छत्तीसगढ़

14 वर्षीय बच्ची दुर्लभ त्वचा रोग से जूझ रही, एम्स रायपुर में दोबारा इलाज शुरू

Shantanu Roy
16 Jun 2026 3:08 PM IST
14 वर्षीय बच्ची दुर्लभ त्वचा रोग से जूझ रही, एम्स रायपुर में दोबारा इलाज शुरू
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Dantewada. दंतेवाड़ा। जिले की 14 वर्षीय बालिका जागेश्वरी एक दुर्लभ त्वचा रोग ‘इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स’ से पीड़ित है, जिसके कारण उसके शरीर की त्वचा पेड़ की छाल जैसी मोटी और कांटों जैसी परतों में बदल गई है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहल के बाद उसे दोबारा एम्स रायपुर में भर्ती कराया गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। जानकारी के अनुसार, जागेश्वरी का जन्म वर्ष 2012 में हुआ था। जन्म के लगभग तीन महीने बाद ही उसके पैरों की त्वचा पर छोटे-छोटे कांटों जैसे उभार दिखाई देने लगे थे। शुरुआत में परिवार को इस बीमारी की जानकारी नहीं थी, जिसके चलते इसे अंधविश्वास और बुरी नजर का असर मानकर झाड़-फूंक और घरेलू उपाय भी किए गए, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।

समय के साथ उसकी स्थिति बिगड़ती गई और पूरे शरीर की त्वचा मोटी, सूखी और कठोर परतों में बदलने लगी। उसकी मां सुबी के अनुसार, बीमारी के कारण बच्ची को सामाजिक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा। आसपास के बच्चे उसे देखकर चिढ़ाते थे, जिससे वह धीरे-धीरे सामाजिक रूप से अलग-थलग हो गई और बाहर खेलना-कूदना भी कम कर दिया। एम्स रायपुर के त्वचा रोग विभाग के प्रमुख डॉ. मृत्युंजय सिंह ने बताया कि जागेश्वरी का पहले भी वर्ष 2019 में इलाज किया गया था, जब उसे लगभग एक महीने तक अस्पताल में भर्ती रखा गया था। उस समय उसकी स्थिति में सुधार हुआ था, लेकिन यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें समय-समय पर दोबारा गंभीरता बढ़ सकती है।

डॉक्टरों के अनुसार, इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स एक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग है, जिसमें त्वचा अत्यधिक सूखी होकर मोटी परतों में बदल जाती है और कई जगहों पर दरारें भी पड़ सकती हैं। यह बीमारी जानलेवा नहीं होती, लेकिन इससे मरीज का सामान्य जीवन काफी प्रभावित होता है। इस बीमारी का स्थायी इलाज फिलहाल उपलब्ध नहीं है, लेकिन नियमित चिकित्सा, दवाओं और विशेष देखभाल के माध्यम से इसके लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। फिलहाल जागेश्वरी का एम्स रायपुर में इलाज जारी है और डॉक्टरों की टीम उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। परिवार को उम्मीद है कि इस बार भी इलाज से उसकी हालत में सुधार आएगा और उसे बेहतर जीवन मिल सकेगा। यह मामला दुर्लभ बीमारियों के प्रति जागरूकता और समय पर इलाज की आवश्यकता को भी उजागर करता है।
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