बिहार

खरगे के कार्यक्रम में हंगामा, पीएम मोदी के पिता पर टिप्पणी से विवाद

Rajeshwari Nishad
25 Oct 2026 5:04 PM IST
खरगे के कार्यक्रम में हंगामा, पीएम मोदी के पिता पर टिप्पणी से विवाद
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पटना। बिहार की राजधानी पटना में रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को बिहार केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोला। बापू सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में खरगे ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे उठाते हुए देशव्यापी आंदोलन की जरूरत बताई। उन्होंने इस लड़ाई को ‘आजादी की दूसरी लड़ाई’ करार दिया।
यह कार्यक्रम बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। समारोह में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी को बिहार में पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों और संगठन को मजबूत करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता को लेकर खरगे की कथित टिप्पणी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
BJP और RSS पर खरगे का हमला
समारोह को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने भाजपा और आरएसएस की राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर चिंताएं हैं।
खरगे ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुद्दा उठाया और इसे लेकर देशभर में आंदोलन करने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाताओं के अधिकारों और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता की रक्षा करना जरूरी है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने संबोधन में इन मुद्दों को केवल किसी एक राजनीतिक दल की लड़ाई तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने केंद्र सरकार और भाजपा-आरएसएस की नीतियों की आलोचना करते हुए विपक्षी दलों और लोगों से इस मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया।
‘आजादी की दूसरी लड़ाई’ का दिया नारा
खरगे ने अपने भाषण में चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर व्यापक आंदोलन की जरूरत पर जोर दिया। इसी क्रम में उन्होंने इसे ‘आजादी की दूसरी लड़ाई’ बताया। उनके इस बयान को केंद्र सरकार के खिलाफ कांग्रेस के राजनीतिक अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है।
कांग्रेस लंबे समय से मतदाता सूची, चुनावी पारदर्शिता और कथित वोट चोरी के मुद्दों को लेकर भाजपा पर सवाल उठाती रही है। पार्टी इन मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर जनसमर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। खरगे का पटना में दिया गया बयान इसी राजनीतिक रुख को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
विपक्ष का तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकार लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। वहीं, इन मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार जारी हैं।
बिहार केसरी श्रीकृष्ण सिंह की विरासत को किया याद
समारोह का मुख्य उद्देश्य बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की जयंती मनाना था। उन्हें बिहार केसरी और श्रीबाबू के नाम से भी जाना जाता है। बिहार के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में उनका महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
कांग्रेस नेताओं ने श्रीकृष्ण सिंह के योगदान को याद करते हुए बिहार के विकास, सामाजिक न्याय और जमींदारी प्रथा समाप्त करने की दिशा में उनके प्रयासों का उल्लेख किया। पार्टी के लिए यह आयोजन अपने ऐतिहासिक राजनीतिक नेतृत्व और विचारधारा को दोबारा सामने रखने का अवसर भी बना।
इस समारोह के आयोजन में राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी भी कार्यक्रम का हिस्सा रही। पार्टी ने इस आयोजन के जरिए राज्य में अपनी राजनीतिक सक्रियता और संगठनात्मक मजबूती का संदेश देने की कोशिश की।
बिहार में कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर भी नजर
बिहार में कांग्रेस के सामने संगठन को मजबूत करने और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाने की चुनौती है। ऐसे में श्रीकृष्ण सिंह की जयंती पर राष्ट्रीय अध्यक्ष का संबोधन पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा।
पार्टी इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए अपने पुराने राजनीतिक संबंधों, सामाजिक न्याय के एजेंडे और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को सामने रखना चाहती है। समारोह में खरगे का भाजपा और आरएसएस पर हमला भी इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है।
हालांकि, भाषण में उठाए गए आरोपों और चुनावी अनियमितताओं के दावों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के विचार अलग हो सकते हैं। इन दावों का मूल्यांकन संबंधित तथ्यों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर किया जाना चाहिए।
कथित टिप्पणी को लेकर पुष्टि जरूरी
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्ष में बात कहे जाने के बाद खरगे द्वारा उनके पिता को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का दावा भी सामने आया है। हालांकि, इस विशेष घटनाक्रम और टिप्पणी की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं हो सकी है। इसलिए इसे पुष्ट घटना के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
फिलहाल, समारोह से जुड़ी सत्यापित रिपोर्टों में खरगे के भाजपा और आरएसएस पर हमले, SIR के विरोध में देशव्यापी आंदोलन के आह्वान और इसे ‘आजादी की दूसरी लड़ाई’ बताए जाने पर जोर है।
कुल मिलाकर, पटना में श्रीकृष्ण सिंह की जयंती का समारोह कांग्रेस के लिए श्रद्धांजलि कार्यक्रम के साथ-साथ राजनीतिक संदेश देने का मंच भी बना। खरगे ने लोकतंत्र, मतदाता अधिकार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उनके बयान के बाद बिहार की राजनीति में इस मुद्दे पर बहस आगे बढ़ने की संभावना है।
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