छत्तीसगढ़

रायपुर में नशीली सिरप बेचने वालों को 20-20 साल की जेल

Shantanu Roy
29 Oct 2026 6:01 PM IST
रायपुर में नशीली सिरप बेचने वालों को 20-20 साल की जेल
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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में विशेष न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध बिक्री और सप्लाई के मामले में तीन दोषियों को 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही तीनों पर कुल 10 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। यह मामला आमानाका थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने एम्स अस्पताल के गेट नंबर चार के पास ई-रिक्शा से नशीली कफ सिरप बरामद की थी। पुलिस ने केवल स्थानीय स्तर पर बिक्री करने वालों तक जांच सीमित नहीं रखी, बल्कि सप्लाई चेन की जांच करते हुए मुख्य आपूर्तिकर्ता तक पहुंचकर उसे भी गिरफ्तार किया था। प्रभावी विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्यों और अभियोजन के बाद न्यायालय ने तीनों को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई है।
एम्स अस्पताल के पास ई-रिक्शा से बरामद हुई थी नशीली सिरप
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 16 अक्टूबर 2025 को आमानाका थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि जीई रोड, टाटीबंध स्थित एम्स अस्पताल के गेट नंबर चार के पास दो युवक ई-रिक्शा में नशीली कफ सिरप रखकर ग्राहकों की तलाश कर रहे हैं। सूचना के आधार पर उपनिरीक्षक मिनेश्वर बघेल और उनकी टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की। पुलिस ने ई-रिक्शा में मौजूद युवराज सिंह चौहान और वाजिद खान को पकड़कर तलाशी ली। तलाशी के दौरान ई-रिक्शा की पिछली सीट पर रखे बैग से Glankof-T ब्रांड की 40 शीशी कोडीनयुक्त कफ सिरप बरामद हुईं। प्रत्येक शीशी में 100 एमएल सिरप था। इस प्रकार कुल चार लीटर सिरप जब्त की गई, जिसकी कीमत 9 हजार 200 रुपये आंकी गई। दोनों आरोपी सिरप के परिवहन और बिक्री से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। पुलिस ने सिरप के साथ ई-रिक्शा और मोबाइल फोन भी जब्त किए।
पूछताछ में खुला सप्लाई चेन का राज
पुलिस ने युवराज सिंह चौहान और वाजिद खान से पूछताछ की तो नशीली सिरप की आपूर्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने यह सिरप दुर्ग जिले के चरोदा निवासी निहाल सिंह से खरीदी थी। इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाते हुए निहाल सिंह को भी 16 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार कर लिया। इस तरह पुलिस ने स्थानीय स्तर पर नशीली सिरप बेचने वाले आरोपियों के साथ आपूर्ति करने वाले व्यक्ति को भी मामले में शामिल किया।
तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य बने महत्वपूर्ण
मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने जब्त सिरप का न्यायालय के माध्यम से भौतिक सत्यापन और इन्वेंटरी संबंधी प्रक्रिया पूरी कराई। इसके बाद सिरप को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला रायपुर भेजा गया। आरोपियों के मोबाइल नंबरों की सीएएफ (CAF) और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) भी प्राप्त किए गए। इन दस्तावेजों के माध्यम से आरोपियों के आपसी संपर्क और नशीली सिरप की सप्लाई से जुड़े साक्ष्य जुटाए गए। पुलिस ने गवाहों के बयान, जब्ती संबंधी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी विवेचना में शामिल किया। जांच पूरी होने के बाद एनडीपीएस एक्ट की धारा 21(C) और 29 के तहत अभियोग पत्र तैयार कर 1 अप्रैल 2026 को विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।
तीनों दोषियों को 20-20 वर्ष का सश्रम कारावास
विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट, रायपुर श्रीमती किरण थवाईत के न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया। न्यायालय ने युवराज सिंह चौहान को धारा 21(C) और धारा 29 सहपठित धारा 21(C) के तहत प्रत्येक अपराध में 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास और दो-दो लाख रुपये अर्थदंड से दंडित किया। इस प्रकार उस पर कुल चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसी तरह वाजिद खान को भी दोनों अपराधों में 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल चार लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। वहीं, निहाल सिंह को धारा 29 सहपठित धारा 21(C) के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास और दो लाख रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। युवराज सिंह चौहान और वाजिद खान की दोनों मुख्य कारावास सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इस प्रकार तीनों दोषियों पर कुल 10 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
377 दिनों में मामले में आया फैसला
पुलिस के अनुसार, अपराध क्रमांक 340/2025 में 16 अक्टूबर 2025 को मामला दर्ज किया गया था। जांच पूरी होने के बाद 1 अप्रैल 2026 को न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया। 28 अक्टूबर 2026 को जारी सजायाबी वारंट के अनुसार, अपराध दर्ज होने से 377 दिनों और चालान प्रस्तुत होने से 210 दिनों के भीतर प्रकरण में दोषसिद्धि और सजा हुई। रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन में एनडीपीएस मामलों की विवेचना, अभियोजन और न्यायालयीन प्रक्रिया की नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इन पुलिसकर्मियों की रही महत्वपूर्ण भूमिका
इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक मिनेश्वर बघेल, सहायक उपनिरीक्षक प्राणेश्वर वर्मा, आरक्षक दीपक पाण्डेय, गुलशन चौबे और आशीष शुक्ला की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं, आमानाका थाना प्रभारी निरीक्षक सुधांशु बघेल द्वारा चालानी कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार, नशीली सिरप की बरामदगी के साथ उसकी सप्लाई चेन तक पहुंचना, वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाना और प्रभावी अभियोजन इस प्रकरण में महत्वपूर्ण रहा। यह मामला नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ की गई कार्रवाई और न्यायालय में सफल अभियोजन का एक उल्लेखनीय उदाहरण बनकर सामने आया है।
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