छत्तीसगढ़
भारतमाला परियोजना में ₹32 करोड़ का मुआवज़ा घोटाला उजागर, 7,500 पेज का चालान पेश
Shantanu Roy
13 Oct 2025 6:48 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। भारत सरकार की भारतमाला परियोजना (रायपुर–विशाखापट्टनम हाईवे निर्माण) से जुड़ा एक बड़ा मुआवज़ा घोटाला सामने आया है। रायपुर स्थित विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में करीब 7,500 पृष्ठों का पहला अभियोग पत्र दाखिल किया गया है। यह चालान अपराध क्रमांक 30/2025 से संबंधित है, जिसमें कई राजस्व अधिकारी और निजी व्यक्ति शामिल हैं। लोक सेवक अभियुक्तों में गोपाल राम वर्मा और नरेन्द्र कुमार नायक के नाम प्रमुख हैं, जबकि निजी आरोपियों में उमा तिवारी, केदार तिवारी, हरमीत सिंह खनूजा, विजय कुमार जैन, खेमराज कोशले, पुनुराम देशलहरे, भोजराम साहू और कुंदन बघेल शामिल हैं। इन सभी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 471, 420, 409, 120-बी सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धाराएं लगाई गई हैं।
तीन स्तरों पर घोटाले का खुलासा
प्राथमिक जांच में तीन मुख्य प्रकरणों की विवेचना की गई है-
ग्राम नायकबांधा, टोकरो और उरला में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में फर्जी बंटवारा और नामांतरण,
नायकबांधा जलाशय से संबंधित पूर्व अधिग्रहित भूमि का पुनः मुआवज़ा भुगतान, और
उमा तिवारी के नाम पर फर्जी दस्तावेज़ों से भूमि नामांतरण और मुआवज़ा वसूली।
जांच में पाया गया कि राजस्व अधिकारियों और दलालों ने बैक डेट में फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर भूमि का बंटवारा और नामांतरण करवाया, जिसके जरिए अधिक मुआवज़ा हासिल किया गया। इस प्रक्रिया से शासन को लगभग ₹28 करोड़ का नुकसान हुआ। वहीं, नायकबांधा जलाशय से संबंधित प्रकरण में पहले से अधिग्रहित भूमि पर पुनः मुआवज़ा भुगतान कर ₹2 करोड़ की हानि पहुंचाई गई। तीसरे प्रकरण में उमा तिवारी के माध्यम से फर्जी दस्तावेज़ों द्वारा ₹2 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ। इस प्रकार शासन को कुल मिलाकर लगभग ₹32 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।
अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत
चालान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों ने निजी दलाल हरमीत सिंह खनूजा और उसके सहयोगियों के साथ मिलकर किसानों को "अधिक मुआवज़ा दिलवाने" का लालच दिया। इस दौरान किसानों से कोरे चेक और आरटीजीएस फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाकर मुआवज़े का बड़ा हिस्सा अपने खातों में ट्रांसफर कर लिया गया। सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क ने योजनाबद्ध तरीके से सरकारी सिस्टम का दुरुपयोग किया। फर्जी बंटवारे और नामांतरण के लिए राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी, बैक डेट एंट्री, और कथित भूमिधारकों के नाम पर नकली दाखिल-खारिज दस्तावेज़ तैयार किए गए। इसके बाद मुआवज़े की राशि को दलालों और उनके सहयोगी फर्मों के खातों में ट्रांसफर किया गया।
शासन के रिकॉर्ड छिपाने और मिथ्या प्रतिवेदन की साजिश
जांच में सामने आया है कि तत्कालीन अधिकारी नरेन्द्र नायक और गोपाल वर्मा ने अन्य अभियुक्तों के साथ मिलकर नायकबांधा जलाशय से जुड़ी पूर्व अधिग्रहण फाइलें दबा दीं और झूठे प्रतिवेदन (फर्जी रिपोर्ट) तैयार किए। इन दस्तावेज़ों के आधार पर किसानों को अनुचित भुगतान किया गया। नतीजतन, सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान और प्रभावित किसानों को उनके वास्तविक मुआवज़े से वंचित रहना पड़ा। साथ ही अन्य राजस्व एवं तकनीकी अधिकारियों पर भी भूमि अभिलेखों से छेड़छाड़ और तथ्य छिपाने के आरोप हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि यह पूरा मामला एक संगठित आपराधिक षड्यंत्र का परिणाम है, जिसमें सरकारी पद का दुरुपयोग कर अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया गया।
कई आरोपी अब भी फरार
विवेचना में शामिल राजस्व अधिकारी — निर्भय साहू (तत्कालीन एसडीओ, अभनपुर), दिनेश पटेल (पटवारी), रोशन लाल वर्मा (निरीक्षक), शशिकांत कुर्रे (तहसीलदार), जितेन्द्र साहू (पटवारी), बसंती घृतलहरे (पटवारी), लखेश्वर किरण (नायब तहसीलदार) और लेखराम देवांगन (पटवारी) — न्यायालय से राहत पाने के बाद भी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। इनके विरुद्ध अग्रिम विवेचना जारी है और अलग चालान प्रस्तुत किया जाएगा।
आगे की जांच जारी
वर्तमान में जांच एजेंसियां वित्तीय दस्तावेज़ों और बैंक खातों के ट्रेल का विश्लेषण कर रही हैं। लक्ष्य यह पता लगाना है कि शासन के साथ कुल मिलाकर कितनी धोखाधड़ी की गई और इसमें किन-किन अन्य अधिकारियों और दलालों की संलिप्तता रही। रायपुर के राजस्व और विकास प्रशासन में यह मामला इस समय सबसे बड़े मुआवज़ा घोटालों में से एक माना जा रहा है। परियोजना के अन्य ग्रामों विशेष रूप से टोकरो, उरला और नायकबांधा क्षेत्र में भी इसी तरह की अनियमितताओं की जांच जारी है।सूत्रों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में और बड़े नाम इस मुआवज़ा घोटाले में सामने आ सकते हैं। फिलहाल, क्राइम ब्रांच और एसीबी की संयुक्त टीमें वित्तीय लेन-देन की परतें खोलने में जुटी हैं।
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