छत्तीसगढ़
आत्मसमर्पित 8 पूर्व नक्सलियों ने पास की 10वीं कक्षा, भास्कर और गीता ने प्रथम श्रेणी हासिल की
Shantanu Roy
2 Oct 2026 4:11 PM IST

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Bastar. बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में आत्मसमर्पण के बाद पूर्व नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में शिक्षा को भी महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जा रहा है। इसी पहल के तहत छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल से 8 आत्मसमर्पित पूर्व नक्सलियों ने 10वीं की परीक्षा पास की है। सफल परीक्षार्थियों में बस्तर जिले के 6, कांकेर के 1 और बीजापुर के 1 पूर्व नक्सली शामिल हैं। इनमें दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के स्टेट कमेटी सदस्य रहे भास्कर और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की गीता नारोटे ने प्रथम श्रेणी हासिल की है। आत्मसमर्पण के बाद पूर्व नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से भी जोड़ने की तैयारी की जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक जिन लोगों ने पढ़ाई में रुचि दिखाई, उन्हें छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल के माध्यम से 10वीं की परीक्षा दिलाई गई। संभाग से परीक्षा देने वाले सभी 8 परीक्षार्थी सफल रहे हैं। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की रहने वाली गीता नारोटे की कहानी भी इसी बदलाव से जुड़ी है। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्होंने छठवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बाद वह नक्सली संगठन में शामिल हो गईं और करीब दो दशक तक संगठन से जुड़ी रहीं। इस दौरान वह घायल नक्सलियों के उपचार का काम करती थीं। टांके लगाने, इंजेक्शन लगाने और दवाइयों की जानकारी होने के कारण संगठन में गीता को ‘नक्सली डॉक्टर गीता’ के नाम से भी जाना जाता था। आत्मसमर्पण के बाद उन्होंने पढ़ाई दोबारा शुरू करने का फैसला लिया। 35 साल की उम्र में गीता ने छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल से 10वीं की परीक्षा दी और प्रथम श्रेणी से सफलता हासिल की।
इसी तरह तेलंगाना के रहने वाले भास्कर भी लंबे समय तक नक्सली संगठन का हिस्सा रहे। उन्होंने 1990 के दशक में संगठन से जुड़कर सामान्य सदस्य के रूप में काम शुरू किया था। बाद में उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं और वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के स्टेट कमेटी सदस्य तक रहे। बस्तर में लंबे समय तक रहने के दौरान भास्कर ने हिंदी सीखी। इसी अवधि में उनकी किताबों और पढ़ने के प्रति रुचि बढ़ी। आत्मसमर्पण के बाद उन्होंने अपनी इस रुचि को आगे की पढ़ाई से जोड़ा और छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल से 10वीं की परीक्षा में शामिल हुए। उन्होंने भी प्रथम श्रेणी से परीक्षा पास की। भास्कर का कहना है कि संगठन में रहते हुए उन्होंने हथियार चलाने का प्रशिक्षण लिया था, लेकिन अब वह किताबों के जरिए आगे बढ़ना चाहते हैं। उनका लक्ष्य आगे की पढ़ाई पूरी करने के साथ अपने समाज के लिए काम करना है। पढ़ाई पूरी करने की उनकी कोशिश आत्मसमर्पण के बाद जीवन में आए बदलाव को भी दर्शाती है।
बस्तर आईजी बद्रीनारायण मीणा ने बताया कि छत्तीसगढ़ की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को उनकी रुचि, क्षमता और आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी कड़ी में जिन पूर्व नक्सलियों ने शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की इच्छा जताई, उन्हें छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल के माध्यम से 10वीं की परीक्षा में शामिल कराया गया। आईजी के अनुसार बस्तर संभाग से कुल 8 आत्मसमर्पित पूर्व नक्सलियों ने 10वीं की परीक्षा दी थी और सभी सफल रहे। इनमें बस्तर जिले के 6, कांकेर के 1 और बीजापुर के 1 परीक्षार्थी शामिल हैं। अब इन सफल परीक्षार्थियों को आगे की पढ़ाई के अवसर उपलब्ध कराने के साथ उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार रोजगार तथा स्वरोजगार से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।
पुनर्वास की इस प्रक्रिया में शिक्षा को एक ऐसे माध्यम के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे आत्मसमर्पित लोग अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी कर सकें और भविष्य के लिए नए अवसर तलाश सकें। 10वीं परीक्षा में आठों परीक्षार्थियों की सफलता ने इस प्रयास को आगे बढ़ाने का रास्ता तैयार किया है। अब इन पूर्व नक्सलियों की आगे की शिक्षा और कौशल विकास को लेकर भी काम किया जाएगा। बस्तर संभाग में आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने की कोशिशों के बीच 10वीं पास करने वाले इन 8 पूर्व नक्सलियों की उपलब्धि शिक्षा के जरिए नए अवसरों की ओर बढ़ते कदम के रूप में सामने आई है। विभाग की योजना अब इन्हें आगे की पढ़ाई, प्रशिक्षण और आजीविका के अवसरों से जोड़ने की है।
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