बिहार

202 नालों का पानी जैविक उपचार के बाद नदियों में गिरेगा

Admindelhi1
6 April 2024 6:53 AM GMT
202 नालों का पानी जैविक उपचार के बाद नदियों में गिरेगा
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कैबिनेट की स्वीकृति के बाद नगर निकायों को नालों के पानी के जैविक उपचार की जिम्मेवारी दी गई

पटना: राज्य के 202 नालों का पानी जैविक उपचार के बाद ही नदियों में गिरेगा. इस पर 474 करोड़ रुपये खर्च होंगे. कैबिनेट की स्वीकृति के बाद नगर निकायों को नालों के पानी के जैविक उपचार की जिम्मेवारी दी गई है.

दरअसल, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने नदियों में नालों का पानी छोड़ने से उसके उपचार (ट्रीटमेंट) का आदेश दिया है. इसी के बाद बायोरेमेडिएशन विधि (जैविक उपचार) से नालों के पानी का उपचार किया जा रहा है. पहले से राज्य के 57 शहरों के 173 नालों के दूषित जल का उपचार हो रहा है. अब इसकी संख्या बढ़ा दी गई है. जिन नालों के पानी का पहले से उपचार चल रहा है, उसके लिए 171 करोड़ 64 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं. इस वित्तीय वर्ष में 12 तक करीब 155 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं. वहीं, 33 अन्य नालों के दूषित जल का उपचार पर 33 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे.

एनजीटी लगा चुका है फटकार : सीवेज का गंदा पानी उपचारित किये बगैर गंगा सहित अन्य नदियों में प्रवाहित किये जाने के मामले में एनजीटी के आदेश का पालन नहीं होने पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नवंबर 2019 से 31 जनवरी 2022 तक की अवधि के लिए 667.30 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति दंड लगाया था. उसके बाद बिहार सरकार ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और सीवरेज नेटवर्क का कार्य पूरा होने तक नालों के जैविक उपचार की व्यवस्था की है.

प्रदूषण से बचाव: राज्य के शहरों में नालों के पानी के उपचार का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे नदियों का पानी प्रदूषित होने से बचेगा. नदियों का पानी नहरों के जरिए सिंचाई के उपयोग में भी आता है. इसके अलावा शहर के आसपास का भूगर्भ जल भी स्वच्छ रहेगा.

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