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Bareilly बरेली। उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड का ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) विरोध कर रहा है। इस पर मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने शनिवार को अपनी प्रतिक्रिया देते हुए यूसीसी को मुसलमानों के खिलाफ बताया और बोर्ड का समर्थन किया। मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "उत्तराखंड की हुकुमत ने यूसीसी लागू किया, उसके बाद गुजरात में भी यह लागू किया गया। अब असम के चुनाव में यह मुद्दा बहुत अहम हो गया। खुद वहां के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ऐलान करते हैं कि असम में चुनाव जीतने के बाद यूसीसी लागू किया जाएगा। मुसलमान यूसीसी को कभी मंजूर नहीं करेंगे। एआईएमपीएलबी ने जो कहा है, मैं उसका समर्थन करता हूं।"
उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर कहा, "बंगाल की आवाम बदलाव चाहती है। वहीं, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी खुद पार्टी लाइन से हटकर बात कर रहे हैं। वह भाजपा का खौफ और डर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि जनता विकास के नाम पर वोट देना चाहती है। वह चाहती है कि 15 साल तक ममता बनर्जी को मौका दिया गया, अब बदलाव होना चाहिए। पूरे 15 साल ममता बनर्जी ने जो कार्य किए हैं, उस कार्य को लेकर वहां की आवाम संतुष्ट नहीं है, इसलिए वह बदलाव चाहती है।
मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने कहा, "मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घुसपैठ को लेकर जो भी बयान दिया है, वह बिल्कुल गलत है। मैं उनके बयान से सहमत नहीं हूं। 1971 में जब भारत और पाकिस्तान में जंग हुई और बांग्लादेश बनाया, उसमें भारत की खास भूमिका थी। उस दौरान कई सारे लोग भारत आए, जिन्हें नई पहचान दी गई। बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्हें यहां पर नागरिकता दी गई है। उन्होंने आगे कहा, "पीलीभीत में बहुत सारे ऐसे गांव हैं, जहां पर लोगों को सीएए के कानून के अधीन राष्ट्रीयता दी गई। उन्हें मकान दिए गए, जमीनें दी गईं, राशन कार्ड और पहचान पत्र बनवाए गए और भारत की नागरिकता दी गई। क्या सिर्फ मुसलमान ही बांग्लादेश से भारत में आए? ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। हिंदू और मुसलमान दोनों समुदाय के लोग भारत आए। सीएम योगी ने जो बयान दिया है, उसका मकसद पक्षपात करना है।"
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