छत्तीसगढ़

साइबर जागृति अभियान में 1298 विद्यार्थियों ने सीखे डिजिटल सुरक्षा के गुर

Shantanu Roy
26 Aug 2026 12:37 AM IST
साइबर जागृति अभियान में 1298 विद्यार्थियों ने सीखे डिजिटल सुरक्षा के गुर
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Mungeli. मुंगेली। ऑनलाइन ठगी और तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों से बच्चों एवं युवाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से मुंगेली पुलिस ने लोरमी के मानस भवन में साइबर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की। साइबर जागृति अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्र के सात प्रमुख विद्यालयों के 1,298 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने विद्यार्थियों को बैंकिंग ठगी, फर्जी लिंक, सोशल मीडिया अपराध और ऑनलाइन प्रलोभन से बचने के उपाय बताए।
मानस भवन लोरमी में 25 अगस्त 2026 को आयोजित कार्यक्रम में शासकीय और अर्धशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के साथ शिक्षक, ग्राम कोटवार और पुलिस अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित उपयोग की जानकारी देना और उनके जरिए साइबर सुरक्षा का संदेश परिवार तथा समाज तक पहुंचाना था।
कार्यशाला में स्वामी आत्मानंद स्कूल लोरमी, सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल लोरमी, मां भारती स्कूल लोरमी, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लोरमी, महाराणा प्रताप स्कूल लोरमी, डीएससी स्कूल लोरमी और न्यू जनरेशन स्कूल लोरमी के विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यालयों के प्राचार्य और शिक्षक भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने कहा कि मोबाइल फोन और इंटरनेट वर्तमान समय में शिक्षा, संवाद, बैंकिंग और मनोरंजन का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। डिजिटल सेवाओं ने कई काम आसान किए हैं, लेकिन थोड़ी सी असावधानी आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए इंटरनेट का उपयोग करते समय प्रत्येक व्यक्ति को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
एसएसपी ने विद्यार्थियों को बैंकिंग और ओटीपी धोखाधड़ी से बचने के लिए आवश्यक सावधानियां बताईं। उन्होंने कहा कि बैंक खाते का विवरण, एटीएम पिन, यूपीआई पिन, पासवर्ड और ओटीपी किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए। बैंक अथवा अन्य विश्वसनीय संस्था का कर्मचारी बताकर फोन करने वाले व्यक्ति को भी गोपनीय जानकारी नहीं दी जानी चाहिए।
विद्यार्थियों को बताया गया कि साइबर अपराधी कई बार लॉटरी, पुरस्कार, कम कीमत में महंगा सामान, पार्ट-टाइम नौकरी या घर बैठे कमाई का प्रलोभन देकर लोगों को फंसाते हैं। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप, ई-मेल और एसएमएस पर प्राप्त होने वाले संदिग्ध लिंक पर बिना जांच किए क्लिक नहीं करना चाहिए। किसी अनजान वेबसाइट या मोबाइल एप्लीकेशन पर अपनी निजी और बैंकिंग जानकारी दर्ज करने से भी बचना चाहिए।
कार्यशाला में सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विद्यार्थियों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, घर का पता, मोबाइल नंबर, स्कूल की जानकारी, निजी तस्वीरें और वर्तमान लोकेशन अनजान लोगों के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी गई। सोशल मीडिया अकाउंट की सुरक्षा बढ़ाने के लिए मजबूत पासवर्ड रखने और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करने को कहा गया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, ऑनलाइन दोस्ती, फोटो का दुरुपयोग और धमकी जैसे मामलों में डरने या बात छिपाने के बजाय तुरंत माता-पिता, शिक्षक या पुलिस को जानकारी देनी चाहिए। समय पर शिकायत करने से अपराधी की पहचान करने और नुकसान को रोकने में सहायता मिल सकती है। बच्चों को ऑनलाइन गेम और अनजान लोगों से होने वाली बातचीत में भी सतर्क रहने की समझाइश दी गई।
एसएसपी भोजराम पटेल ने साइबर ठगी होने पर त्वरित शिकायत के महत्व की जानकारी देते हुए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तत्काल संपर्क करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होने पर समय गंवाए बिना हेल्पलाइन, नजदीकी पुलिस थाना या साइबर सेल को सूचना दी जानी चाहिए। समय पर सूचना मिलने से ठगी की रकम को रोकने के लिए जरूरी कार्रवाई की जा सकती है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने सोशल मीडिया सुरक्षा, फर्जी कॉल, ऑनलाइन गेम, बैंकिंग ठगी और संदिग्ध लिंक से जुड़े सवाल पूछे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का सरल एवं व्यावहारिक तरीके से समाधान किया। बच्चों को वास्तविक जीवन में सामने आने वाली परिस्थितियों के उदाहरण देकर सुरक्षित डिजिटल व्यवहार की जानकारी दी गई।
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