छत्तीसगढ़

बीजापुर में 30 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, मंत्री रजवाड़े ने दी बधाई

Shantanu Roy
27 Aug 2025 9:37 PM IST
बीजापुर में 30 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, मंत्री रजवाड़े ने दी बधाई
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Bijapur. बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े की मौजूदगी में बीजापुर जिले में कुल 30 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें से 20 नक्सली इनामी हैं, जिन पर कुल 81 लाख रुपये का इनाम घोषित था। यह आत्मसमर्पण सुशासन सरकार की नवीन पुनर्वास नीति, नियद नेल्ला नार योजना और सुरक्षा बलों की लगातार एवं प्रभावी कार्रवाई का प्रत्यक्ष परिणाम माना जा रहा है।
डबल इंजन सरकार का असर – नक्सलवाद कमजोर, विश्वास मजबूत
मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि यह आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार ने बस्तर की जनता का विश्वास जीता है। इसी विश्वास का परिणाम है कि माओवादी संगठन अब लगातार कमजोर हो रहे हैं और बड़ी संख्या में नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
आत्मसमर्पण कार्यक्रम में सुरक्षा बलों की भूमिका सराही गई
बीजापुर में हुए इस सामूहिक आत्मसमर्पण कार्यक्रम में सुरक्षा बलों की भूमिका की विशेष सराहना की गई। बीजापुर और आसपास के इलाकों में चलाए जा रहे कम्पिंग, एरिया डॉमिनेशन और इंटेलिजेंस ऑपरेशन की वजह से नक्सली संगठन दबाव में हैं। लगातार हो रही मुठभेड़ों और सर्च ऑपरेशनों ने उनके नेटवर्क को कमजोर कर दिया है। सुरक्षा बलों और प्रशासन ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास योजना के लाभ दिलाने का आश्वासन दिया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि जो भी नक्सली मुख्यधारा में शामिल होंगे, उन्हें शिक्षा, रोजगार और आजीविका से जोड़ा जाएगा ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
बस्तर बदल रहा – नक्सलवाद से शांति और विकास की ओर
मंत्री रजवाड़े ने कहा कि बस्तर अब नक्सलवाद की हिंसा और भय के दौर से निकलकर शांति, विश्वास और विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ अब यहां पर्यटन और औद्योगिक निवेश की संभावनाएं भी खुल रही हैं। डबल इंजन सरकार ने मार्च 2026 तक देश को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाने का संकल्प लिया है और इसी दिशा में सतत प्रयास हो रहे हैं। हाल के वर्षों में नक्सली घटनाओं में भारी कमी आई है और बड़ी संख्या में संगठन के सदस्य समर्पण कर मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं।
आत्मसमर्पण करने वालों में कई कुख्यात नक्सली
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में कई कुख्यात शामिल हैं, जो पहले पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमलों में शामिल रहे हैं। इनमें से कुछ ने बारूदी सुरंग विस्फोट और ग्रामीणों की हत्या जैसी घटनाओं को अंजाम दिया था। उन पर पुलिस और सरकार ने लाखों रुपये का इनाम घोषित किया था। अब इन नक्सलियों ने हिंसा छोड़कर समाज और परिवार के साथ शांति से ने का निर्णय लिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि माओवादी संगठन उन्हें बरगला कर हिंसा की राह पर धकेलता है, जबकि सरकार विकास और सम्मान का रास्ता दिखा रही है। प्रशासन का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर हुआ आत्मसमर्पण एक संदेश है कि अब बस्तर की जनता नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्ति चाहती है। आने वाले दिनों में और भी नक्सली आत्मसमर्पण कर सकते हैं।
नक्सलमुक्त बस्तर की ओर बढ़ते कदम
बस्तर संभाग लंबे समय से नक्सली हिंसा से प्रभावित रहा है, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। शिक्षा और सड़क जैसी योजनाओं से युवाओं का भरोसा बढ़ा है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को भी सरकार स्किल डेवलपमेंट, स्वरोजगार और पुनर्वास पैकेज उपलब्ध कराएगी ताकि वे समाज में सकारात्मक योगदान दे सकें। इस सामूहिक आत्मसमर्पण ने एक बार फिर साबित किया है कि छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से बस्तर अब नक्सलवाद की अंधेरी सुरंग से बाहर निकलकर शांति, विश्वास और विकास की नई दिशा की ओर बढ़ रहा है।
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