छत्तीसगढ़

बीजापुर में 87.50 लाख के इनामी 24 हार्डकोर नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

Shantanu Roy
23 May 2025 7:12 PM IST
बीजापुर में 87.50 लाख के इनामी 24 हार्डकोर नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया पुनर्वास नीति की सफलता
Bijapur. बीजापुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में एक बड़ी और ऐतिहासिक घटना सामने आई है। जिले में सक्रिय 24 हार्डकोर नक्सलियों ने शनिवार को आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। इन सभी नक्सलियों पर कुल मिलाकर ₹87 लाख 50 हजार का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वाले 24 नक्सलियों में से 20 के ऊपर अलग-अलग स्तर के इनाम थे, जिनमें ₹50 हजार से लेकर ₹10 लाख तक के इनाम शामिल हैं।
नक्सलवाद से समाज की मुख्यधारा की ओर वापसी
आत्मसमर्पण की इस घटना को छत्तीसगढ़ सरकार की "नवीन आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति – 2025" और "नियद नेल्ला नार योजना" की बड़ी सफलता माना जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से सरकार नक्सल प्रभावित युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने, उन्हें सामाजिक पुनर्वास का अवसर देने और एक सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मौके पर कहा, "यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। यह दर्शाता है कि हमारी नीति और मंशा कितनी कारगर और सकारात्मक दिशा में कार्य कर रही है। हम इन आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास व पुनरुत्थान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।"
लाल आतंक के अंत की ओर बड़ा कदम
मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर वर्ष 2026 तक छत्तीसगढ़ और देश से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि "उनके संकल्प और रणनीति के चलते यह सुनिश्चित है कि मार्च 2026 तक लाल आतंक का समूल नाश हो जाएगा।"
सरकार का सहयोग और सुरक्षा बलों की भूमिका सराहनीय
मुख्यमंत्री ने आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान सुरक्षाबलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि बीजापुर जैसे अतिसंवेदनशील क्षेत्र में लगातार सर्च ऑपरेशन, ग्रामीणों में भरोसा जगाने और संवाद कायम करने का सकारात्मक असर अब दिखने लगा है। सुरक्षाबलों के विश्वास, संयम और रणनीति के परिणामस्वरूप ही इतने बड़ी संख्या में नक्सलियों ने हथियार डालने का निर्णय लिया।
कौन थे ये नक्सली?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में कई ऐसे सदस्य भी शामिल हैं, जो पहले माओवादी संगठनों की "जनताना सरकार", जन मिलिशिया या प्लाटून में कार्यरत थे। इन पर सुरक्षा बलों पर हमले, आईईडी विस्फोट, अपहरण और ग्रामीणों को डराने जैसी कई संगीन वारदातों में शामिल होने के आरोप थे।
इनमें से कुछ कुख्यात नाम निम्नलिखित हैं:
संजू कश्यप (इनामी – ₹10 लाख)
मधु कवासी (इनामी – ₹5 लाख)
सीता पदम (इनामी – ₹3 लाख)
धीरू नेताम (इनामी – ₹1 लाख)
क्या है ‘नियद नेल्ला नार योजना’?
नियद नेल्ला नार योजना छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई एक लोक कल्याणकारी योजना है, जिसका उद्देश्य है नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं को पुनर्वास, कौशल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के साधनों से जोड़ना। इस योजना के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सम्मानजनक पुनर्वास, मासिक भत्ता, स्वरोजगार हेतु वित्तीय सहायता, और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
समापन में मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री साय ने समापन भाषण में कहा, "नक्सलवाद से पीड़ित क्षेत्र अब बदलाव की ओर अग्रसर है। अब बंदूक की जगह किताब, बम की जगह हल, और डर की जगह विकास की बात होगी। हमारी सरकार बस्तर को हिंसा मुक्त और समृद्ध बनाकर ही दम लेगी।" इस कार्यक्रम में बीजापुर के कलेक्टर, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, सुरक्षाबलों के प्रतिनिधि, पुनर्वास विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र में शांति की ओर बढ़ता कदम बताया।
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