छत्तीसगढ़
बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में बड़ा कदम, अधिकारियों ने ली शपथ
Shantanu Roy
12 Nov 2025 7:43 PM IST

x
छग
Mahasamund. महासमुंद। छत्तीसगढ़ सरकार के बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान को गति देने के लिए महासमुंद जिले में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिले के आत्मानंद विद्यालय सभाकक्ष में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा नए प्रतिषेध अधिकारियों के लिए एकदिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का उद्देश्य अधिकारियों को बाल विवाह रोकथाम से जुड़े कानूनी प्रावधानों, रिपोर्टिंग तंत्र, समुदाय की भागीदारी और बाल संरक्षण कानूनों की जानकारी देना था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नगरपालिका उपाध्यक्ष देवीचंद राठी शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ में बाल विवाह के मामले अब बहुत कम हो गए हैं, लेकिन सरकार की मंशा है कि वर्ष 2028-29 तक पूरा राज्य बाल विवाह मुक्त घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि “यह सिर्फ प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का संकल्प है। हमें हर ग्राम पंचायत और हर वार्ड स्तर तक सजग रहना होगा ताकि किसी भी नाबालिग का विवाह न हो सके।”
कार्यशाला में पार्षद पीयूष साहू, कल्पना सूर्यवंशी, पूर्व पार्षद राजू चंद्राकर, डीएसपी चुन्नू तिग्गा, नईम ख़ान, शरद मराठा, गौरव राठी, बाल संरक्षण अधिकारी खेमचंद चौधरी, सहित महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी श्रीमती शैल नाविक, अपर्णा श्रीवास्तव, मनीषा साहू और सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं पर्यवेक्षक मौजूद थे। इस दौरान परियोजना अधिकारी मनीषा साहू ने सभी उपस्थित लोगों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रमुख प्रावधानों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि भारत में लड़की की विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है। अगर कोई व्यक्ति नाबालिग का विवाह कराता है या उसमें सहयोग करता है तो उसे दो वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
उन्होंने आगे बताया कि बाल विवाह सिर्फ एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि यह बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर असर डालता है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत पिछले दो वर्षों में महासमुंद जिले में बालिकाओं में एनीमिया की दर में 15 प्रतिशत की कमी आई है, वहीं स्कूल ड्रॉपआउट दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। अब तक जिले में 500 से अधिक बालिकाओं को स्कॉलरशिप प्रदान की जा चुकी है। कार्यशाला के दौरान पुलिस विभाग के प्रतिनिधियों द्वारा साइबर जागरूकता अभियान और किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के प्रावधानों पर भी जानकारी दी गई। इसमें बाल संरक्षण और प्रभावित बच्चों के पुनर्वास पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम के समापन सत्र में सभी उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने “बाल विवाह मुक्त महासमुंद” और “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” बनाने की शपथ ली। सभी ने यह भी संकल्प लिया कि अपने-अपने क्षेत्रों में जनजागरूकता अभियान चलाकर समाज के हर वर्ग को इस दिशा में जागरूक किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से जिले में बाल विवाह रोकथाम को लेकर प्रशासनिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर एकजुटता देखने को मिली है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी बाल विवाह के मामले पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी और दोषियों पर सख्त दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।
Tagsमहासमुंद बाल विवाह मुक्त अभियानबाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओमहिला एवं बाल विकास विभाग महासमुंददेवीचंद राठीमनीषा साहूबाल संरक्षण अधिकारीछत्तीसगढ़ 2028-29 लक्ष्यबाल विवाह रोकथाम कार्यशालाआत्मानंद विद्यालय महासमुंदबाल विवाह शपथMahasamund Child Marriage Free CampaignChild Marriage Prohibition Act 2006Beti Bachao Beti PadhaoWomen and Child Development Department MahasamundDevichand RathiManisha SahuChild Protection OfficerChhattisgarh 2028-29 TargetChild Marriage Prevention WorkshopAtmanand Vidyalaya MahasamundChild Marriage Oath
Next Story





