
खगड़िया। बिहार के खगड़िया जिले में बाढ़ के पानी में डूबने से दो सगे भाइयों की दर्दनाक मौत हो गई। घटना परबत्ता प्रखंड क्षेत्र के अकहा और भरसो गांव के बीच स्थित बंध कट्टा के पास हुई। दोनों नाबालिग भाई बाढ़ के पानी में स्नान करने गए थे। इसी दौरान वे गहरे पानी और तेज बहाव की चपेट में आ गए। स्थानीय गोताखोरों ने काफी मशक्कत के बाद दोनों के शव पानी से बाहर निकाले।
मृतकों की पहचान परबत्ता प्रखंड की कोलवारा पंचायत के तेलिया बथान गांव निवासी एतबारी मंडल के 15 वर्षीय पुत्र गोविंद कुमार और 13 वर्षीय पुत्र जय कुमार के रूप में हुई है। एक ही परिवार के दो बेटों की एक साथ मौत की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों भाई अकहा और भरसो गांव के बीच बंध कट्टा के समीप बाढ़ के पानी में स्नान करने गए थे। इलाके में बाढ़ का पानी फैला होने के कारण उसकी गहराई का सही अनुमान लगाना मुश्किल था। स्नान के दौरान दोनों अचानक गहरे पानी में चले गए और तेज बहाव में फंस गए। खुद को बचाने की कोशिश के बावजूद वे पानी से बाहर नहीं निकल सके।
दोनों भाइयों को डूबता देखकर आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाया। आवाज सुनकर बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए। कुछ लोगों ने अपने स्तर पर दोनों को खोजने का प्रयास किया लेकिन गहराई और तेज बहाव के कारण सफलता नहीं मिली। इसके बाद स्थानीय गोताखोरों को बुलाया गया।
गोताखोरों ने पानी में उतरकर खोज अभियान शुरू किया। बाढ़ का पानी और तेज बहाव होने से तलाश में काफी परेशानी हुई। लंबी मशक्कत के बाद दोनों भाइयों को पानी से बाहर निकाला गया लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। दोनों के शव बाहर आते ही घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बीच मातम छा गया।
घटना की सूचना मिलते ही मृतकों के परिजन भी मौके पर पहुंचे। अपने दोनों बेटों के शव देखकर परिवार के लोग बेसुध हो गए। आसपास के ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने उन्हें संभालने का प्रयास किया। एक साथ दो बच्चों की मौत ने परिवार को गहरा सदमा दिया है। गांव के लोग भी घटना से स्तब्ध हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार बाढ़ के कारण इलाके के कई निचले हिस्सों में पानी जमा है। खेत रास्ते और गड्ढे पानी में डूब जाने के कारण उनकी वास्तविक गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। जहां सामान्य दिनों में कम पानी रहता है वहां बाढ़ के दौरान तेज धारा और अधिक गहराई जानलेवा साबित हो सकती है।
बंध कट्टा के पास हुई इस घटना ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। बाढ़ के पानी में स्नान करना बेहद जोखिम भरा होता है। पानी की सतह सामान्य दिखाई देने के बावजूद नीचे गड्ढे दलदल झाड़ियां और तेज धार हो सकती है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे अक्सर खेलने या स्नान करने के लिए नदी तालाब और बाढ़ से भरे स्थानों पर चले जाते हैं। कई बार परिवार के सदस्यों को इसकी जानकारी भी नहीं होती। इस घटना के बाद अभिभावकों से बच्चों को बाढ़ के पानी के पास अकेले नहीं जाने देने की अपील की जा रही है। ग्रामीणों को भी ऐसे खतरनाक स्थानों की पहचान कर बच्चों को वहां जाने से रोकना चाहिए।
स्थानीय प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों के लिए भी संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाने की जरूरत है। गहरे पानी और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में रस्सी या अस्थायी अवरोध लगाए जा सकते हैं। गांवों में मुनादी कर लोगों को बाढ़ के पानी में स्नान नहीं करने की चेतावनी दी जा सकती है। इससे भविष्य में होने वाली ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय गोताखोरों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। इस घटना में सूचना मिलते ही गोताखोरों ने पानी में उतरकर दोनों भाइयों की तलाश की। हालांकि उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। ऐसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित आपदा मित्रों जीवनरक्षक उपकरणों नाव रस्सी और लाइफ जैकेट की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
बाढ़ के दौरान सबसे अधिक खतरा बच्चों बुजुर्गों और तैरना नहीं जानने वाले लोगों को रहता है। पानी से भरे रास्तों को पार करते समय भी हादसे हो सकते हैं। प्रशासन की ओर से लोगों को सुरक्षित रास्तों की जानकारी देने और खतरनाक स्थानों पर आवागमन रोकने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
घटना के बाद संबंधित अधिकारियों को सूचना दिए जाने की बात सामने आई है। दोनों शवों को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के लिए भेजे जाने की संभावना है। हालांकि प्रशासनिक कार्रवाई पोस्टमार्टम और पीड़ित परिवार को मिलने वाली संभावित सहायता के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
गोविंद कुमार और जय कुमार की मौत से तेलिया बथान गांव का माहौल गमगीन है। दोनों भाइयों के साथ पढ़ने और खेलने वाले बच्चे भी घटना से सदमे में हैं। आसपास के लोग पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर सांत्वना दे रहे हैं। एक ही परिवार के दो नाबालिग बच्चों की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है।
बाढ़ से होने वाला नुकसान केवल घरों खेतों और सड़कों तक सीमित नहीं रहता। जलभराव और तेज बहाव के कारण डूबने की घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए बाढ़ के दिनों में सावधानी और सामुदायिक निगरानी बेहद जरूरी है। बच्चों को पानी के पास जाने से रोकना और किसी दुर्घटना की स्थिति में तुरंत प्रशिक्षित बचाव दल को सूचना देना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
फिलहाल दोनों भाइयों की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से बाढ़ प्रभावित और गहरे पानी वाले स्थानों की पहचान कर सुरक्षा उपाय करने की मांग की है। यह हादसा एक बार फिर चेतावनी देता है कि बाढ़ के पानी को सामान्य जलभराव समझना जानलेवा हो सकता है।





