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तेल कंपनियों को 25 साल के लिए मिलेगी जमीन
पटना: बिहार सरकार ने कचरा प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य के चार बड़े शहरों में अब गीले और जैविक कचरे से बायोगैस (CBG) तैयार की जाएगी। इसके लिए सरकार ने तेल और गैस कंपनियों को 25 साल के लिए जमीन उपलब्ध कराने का फैसला किया है। इस पहल से जहां शहरों में कचरे की समस्या कम होगी, वहीं स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
राज्य सरकार के फैसले के अनुसार गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और बिहारशरीफ में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट लगाए जाएंगे। इन प्लांटों के लिए संबंधित तेल कंपनियों को करीब 10-10 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। जमीन का उपयोग 25 वर्षों की अवधि के लिए किया जाएगा।
कचरे से तैयार होगी स्वच्छ ऊर्जा
शहरों से निकलने वाले गीले कचरे में बड़ी मात्रा में जैविक पदार्थ मौजूद होते हैं। इसी कचरे का इस्तेमाल अब बायोगैस बनाने में किया जाएगा। प्लांट में कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस कर गैस तैयार की जाएगी, जिसका इस्तेमाल ईंधन के रूप में किया जा सकेगा।
इस परियोजना से कचरे को बोझ मानने के बजाय संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में मदद मिलेगी। डंपिंग यार्ड पर बढ़ते कचरे का दबाव कम होगा और पर्यावरण को भी फायदा पहुंचेगा।
तेल कंपनियां लगाएंगी प्लांट
सरकार की योजना के तहत इंडियन ऑयल, गेल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी कंपनियां इन शहरों में CBG प्लांट स्थापित करेंगी। कंपनियां प्लांट निर्माण, संचालन और गैस उत्पादन की प्रक्रिया संभालेंगी। भागलपुर में HPCL को प्लांट लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। यहां करीब 139 करोड़ रुपये की लागत से CBG प्लांट स्थापित करने की योजना है। प्लांट में नगर निगम क्षेत्र से निकलने वाले कचरे का इस्तेमाल किया जाएगा।
शहरों को मिलेगी कचरा प्रबंधन में राहत
बिहार के बड़े शहरों में कचरा निपटान लंबे समय से चुनौती बना हुआ है। बढ़ते शहरीकरण के कारण रोजाना बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है। ऐसे में कचरे से ऊर्जा बनाने की यह पहल नगर निकायों के लिए राहत साबित हो सकती है। CBG प्लांट शुरू होने के बाद कचरे के निपटारे के साथ-साथ जैविक खाद जैसे उत्पाद भी तैयार किए जा सकेंगे। इससे किसानों और स्थानीय लोगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम
बायोगैस उत्पादन से पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही कार्बन उत्सर्जन घटाने और स्वच्छ पर्यावरण बनाने में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में कचरे से ऊर्जा उत्पादन की ऐसी योजनाओं को और बढ़ावा दिया जाए। इससे स्वच्छ बिहार अभियान को भी मजबूती मिलेगी।
रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे
इन प्लांटों के निर्माण और संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। कचरा संग्रहण, प्रबंधन और प्लांट संचालन से जुड़े कई क्षेत्रों में लोगों को काम मिल सकता है। बिहार सरकार की यह पहल स्वच्छता, ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने वाली योजना के रूप में देखी जा रही है। आने वाले वर्षों में यह मॉडल राज्य के अन्य शहरों में भी लागू किया जा सकता है।
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