छत्तीसगढ़

संपत्ति विवाद से जुड़ा बड़ा मामला: फर्जी वसीयतनामा तैयार कर धोखाधड़ी का आरोप

Shantanu Roy
8 Nov 2025 8:45 PM IST
संपत्ति विवाद से जुड़ा बड़ा मामला: फर्जी वसीयतनामा तैयार कर धोखाधड़ी का आरोप
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छग
Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में संपत्ति को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने एक परिवार के खिलाफ कूटरचना और धोखाधड़ी सहित कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। यह मामला एक कथित वसीयतनामा (Will) से जुड़ा है, जिसमें मृतक व्यक्ति के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर कर संपत्ति हड़पने की कोशिश का आरोप लगाया गया है। थाना सिविल लाइन में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक (सउनि) के अनुसार, आरक्षक क्रमांक 2697 डोगेन्द्र नवरतन द्वारा
न्यायिक
मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आकांक्षा बेग के न्यायालय से प्राप्त परिवाद पत्र पर धारा 175(3) भारतीय सुरक्षा अधिनियम 2023 सहपठित धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
परिवाद में बताया गया है कि राजू उंबरकर (65 वर्ष) और उनके पुत्र शुभम उंबरकर, निवासी न्यू शांति नगर, रायपुर ने निलेश कुमार, रविकांत और सुशिला माने, निवासी वर्धा (महाराष्ट्र) के खिलाफ फर्जी वसीयत तैयार कर संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया है। मामले के अनुसार, मृतक लक्ष्मण माने जो रायपुर के गीतांजली नगर और पंडरीतराई में दो संपत्तियों के स्वामी थे, ने जीवनकाल में शुभम उंबरकर को अपना मानस पुत्र मानते हुए दिनांक 11 दिसंबर 2021 को वसीयतनामा तैयार किया था। इसके बाद 31 मई 2022 को उन्हें आम मुख्तियार (Power of Attorney) नियुक्त किया गया था। लक्ष्मण माने की मृत्यु 24 अक्टूबर 2022 को हुई, जिसके बाद न्यायालय के आदेश से संपत्ति का नामांतरण 5 जनवरी 2024 को शुभम उंबरकर के नाम दर्ज हुआ।
परिवादियों का आरोप है कि इसके कुछ समय बाद अभियुक्तगण ने खुद को मृतक के रिश्तेदार बताते हुए नामांतरण आदेश को चुनौती दी और न्यायालय तथा अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) के समक्ष एक नया वसीयतनामा दिनांक 28 अप्रैल 2022 प्रस्तुत कर दिया। संदेह होने पर शुभम उंबरकर ने उक्त दस्तावेज को हस्तलेख विशेषज्ञ से जांच कराया। 22 मार्च 2025 को प्राप्त रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि कथित वसीयतनामा में मौजूद हस्ताक्षर, स्व. लक्ष्मण माने के वास्तविक हस्ताक्षर से मेल नहीं खाते। विशेषज्ञ ने रिपोर्ट में Movement, Stroke Quality, Style, Alignment, Pen Pressure, Hesitation, Retouching आदि पहलुओं पर अंतर पाया और वसीयतनामा को कूटरचित बताया।
परिवाद में यह भी कहा गया है कि अभियुक्तगण ने फर्जी दस्तावेज की उत्पत्ति को लेकर विरोधाभासी बयान दिए — एक जगह कहा गया कि दस्तावेज मृतक के सूटकेस से मिला, वहीं दूसरी जगह कहा गया कि दीपावली के समय आलमारी की सफाई करते हुए मिला। कभी यह दस्तावेज रायपुर की संपत्ति से मिलने की बात कही गई, तो कभी वर्धा के घर से। ये विरोधाभासी कथन अभियुक्तों की आपराधिक मंशा को दर्शाते हैं।
परिवादियों ने पहले थाना सिविल लाइन में शिकायत दी थी, लेकिन 31 मई 2025 तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस ने धारा 174 B.N.S.S. (गैर-हस्तक्षेप योग्य अपराध की सूचना) के तहत “फैना” जारी कर दिया। इसके बाद शिकायत पुलिस अधीक्षक रायपुर तक पहुंचाई गई, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। अंततः न्यायालय के निर्देश पर परिवादीगण ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी रायपुर के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया, जिस पर अब अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू की गई है। इस पूरे मामले में अब यह जांच की जाएगी कि मृतक लक्ष्मण माने का कथित वसीयतनामा असली है या फर्जी। यदि फर्जी पाया गया तो अभियुक्तों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
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