बिहार

जमुई में छात्रा से छेड़छाड़ पर बवाल सरकार ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा

Ratna Netam
23 Sept 2026 6:04 PM IST
जमुई में छात्रा से छेड़छाड़ पर बवाल सरकार ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा
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पटना। बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा और उसके साथी के साथ कथित छेड़छाड़ और मारपीट की घटना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया जारी है। बुधवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने घटना को दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार कानून का राज कायम रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
जमुई की यह घटना 19 सितंबर की शाम की बताई गई है। पुलिस के मुताबिक दो स्कूली छात्र-छात्रा बाहर गए थे, जहां कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया। सामने आए वीडियो में छात्र के साथ मारपीट और छात्रा के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार दिखाई दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मामला सामने आया और व्यापक नाराजगी देखने को मिली।
विजय कुमार सिन्हा ने पटना में पत्रकारों से बातचीत में घटना पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी आपराधिक और नकारात्मक प्रवृत्ति को रोकने के लिए कानून के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी प्रयास किए जाने की जरूरत है। उन्होंने चरित्र निर्माण, सामाजिक सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देने की बात कही। सरकार की ओर से कहा गया कि कानून हाथ में लेने या महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों को संरक्षण नहीं दिया जाएगा।
घटना सामने आने के बाद जमुई पुलिस ने जांच तेज कर दी। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। शुरुआती कार्रवाई में तीन नाबालिग आरोपियों को पकड़ा गया था। पुलिस ने सोशल मीडिया पर पीड़ितों की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को हटाने की कार्रवाई भी शुरू की।
मामले में बाद में दो प्रमुख आरोपियों को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दौरान एक आरोपी नंदन यादव के पैर में गोली लगी, जबकि दूसरा आरोपी भागने की कोशिश के दौरान घायल हुआ। 23 सितंबर तक इस मामले में तीन नाबालिगों समेत पांच लोगों को पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है।
घटना को लेकर बिहार में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार से सवाल किए हैं, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं का कहना है कि पुलिस कार्रवाई यह दिखाती है कि आरोपियों को बख्शा नहीं जा रहा है। इस बीच भाजपा से जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने भी जमुई में विरोध मार्च निकालकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और छात्राओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
जमुई की विधायक और बिहार सरकार की मंत्री श्रेयसी सिंह ने भी घटना की निंदा की है। उनके एक बयान में इस्तेमाल किए गए “मोरल पुलिसिंग” संबंधी शब्दों को लेकर विवाद खड़ा हुआ, जिसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी को संदर्भ से अलग करके देखा गया और उनका उद्देश्य किसी गैरकानूनी कार्रवाई को सही ठहराना नहीं था। उन्होंने न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करने की बात कही।
राज्य महिला आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया है। आयोग की ओर से घटना की निंदा करते हुए पीड़िता से मुलाकात कर पूरी जानकारी लेने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई है। पुलिस की जांच में वायरल वीडियो को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में देखा जा रहा है और इसके आधार पर अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा के सवाल को चर्चा में ला दिया है। खास तौर पर घटना का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने को लेकर भी चिंता जताई गई है। पुलिस ने ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है जिन्होंने नाबालिग पीड़ितों की पहचान उजागर करने वाली सामग्री साझा की।
सरकार की ओर से फिलहाल संदेश दिया जा रहा है कि मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं विपक्ष कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है। जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही आरोपियों की भूमिका तथा घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की स्थिति और स्पष्ट होगी।
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