आरोपियों ने मनीष के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर होम क्रेडिट फाइनेंस के माध्यम से एक एसी फाइनेंस कराया। लोन प्रक्रिया में ओटीपी का उपयोग कर उसके नाम पर फाइनेंस कराया गया, जबकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसे पूरी प्रक्रिया और उसके आर्थिक परिणामों की जानकारी नहीं दी गई थी। फाइनेंस कराया गया एसी आरोपियों ने अपने पास रख लिया। एसी की खरीदारी दुर्ग स्थित अनामिका इलेक्ट्रॉनिक्स सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स प्रतिष्ठानों से कराए जाने का उल्लेख भी शिकायत में किया गया है। पुलिस अब दुकानों से खरीदी के दस्तावेज, फाइनेंस आवेदन, बिल, डिलीवरी से संबंधित रिकॉर्ड और ओटीपी सत्यापन प्रक्रिया की जानकारी जुटा रही है। इन दस्तावेजों से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फाइनेंस के दौरान किसने कौन-सी जानकारी प्रस्तुत की थी।
शुरुआत में आरोपियों और उनसे जुड़े लोगों द्वारा लोन की कुछ किश्तों का भुगतान किया गया। नियमित किश्त मिलने के कारण शिकायतकर्ता को तत्काल गड़बड़ी की आशंका नहीं हुई। कुछ समय बाद किश्तों का भुगतान अचानक बंद कर दिया गया। इसके बाद फाइनेंस कंपनी ने बकाया राशि जमा कराने के लिए मनीष से संपर्क करना शुरू किया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद मनीष को कथित रूप से अपने पास से कुछ किश्तें जमा करनी पड़ीं। शिकायतकर्ता का कहना है कि जिस सामान का उसने उपयोग भी नहीं किया, उसकी किश्तों का बोझ उस पर डाल दिया गया। भुगतान रुकने के कारण उसके CIBIL स्कोर के प्रभावित होने की स्थिति भी बन गई, जिससे भविष्य में बैंक अथवा वित्तीय संस्था से लोन लेने में परेशानी हो सकती है।
मनीष ने जब आरोपियों से संपर्क कर बकाया किश्तें जमा करने के लिए कहा तो वे कथित रूप से टालमटोल करने लगे। शिकायत में आरोप है कि दबाव बनाने और पुलिस में शिकायत करने की बात कहने पर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई। इसी तरह अन्य लोगों के नाम पर भी सामान फाइनेंस कराकर अपने पास रखने और बाद में किश्त नहीं चुकाने की शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, इन अतिरिक्त आरोपों की भी पुलिस जांच कर रही है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को लोन और फाइनेंस से संबंधित दस्तावेज, बैंक खाते का विवरण, एसी की रसीद, दिव्यांगता प्रमाण पत्र तथा अन्य जरूरी रिकॉर्ड सौंपे हैं। प्रारंभिक जांच के बाद पद्मनाभपुर पुलिस ने अपराध क्रमांक 0484/2026 दर्ज किया है। पुलिस ने शेखर देशमुख, अनुराग देशमुख और ऋषभ शर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) एवं 61(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। फिलहाल किसी आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी नहीं दी गई है। पुलिस बैंक लेनदेन, फाइनेंस प्रक्रिया, सामान की डिलीवरी, दस्तावेजों के इस्तेमाल और तीनों आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
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