
बसों की चेकिंग को दौरान रसूख का उपयोग कर मौके पर लेन-देन कर लिया जाता है रफा -दफा
एक दिन के परमिट के कागज में छेड़छाड़ कर बना दिया जाता है स्थायी
सरकार को बस आपरेटर लगा रहे है लाखों रुपए के टैक्स का चूना
बस संचालक विशेष परमिट के नाम एक दिन का स्पेशल परमिट लेकर चलाते है महीनों
एक दिन का बस परमिट का एक महीने चलाने का फर्जीवाड़े का हुआ खुलासा
एक परमिट पर दो-दो बसें चलाने की भी शिकायत साथ ही
बस टाईमिंग को लेकर ऑपरेटरों में खूनी संर्घष भी हो रहे
रायपुर । छत्तीसगढ़ में बसों के परमिट को लेकर नित नए खुलासे हो रहे है। बस मालिक सरकार की आंखों में धूल झोंकने एक दिन का विशेष परमिट लेते है उस परमिट में छेड़छाड़ कर महीनों बस चलाने के बड़े फर्जीवाड़े का खुसाला आरटीओ अधिकारी ने किया है। इंटर स्टेट चलने वाली बसों पर बेहद सख्ती शुरू हो गई है। परिवहन विभाग की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि करीब 300 बसों को इंटर स्टेट परमिट जारी किया गया है। लेकिन रोजाना 500 से ज्यादा बसें दूसरे राज्यों में जा रही है। इससे विभाग को लाखों रुपए के टैक्स का नुकसान हो रहा है। यह सिलसिला अविभाजित मध्यप्रदेश के दौर से चल रहा है। 200 में जोगी सरकार ने सरकारी बसों को बंद कर निजी बसों को परमिट देने का काम शुरू किया उसी दौर में विशेष परमिट, एक दिनी परमिट, टूरिस्ट परमिट के साथ अंतरराज्जीय परमिट देने के सरकारी आदेश का बस आपरेटरों ने बेजा फायदा उठाते हुए आरटीओ् में बैठे अधिकारियों और क्लरीकल स्टाफ से सांठगांठ कर परमिट को लंबे समय तक चलाने का खेल शुरू हुआ जो आज तक बदस्तूर जारी है। अब सरकार ने इस बारे में संज्ञान लेकर बसों के परिचालन को लेकर जांच में परत-दरृ-परत चौकाने वाले खुलासे हो रहे है।
जांच में यह भी पता चला है कि बस संचालक विशेष परमिट के नाम एक दिन का स्पेशल परमिट लेते हैं। इस एक दिन के परमिट के कागज में छेड़छाड़ कर उसे स्थायी बना दिया जाता है। फिर इस परमिट के आधार पर बसों को छत्तीसगढ़ से बाहर भेजा जा रहा है। सडक़ों या टोल पर सख्ती से जांच नहीं होने की वजह से बसें आसानी से आना-जाना कर लेती हैं। कहीं कोई बसों को रोकता भी है तो मौके पर लेन-देन कर मामला खत्म कर दिया जाता है।
परिवहन विभाग के आला अफसरों, उडऩदस्तों की टीम और परिवहन निरीक्षकों की करीब एक महीने की जांच के बाद ही इस फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ। यही वजह है कि अब इंटरस्टेट बसों की जांच रास्ते में रोककर की जा रही है। इसके लिए उडऩदस्तों को अलर्ट किया गया है।
राज्य के बाहर जैसे रांची, हैदराबाद, नागपुर, विशाखापट्नम, बंगलुरू, कानपुर, इलाहाबाद समेत दूसरे राज्य के किसी भी शहर में बसें जा रही हैं तो उसे राज्य की सीमा पार होने के पहले जांच के लिए रोका जा रहा है। अभी एक हफ्ते की कार्रवाई में 124 बसों पर जुर्माना किया गया है। अभी तक जुर्माने के तौर पर 2 लाख रुपए से ज्यादा की वसूली हो चुकी है। अभी यह जांच आगे भी जारी रहेगी। अलग-अलग दिनों की जांच के लिए अलग-अलग उडऩदस्ता की टीम बनाई गई है।
आरटीओ दफ्तर में अब स्कैन वाली जांच
आरटीओ रायपुर कार्यालय से एक दिन के लिए या विशेष अस्थायी परमिट जारी करने से पहले उसका बारीकी से स्कैन किया जा रहा है। बस संचालक ने कहां से कहां तक के लिए परमिट मांगा है। बस कहां जाकर रुकेगी। काम खत्म होने के बाद वापस कब लौटेगी। इसकी पूरी पड़ताल करने के बाद ही परमिट जारी किया जा रहा है।
इतना ही नहीं परिवहन निरीक्षकों से कहा गया है कि वे जिस तारीख को परमिट खत्म हो रहा है उस दिन मौके पर जाकर देखे कि बस वापस आई है या नहीं। उसी नंबर की बस परमिट खत्म होने के बाद कैसे चलाई जा रही है। हालांकि परिवहन विभाग की इस सख्ती का यातायात संघ वाले विरोध भी कर रहे हैं।
उनका आरोप है कि परमिट की जांच के नाम पर बसों को रास्ते में रोका जा रहा है। इससे उस समय बस में बैठ लोग काफी परेशान होते हैं। जितनी देर जांच चलती है यात्रियों को बसों में ही बैठकर इंतजार करना पड़ता है।
अस्थायी परमिट देने पर हो रही सख्ती
अस्थायी परमिट लेकर इंटर स्टेट बस चलाने वालों पर सख्ती जारी है। एक दिन का परमिट लेकर बार-बार उसका उपयोग करने की शिकायतों के बाद ही अब हर जगह जांच की जा रही है। कम समय में ही ऐसी बसों से लाखों का जुर्माना वसूल हो चुका है। ये सख्ती आगे भी जारी रहेगी।
शराब घोटाले की तरह परमिट घोटाला कर रहा है सिंडिकेट
जब से पंडरी से उठकर भाठागांव बस स्टैंड आया है और अंतर्राज्यीय बस स्टैंड हुआ है तब से अब तक यहां एैसे -एैसे कारमाने हो रहे जो सरकार के भी पल्ले नहीं पड़ रही है। प्रदेश भर बस संचालित करने वाले बस मालिकों का मिली-जुली सांठ गांठ से टैक्स चोरी का खेला चल रहा है। ये भी शराब घोटाले की तरह ही है इसमें भी अब तक जब से राज्य बना है तब से एक परमिट से कई बस चलाने का खेल चल रहा है। अलग-अलग राज्य़ों में एक ही नंबर की बस चलाकर हर माह करोड़ों छाप रहे है और सरकार को अरबों का चूना लगाने का वाला सिडिंकेट पूरी मुस्तैदी से बसों को संचािलत कर रहा है। इससे पूर्व संभागीय बस आपरेटर्स संघ ने महिंद्रा ट्रेवल्स समेत रायपुर के बसों को जारी 50 से 70 परमिट फर्जी होने की आशंका जताते हुए जांच की मांग पहले भी संघ व्दारा की जा चुकी है। वहीं शहर में चल रहे बुकिंग काउंटरों को भी अवैध बताया गया है। एजेंटों के लाइसेंस की जांच किए जाने की मांग एसपी से की गई है।
संघ के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह कुशवाह व पदाधिकारियों ने नया बस स्टैंड स्थित कार्यालय से जारी विज्ञिप्त में बताया कि रायपुर की विभिन्न ट्रेवल्स कंपनियों का शहर में बुकिंग आफिस चल रहा है। इनके एजेंटो को शासन द्वारा लाइसेंस जारी नहीं किया गया है। फलस्वरूप बुकिंग एजेंट के रूप से असामाजिक तत्व सवारी भरने व टिकट काटने का काम कर रहे हैं। इनके चलते आए-दिन स्थानीय बस संचालकों से विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है। संघ द्वारा इस बारे में पुलिस अधीक्षक को शिकायत आवेदन सौंपकर कार्रवाई की मांग की गई है। पदाधिकारियों के अनुसार रायपुर से जगदलपुर, बैलाडीला, कोंटा व भोपालपटनम रूट पर चलने वाली डीलक्स श्रेणी की बसों को परमिट शर्तों के अनुसार 50 किलोमीटर तक सवारी उठाने की अनुमति नहीं है जबकि बस चालक-परिचालक नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। इसके चलते लोकल बस आपरेटर्स को आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है।
गैरकानूनी रूप से चल रही रायपुर की बसें: संघ ने यह भी आरोप लगाए हैं कि रायपुर व दुर्ग से संचालित त्नबस मालिक आपसी प्रतिस्पर्धा के चलते लोकल बसों के समय चक्र के दौरान बसें अंदरूनी मार्गों पर चलाई जा रही हैं। साथ ही महिंद्रा ट्रेवल्स रायपुर द्वारा बिना परमिट के रायपुर से मलकानगिरी, कालीमेला व रायपुर से कालीमेला व्हाया सुकमा रूट पर बिना परमिट वाहन चलाया जा रहा है। स्थानीय बस संचालकों के विरोध जताने पर महिंद्रा ट्रेवल्स के संचालक ने मारपीट की झूठी रिपोर्ट बोधघाट थाने में दर्ज करवाई है। संघ ने एसपी को सौंपे शिकायत में कहा है कि स्थानीय बस संचालक संवेदनशील इलाकों में बस संचालन कर आवागमन की सुविधा उपलब्ध करवा रहे हैं। ऐसी स्थिति में उनके सामने बस संचालन बंद करने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचता है।
पिछले दिनो परिवहन विभाग ने टूरिस्ट परमिट का दुरुपयोग करने वाली 50 से ज्यादा यात्री बसों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 1 लाख 61400 रुपए बतौर जुर्माना वसूल किया। साथ ही परमिट नियमों का उल्लंघन करने वाली 4 बसों को जब्त किया। यह अभियान प्रदेशभर की सभी जिला उडऩदस्ता टीम और चेकपोस्ट में चलाया जा रहा है।
बताया जाता है कि टैक्स चोरी करने और टूरिस्ट परमिट लेकर अंतरराज्यीय बसों का संचालन करने की शिकायत पर यात्री बसों की जांच की गई। इस दौरान पता चला कि ऑपरेटर टूरिस्ट परमिट पर बसों को चला रहे थे। उक्त बसों के परमिट और दस्तावेजों को जब्त कर पंचनामा बनाया गया है। बता दें कि टूरिस्ट परमिट किसी विशेष प्रायोजन के लिए जारी किया जाता है। यात्रियों की सूची, टाइमिंग और परिचालन मार्गों का ब्यौरा देने पर इसे जारी किया जाता है। इसका उपयोग केवल एक बार किया जा सकता है। लेकिन, बस मालिक टैक्स चोरी करने इसका दुरुपयोग कर रहे थे। इसकी शिकायत मिलने पर अभियान शुरू किया गया है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों से दूसरे राज्यों के बीच अंतरराज्जीय समझौते के तहत 300 बसों का संचालन किया जाता है। लेकिन, निर्धारित परमिट से करीब डेढ़ गुुना बसों का संचालन किया जा रहा था। टैक्स चोरी करने के लिए टूरिस्ट परमिट के दस्तावेजों में हेराफेरी और कूटरचना कर संचालन किया जा रहा था।
डी, रविशंकर
अतिरिक्त परिवहन आयुक्त





