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दवा कंपनियों से सांठ-गांठ कर अधिकारी-कर्मचारी कर रहे कमीशनखोरी, प्रधानमंत्री की मंशा और केंद्र के निर्देशों की अवहेलना
जेनेरिक दवाओं की जगह, ब्रांडेड दवाइयों की खरीदी
पांच करोड़ की दवा 50 करोड़ में खरीदकर सरकार को लगा रहे चूना
कमीशनखोरी के लिए बाजार में नहीं चलने वाली दवाइया खरीद रहे
ब्रांडेड दवा लिखने-वितरित करने पर रोक, फिर भी हो रही खरीदी
रायपुर (जसेरि)। कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं द्वारा राज्य के कर्मचारियों और पंजीकृत श्रमिकों के संचालित डिस्पेसरियों में वितरित की जाने वाली दवाओं की खरीद में श्रम सचिव और संचालक के संरक्षण में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी की जा रही है। इन डिस्पेंसरियों में वितरित करने के लिए 2024-25 और 2025-26 में जेनेरिक दवाओं की जगह पर ब्रांडेड दवाइयों की खरीदी कर व्यापक भ्रष्टाचार किया गया है। छग भंडार क्रय नियमों को ताक में रखकर 5 करोड़ की दवाइयों को 50 करोड़ में खरीदा गया। उल्लेखनीय है कि राज्य के श्रम विभाग के अधीन आने वाली संस्था कमर्चारी राज्य बीमा सेवाएं रायापुर के द्वारा पंजीकृत श्रमिकों के इलाज के लिए डिस्पेंसरियों में उपयोग के लिए प्रति वर्ष कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं रायपुर द्वारा दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं। केन्द्र सरकार ने लोगों को सस्ती दवा उपलब्ध कराने के लिए अस्पतालों में ब्रांडेड दवाओं के वितरण और डाक्टरों के ब्रांडेड दवा लिखने पर प्रतिबंध लगाया है। इतना ही नहीं सस्ती दवाओं के लिए जन औषधि केन्द्र खोले गए हैं. इसके बावजूद कमर्चारी राज्य बीमा सेवाएं के अधिकारी कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के लिए ब्रांडेड दवाइयां खरीद रहे हैं। पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता ननकी राम कंवर ने इस भारी भ्रष्टाचार की ओर सीएम विष्णुदेव साय का ध्यान आकृष्ट कराते हुए पत्र लिखा है और कार्रवाई की मांग की है।
राज्य भंडार क्रय नियमों का उल्लंघन
पूर्व मंत्री ने पत्र में बताया है कि छग भंडार क्रय नियमों में यह प्रावधान किया गया है कि राज्य शासन के विभागों को उच्च गुणवत्ता वाली सामाग्री उचित दरों पर निश्चित समायावधि में प्राप्त् हो सके, राज्य शासन को न्यूनतम दरों पर सामाग्री की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके, स्थानीय लघु उद्योगों को प्रोत्साहन मिले तथा यदि किन्ही सामाग्रियों का उत्पदान राज्य के अनुसूचित जाति, जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के उद्यमियों द्वारा किया जाता है तो मूल्य एवं गुणवत्ता सामान होने की दशा में सामग्रियां क्रय करने में ऐसे उद्योंगों को प्राथमिकता मिले।
भंडार क्रय नियम शासकिय विभागों द्वारा क्रय की जाने वाली वस्तुओं पर लागू होते हैं इसके उप नियम-2.1 समस्त शासकीय विभागों के अतिरिक्त छग राज्य विद्युत मंडल, प्रदेश के समस्त सार्वजनिक उपक्रम, मंडस, जिला पंचायत, जनपद पंचायत एवं नगरीय निकाय भी भंडार क्रय नियमों की परिधि में रहेंगे। इसी प्रकार विस्तृत रुप से छग शासन भंडार क्रय नियम 2002 में शासन को उपयोग होने वाली सामग्रियों को क्रय करने के लिए भी विस्तृत नियमावली उल्लेखित है जिसका पूर्ण रूपर से अवहेलना करते हुए कर्मचारी राज्य बीमा सेवाए रायपुर के द्वारा विगत कई वर्षों से जेनरिक दवाई न खरीदकर ब्रांडेड दवाइयां अधिक दर पर खरीदी जा रही हैं। उदाहरण के तौर पर जो ब्रांडेड दवाइयां इनके द्वारा 50 करोड़ में खरीदी जा रही हैं व दवाइयां जेनरिक में मात्र 5 करोड़ की है। इससे स्पष्ट है कि उपरोक्त खरीदी में कर्मचारी-अधिकारी एवं दवा कंपनियां मिलकर बड़ा भ्रष्टाचार करते हुए कमीशनखोरी कर रहे हैं।
दवा कंपनियों से सांठगांठ
कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं रायपुर के द्वारा वर्ष 2024-25 में कई ब्रांडेड कंपनियों से उन दवाइयों की खरीदी की गई है जो दवाइयां बाजार में नहीं चलती हैं और कंपनियों के पास निर्माण होकर एक्सापायरी हो जाती हैं। उन्हें बेचने के लिए कंपनियों के द्वारा 50 से 60 फीसदी कमीशन दिए जाते हैं। इसी कमीशनखोरी के लिए कर्मचारी-अधिकारी दवा कंपनियों से सांठगांठ कर ब्रांडेड दवाइयों की खरीदी की गई है। वर्तमान में वर्ष 2025-26 में भी इसी कमीशनखोरी के लिए कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं के अधिकारियों द्वारा पचास से ज्यादा ब्रांडेड कंपनियों से ब्राडेड दवाइयां खरीदने की तैयारी की जा चुकी हैं।
50 करोड़ से ज्यादा का भ्रष्टाचार
छत्तीसगढ़ सरकार के श्रम विभाग के अंतर्गत कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं रायपुर के द्वारा प्रतिवर्ष पचास सौ करोड़ से ज्यादा की ब्रांडेड द्वाइयां खरीदी जाती हैं, जिसमें 50 करोड़ से ज्यादा का भ्रष्टाचार हो रहा है। संस्थान में पंजीकृत श्रमिकों एवं उनके परिवार वालों का कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं रायपुर के अस्पताल एव डिस्पेसरियों के द्वारा मु त इलाज व दवाइयां दी जाती है, इसके लिए कर्मचारी राज्य बीमा सेवाए रायपुर के द्वारा दवाइयों की खरीदी की जाती है। पिछले कई वर्षों से श्रम विभाग एवं कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं रायपुर के अधिकारी कर्मचारी व दवा निर्माता मिलकर ब्रांडेड दवाइयों की खरीदी कर 50 करोड़ से अधिक का प्रतिवर्ष भ्रष्टाचार कर रहे हैं।
डाक्टरों के ब्रांडेडे दवाएं लिखने पर प्रतिबंध
केन्द्र एवं राज्य सरकार के द्वारा सरकारी व निजी डाक्टरों के ब्रांडेड दवाइयों के लिखने एवं खरीदने पर प्रतिबंध लगाया गया है उसके बाद भी कर्मचारी राज्य बीमा सेवाए रायपुर के द्वारा केन्द्र व राज्य के आदेशों की अवहेलना करते हुए कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार करने के लिए बांडेड दवा खरीद कर आपूर्ति की जा रही है। यह पूरा खेल सिर्फ कमीशनखोरी के लिए हो रहा है।
पूरे प्रदेश में 40 से ज्यादा अस्पताल व डिस्पेंसरियां
कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं रायपुर के अंतर्गत करीब 40 डिस्पेंसरियां पूरे प्रदेश में हैं जिनका काम पंजीकृत श्रमिकों एवं उनके परिवार वालों को मु त स्वास्थ्य सुविधाएं एवं दवाइयां उपलब्ध कराना है इस सुविधा के लिए ब्रांडेड दवाइयां खरीदी प्रतिवर्ष लगभग पचास सौ करोड़ से ज्यादा की खरीदी जाती हैं। जो जेनेरिक दवाइयों से 60 से 70 प्रतिशत ज्यादा महंगी होती हैं। जबकि छत्तीसगढ़ सरकार में पदस्थ डाक्टरों को ब्रांडेड दवाइयां लिखने पर रोक लगा दी गई है। उसके बाद भी कर्मचारी राज्य बीमा सेवाए रायपुर के द्वारा ब्रांडेड दवाइयां खरीदकर प्रतिवर्ष 50 करोड़ से अधिक का भ्रष्टाचार किया जा रहा है। डाक्टर भी रोक के बावजूद ब्रांडेड दवा ही प्रिसक्राइव कर रहे हैं। कर्माचारी राज्य बीमा सेवाएं के अधिकारी-कर्मचारी दवा निर्माता कंपनियों से सांठगांठ कर सरकार को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। जबकि प्रदेश में दवा खरीदी करने के लिए राज्य सरकारी की संस्था सीजीएमसससी है जो कि जेनेरिक दवाओं का ही टेंडर कर सरकार की संस्थाओं को सप्लाई करती है बावजूद ईएसआईसी के अधिकारी कमीशनखोरी के लिए इस संस्था के माध्यम से दवा खरीदने की जगह सीधे दवा कंपनियों से दवाइयां खरीद रहे हैं।
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