छत्तीसगढ़

जनसंख्या के आधार पर 20 से 30 हजार रुपये तक देना होगा शुल्क

Shantanu Roy
14 Aug 2026 6:16 PM IST
जनसंख्या के आधार पर 20 से 30 हजार रुपये तक देना होगा शुल्क
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छग
Raipur. रायपुर। प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों से जुड़े संपत्ति नामांतरण और लीज नियमों को लेकर नई व्यवस्था लागू की गई है। अब नगरों की जनसंख्या के आधार पर नामांतरण शुल्क निर्धारित किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत 3 लाख से कम जनसंख्या वाले नगरीय निकायों में नामांतरण शुल्क 20 हजार रुपये, 3 लाख से 10 लाख तक की जनसंख्या वाले क्षेत्रों में 25 हजार रुपये और 10 लाख से अधिक आबादी वाले नगरों में 30 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। नई व्यवस्था में आवंटिती की मृत्यु होने की स्थिति में उनके वारिसों के पक्ष में
नामांतरण
के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। इससे मृतक आवंटितियों के परिवारों को राहत मिलेगी और संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया आसान होगी। नामांतरण प्रक्रिया के लिए कुछ आवश्यक शर्तें भी तय की गई हैं। इसके अनुसार आवंटिती को लीज डीड होने के दो वर्ष बाद संयुक्त आवेदन करना होगा। इसके साथ ही निर्धारित शुल्क जमा करना होगा और समाचार पत्र में 30 दिनों के लिए दावा-आपत्ति का प्रकाशन कराना अनिवार्य होगा। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नामांतरण की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।

लीज और किराया नियमों में बदलाव
नई व्यवस्था के तहत किराये और लीज से जुड़े नियम भी निर्धारित किए गए हैं। वार्षिक किराया स्वीकृत प्रीमियम राशि के प्रतिशत के आधार पर तय किया जाएगा। 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगर निगम क्षेत्रों में वार्षिक किराया 7.20 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। लीज डीड में किराये की वृद्धि का प्रावधान भी शामिल किया जाएगा। इसके अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद किराये में 5 प्रतिशत चक्रवृद्धि वृद्धि की जाएगी। इससे नगरीय निकायों को नियमित आय प्राप्त होगी और लीज व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी। लीज अवधि पूरी होने के बाद नवीनीकरण का भी प्रावधान किया गया है। 15 वर्ष की लीज अवधि समाप्त होने पर अगले 15 वर्षों के लिए लीज का नवीनीकरण किया जा सकेगा। नवीनीकरण के समय किराये में 25 प्रतिशत वृद्धि का प्रावधान रखा गया है। भिलाई नगर निगम में लीज किराया स्वीकृत प्रीमियम राशि के प्रतिशत के आधार पर तय किया जाएगा। इससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किराया निर्धारण की व्यवस्था की जाएगी।

शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की आय से नागरिक सुविधाओं पर खर्च
नई व्यवस्था में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स से होने वाली आय के उपयोग को लेकर भी प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार शॉपिंग कॉम्प्लेक्स से प्राप्त आय में से पहले ऋण की अदायगी की जाएगी। ऋण भुगतान के बाद बची हुई राशि का 25 प्रतिशत हिस्सा नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं पर खर्च किया जाएगा। इस राशि का उपयोग सड़क निर्माण, नाली व्यवस्था, उद्यान विकास और पेयजल जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा। इससे नगरीय क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।

निकायों की आय बढ़ाने पर जोर
नई व्यवस्था का उद्देश्य नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना और संपत्ति प्रबंधन को बेहतर बनाना है। नामांतरण शुल्क, लीज किराया और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स से होने वाली आय के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाने से निकायों को नियमित राजस्व प्राप्त होगा। अधिकारियों का मानना है कि नई व्यवस्था से संपत्ति संबंधी प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी होंगी और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। वहीं, नामांतरण और लीज से जुड़े मामलों में लंबे समय से चली आ रही असमंजस की स्थिति भी कम होगी।
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