छत्तीसगढ़

धर्मांतरण को लेकर अंतिम संस्कार में विवाद, T.I संजय यादव ने मौके पर वार्ता शुरू की

Shantanu Roy
3 Jan 2026 11:53 PM IST
धर्मांतरण को लेकर अंतिम संस्कार में विवाद, T.I संजय यादव ने मौके पर वार्ता शुरू की
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छग
Khadgaon. खड़गांव। जिले के खड़गांव थाना क्षेत्र के ग्राम घोटिया में धर्मांतरणित परिवार के एक बुजुर्ग व्यक्ति के निधन के बाद उनके शव को दफनाने को लेकर दो पक्षों में विवाद उत्पन्न हो गया। मामला तनावपूर्ण बन गया था, लेकिन पुलिस और प्रशासन की सक्रिय भूमिका से स्थिति नियंत्रण में आ गई और विवाद का समाधान हो गया। जानकारी के अनुसार, मृतक सुकाल सिंह मंडावी (80 वर्ष) का निधन कांकेर जिले के अस्पताल में हुआ। परिवार ने शव को पैतृक गांव घोटिया लाकर ईसाई धर्मावलंबियों की उपस्थिति में
अंतिम संस्कार
करने का प्रयास किया। जैसे ही शव गांव लाया गया, ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि मृतक और उनका परिवार ईसाई धर्म अपनाने के कारण पारंपरिक रीति-रिवाज से हट गए हैं, इसलिए उन्हें गांव में दफनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
विवाद बढ़ने पर खड़गांव थाना प्रभारी संजय यादव पुलिस जवानों के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों के साथ वार्ता शुरू की। वार्ता में यह निर्णय लिया गया कि शव का अंतिम संस्कार ग्राम घोटिया में नहीं बल्कि मानपुर स्थित ईसाई कब्रस्तान में किया जाए। इस सहमति के बाद ग्रामीणों ने विरोध समाप्त किया। पुलिस की निगरानी में शव को घोटिया से मानपुर ब्लॉक मुख्यालय स्थित कब्रस्तान तक पहुंचाया गया। नायब तहसीलदार दिलीप साहू और राज अधिकारी आशीष की मौजूदगी में परिजनों ने देर शाम ईसाई विधि-वैधानिक तरीके से अंतिम संस्कार संपन्न किया। स्थानीय लोगों के अनुसार, मृतक और उनका परिवार लगभग दस साल से ईसाई धर्म का पालन कर रहे थे। ग्रामीण चाहते थे कि मृत्यु संस्कार पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार संपन्न हो। हालांकि, परिवार ने इस पर सहमति नहीं दी।
थाना प्रभारी संजय यादव ने बताया कि दोनों पक्षों की समझदारी और पुलिस की सक्रिय भूमिका के कारण घटना बड़ी नहीं हुई। उन्होंने सभी से अपील की कि आपसी मतभेदों को शांति और संवाद के माध्यम से ही सुलझाया जाए। इस घटना ने यह स्पष्ट किया कि धार्मिक मतभेदों और पारंपरिक रीति-रिवाज के मामलों में प्रशासनिक हस्तक्षेप और पुलिस की सक्रियता विवादों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने मौके पर शांतिपूर्ण वार्ता कर दोनों पक्षों को समझाया और अंतिम संस्कार की व्यवस्था सुचारू रूप से सुनिश्चित की। ग्रामीणों और परिवार के बीच यह सहमति एक उदाहरण पेश करती है कि संवेदनशील मामलों को बातचीत और आपसी समझदारी से सुलझाया जा सकता है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसे मामलों में जल्द कार्रवाई और मध्यस्थता सुनिश्चित की जाएगी ताकि किसी भी तरह का तनाव या हिंसक संघर्ष न उत्पन्न हो। घोटिया गांव का यह मामला राज्य और जिला प्रशासन के लिए भी एक सीख है कि धार्मिक और सांस्कृतिक मतभेदों के मामलों में समय पर सक्रिय हस्तक्षेप आवश्यक है। इस घटना के बाद स्थानीय लोग भी इसे सकारात्मक उदाहरण के रूप में देख रहे हैं और सभी ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका की सराहना की।
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