छत्तीसगढ़
मोबाइल को लेकर डांट बनी जानलेवा, नाबालिग बेटी ने फांसी लगाकर की खुदकुशी
Shantanu Roy
18 Dec 2025 3:03 PM IST

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छग
Pakhanjur. पखांजूर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां मोबाइल फोन को लेकर पिता की डांट से आहत होकर एक नाबालिग बेटी ने आत्महत्या कर ली। यह दर्दनाक घटना बांदे थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नाबालिग बेटी मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर अपने पिता की फटकार से नाराज थी। परिजनों के अनुसार, पिता ने मोबाइल को लेकर उसे डांटा था, जिसके बाद वह काफी परेशान और चुपचाप रहने लगी। इसी बीच आज सुबह जब घर में कोई मौजूद नहीं था, तब उसने घर के अंदर फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
बताया जा रहा है कि सुबह परिजन किसी काम से बाहर गए हुए थे। जब वे वापस लौटे तो घर के अंदर का दृश्य देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। नाबालिग बेटी फांसी के फंदे पर लटकी हुई थी। परिजनों ने तुरंत उसे नीचे उतारने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही बांदे थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई की। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आत्महत्या की वजह मोबाइल फोन को लेकर हुआ विवाद ही बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।
इस घटना के बाद पूरे परिवार में मातम पसर गया है। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। बेटी की अचानक मौत से परिवार गहरे सदमे में है। आसपास के लोग और रिश्तेदार भी घटना से स्तब्ध हैं। गांव और मोहल्ले में शोक का माहौल बना हुआ है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक संवेदनशील मामला है। नाबालिग की आत्महत्या के पीछे मानसिक तनाव, पारिवारिक दबाव या अन्य कोई कारण भी हो सकता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। यह घटना समाज के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। बच्चों पर जरूरत से ज्यादा दबाव, डांट-फटकार और संवाद की कमी कई बार घातक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि किशोर अवस्था में बच्चे भावनात्मक रूप से बेहद संवेदनशील होते हैं और ऐसे समय में उन्हें समझने, सुनने और मार्गदर्शन की अधिक जरूरत होती है।
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