छत्तीसगढ़
हाथी के हमले में 40 दिन के नवजात की मौत, ग्रामीणों में गहरा आक्रोश
Shantanu Roy
9 Dec 2025 12:07 AM IST

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Surajpur. सूरजपुर। जिले के भटगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत चिकनी धरमपुर गांव में बीती रात एक दर्दनाक घटना हुई, जिसमें हाथी के हमले में 40 दिन का नवजात बच्चा मारा गया। घटना रात करीब 1 बजे हुई, जब उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से आए प्रवासी मजदूर दंपती अपने परिवार के साथ गुड़ फैक्ट्री के पास अस्थायी झोपड़ी में रह रहे थे। जानकारी के अनुसार, रात में सोनगरा जंगल से भटककर एक हाथी गुड़ की गंध से आकर्षित होकर झोपड़ी की ओर आया। हाथी ने झोपड़ी को तोड़ दिया। इस दौरान दंपती किसी तरह अपने साथ अपने बच्चों को लेकर बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन उनका 40 दिन का नवजात हाथी के पैरों तले कुचल गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
घटना की सूचना ग्रामीणों ने वन विभाग को दी, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय टीम घटना स्थल पर काफी देर बाद पहुंची। इस असंवेदनशीलता के कारण ग्रामीणों में विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा आक्रोश देखा गया। उनका कहना है कि यदि समय पर सूचना तंत्र और चेतावनी व्यवस्था सक्रिय होती, तो इस हादसे को रोका जा सकता था। घटनास्थल पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने मृतक परिवार को 25 हजार रुपये की तत्काल सहायता राशि देने की बात कही। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि विभाग केवल घटना के बाद औपचारिकताएं पूरी करता है, जबकि हाथियों के हमलों की रोकथाम के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते।
स्थानीय जानकारों के अनुसार, क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। हाथियों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर नहीं हैं, प्रभावी चेतावनी प्रणाली नहीं है और रात्रि गश्त की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से इस तरह की घटनाएं बार-बार हो रही हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्रों में बार्डर फेंसिंग, अलार्म सिस्टम, रात्रि गश्त और जागरूकता कार्यक्रम जैसी व्यवस्थाओं की सख्त आवश्यकता बताई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में चिंता और भय का माहौल पैदा कर दिया है। लोगों का कहना है कि मानव-हाथी संघर्ष से न केवल जान-माल का नुकसान होता है, बल्कि ग्रामीण जीवन भी असुरक्षित महसूस करता है। वन विभाग से अपेक्षा की जा रही है कि वे हाथियों के आवागमन और ग्रामीणों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने के लिए ठोस योजनाएं बनाएं।
सुरक्षा उपायों में सुधार और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को तेज करने के लिए स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के बीच समन्वय जरूरी है। ग्रामीणों ने चेताया कि यदि भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो वे स्वयं जागरूकता और सतर्कता के उपाय अपनाने पर मजबूर होंगे। इस प्रकार सूरजपुर जिले में मानव-हाथी संघर्ष की यह घटना न केवल नवजात की असमय मौत का कारण बनी, बल्कि ग्रामीणों और वन विभाग के बीच संवाद और जिम्मेदारी के मुद्दे को भी उजागर कर गई। प्रशासन और वन विभाग को शीघ्र ही इस गंभीर समस्या का समाधान ढूंढना होगा ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
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