छत्तीसगढ़

बच्चों के विकास मे प्रमुख भूमिका निभा रहा सजग कार्यक्रम...ऑडियो क्लिप के माध्यम से सुनाए जा रहे प्रेरक संदेश

Admin2
2 Nov 2020 8:32 AM GMT
बच्चों के विकास मे प्रमुख भूमिका निभा रहा सजग कार्यक्रम...ऑडियो क्लिप के माध्यम से सुनाए जा रहे प्रेरक संदेश
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राज्य सरकार की कई लोक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगोँ तक पहुंचाया जा रहा है। महिला बाल विकास विभाग के द्वारा भी मुस्तैदी से महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के लिऐ घर पहुंच सेवा दी जा रही है। आंगनबाड़ी केन्द्रो में 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को शाला पूर्व शिक्षा की गतिविधियों को निर्बाध रूप से चलाने तथा बच्चों के समग्र विकास के लिए विभाग द्वारा सजग कार्यक्रम चलाया जा रहा है।इसके माध्यम से बच्चों के शारीरिक, मानसिक तथा सृजनात्मक विकास का वातावरण तैयार किया जा रहा हैं।

सजग कार्यक्रम के माध्यम से बेहतर लालन-पालन कर बच्चों की सेहत को सुदृढ़ बनाया जा रहा है। कोरोना संक्रमण का दौर एक ओर जहॉं कई के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है, राज्य के बेमेतरा जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रयास से बच्चों के सेहत में सुधार हो रहा है। यह सारा कमाल दरअसल, ऑडियो क्लिप के माध्यम से सुनाए जा रहे प्रेरक ऑडियो संदेशों का है।

कोरोना संक्रमण के दौरान बच्चों, गर्भवती महिलाओं या शिशुवती माताओं की सेहत प्रभावित न हो, इसलिए पालकों के लिए संक्षिप्त ऑडियो संदेशों की श्रृंखला तैयार की गई है, इन ऑडियो संदेशों में पालको के लिए सरल सुझाव दिए गए है, ताकि वह अपने बच्चों के अच्छी सेहत के लिए बेहतर वातावरण तैयार कर सकें। यह ऑडियो संदेश पालकों को सकारात्मक ऊर्जा तो प्रदान करता ही है, साथ ही उन्हें यह ज्ञान भी मिलता है कि बच्चों के समग्र विकास हेतु कठिन परिस्थितियों में भी वह क्या बेहतर कर सकते है। सजग ऑडियो कार्यक्रम का क्रियान्वयन महिला एवं बाल विकास विभाग एवं यूनिसेफ के सहयोग से कर रहे है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इन आडियों क्लिपों के संदेशों को पालकों को सुनाती है। इसमें बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन होने पर सजग रहने, उनके साथ गुणवत्तापूर्वक समय बिताने तथा उनके संपूर्ण विकास के बारे में बताया जा रहा है।बेमेतरा जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के सभी आंगनबाड़ी में यह कार्यक्रम संचालित हो रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं पर्यवेक्षक के गृहभ्रमण के द्वारा यह वीडीयों सहपरिवार दिखाया जा रहा है। इस कार्यक्रम की मूल अवधारणा ''सीखे, करके देखे, सिखाएं'' इस सिद्धांत पर आधारित है।

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