बिहार

गंगा में टकराए दो बड़े जहाज, यात्रियों में मची अफरा-तफरी

Rajeshwari Nishad
4 Nov 2026 11:15 PM IST
गंगा में टकराए दो बड़े जहाज, यात्रियों में मची अफरा-तफरी
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भागलपुर। बिहार के भागलपुर में गंगा नदी के बीच यात्रियों से भरे दो बड़े जहाजों के टकराने की घटना सामने आई है। नवगछिया के जाह्नवी चौक घाट और भागलपुर के बीच संचालित यात्री जहाजों के अचानक आमने-सामने आने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। दोनों जहाजों के संपर्क में आते ही यात्रियों में डर फैल गया और कुछ देर तक चीख-पुकार की स्थिति बनी रही। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी यात्री के गंभीर रूप से घायल होने या नदी में गिरने की सूचना नहीं मिली है।
घटना के बाद गंगा नदी में संचालित यात्री जहाजों की सुरक्षा व्यवस्था और उनके परिचालन की निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, घटना जहाज के मुड़ने के दौरान हुई। दोनों जहाज काफी करीब आ गए, जिससे उनके बीच टक्कर की स्थिति बनी।
बीच गंगा में अचानक करीब आ गए दोनों जहाज
जानकारी के अनुसार, एक यात्री जहाज जाह्नवी चौक घाट से यात्रियों को लेकर नवगछिया के बियाडा घाट की ओर जा रहा था। इसी दौरान दूसरा जहाज भी जलमार्ग पर परिचालन कर रहा था।बताया जा रहा है कि जहाजों के मुड़ने के दौरान दोनों एक-दूसरे के काफी करीब पहुंच गए। इसके बाद उनके बीच टक्कर हो गई।घटना के समय जहाजों पर दर्जनों यात्री मौजूद बताए जा रहे हैं। अचानक हुई इस घटना से यात्रियों में घबराहट फैल गई।नदी के बीच जहाजों का टकराना किसी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता था। हालांकि, इस घटना में जहाजों के पलटने या किसी व्यक्ति के पानी में गिरने की खबर नहीं है।
यात्रियों में मची चीख-पुकार
दोनों जहाजों के आपस में टकराने से यात्रियों के बीच कुछ देर के लिए भय का माहौल बन गया।गंगा नदी की बीच धारा में यात्रा कर रहे लोगों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक थी। जहाजों पर सवार यात्रियों को अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी।घटना के दौरान किसी यात्री के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं मिली है। इससे एक बड़ी अनहोनी टल गई।हालांकि, इस तरह की घटनाएं जलमार्ग से यात्रा करने वाले लोगों के भरोसे को प्रभावित कर सकती हैं। खासकर उन यात्रियों के लिए चिंता बढ़ जाती है, जो रोजमर्रा के कामकाज के लिए जहाज सेवा पर निर्भर हैं।
विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद बढ़ी जहाजों पर निर्भरता
भागलपुर और नवगछिया के बीच गंगा नदी पार करने के लिए जहाज सेवा महत्वपूर्ण परिवहन माध्यम बन गई है।दरअसल, विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने और मरम्मत कार्य के कारण सड़क मार्ग से आवागमन प्रभावित हुआ है।इसके बाद प्रशासन ने लोगों की आवाजाही बनाए रखने के लिए गंगा नदी में यात्री जहाजों और अन्य जल परिवहन सेवाओं की व्यवस्था की है।इन जहाजों के जरिए बड़ी संख्या में यात्री एक घाट से दूसरे घाट तक पहुंच रहे हैं।अक्टूबर की शुरुआत में विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद वैकल्पिक जल परिवहन सेवा शुरू की गई थी। प्रशासन ने यात्री सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात कही थी।अब दो जहाजों के टकराने की घटना ने इस व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक ही जलमार्ग पर चल रहे दोनों जहाज अचानक इतने करीब कैसे पहुंच गए।क्या जहाजों के संचालन के दौरान आपसी संपर्क और मार्ग निर्धारण की पर्याप्त व्यवस्था थी? क्या चालकों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे? क्या घाटों से जहाजों के रवाना होने और पहुंचने का समय उचित तरीके से निर्धारित था?इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों और प्रशासन की जांच से स्पष्ट हो सकेगा।जल परिवहन में यात्रियों की सुरक्षा के लिए जहाजों की तकनीकी स्थिति, क्षमता, परिचालन व्यवस्था और चालक दल का प्रशिक्षण महत्वपूर्ण होता है।विशेष रूप से नदी में तेज बहाव या सीमित दृश्यता की स्थिति में जहाजों के संचालन के दौरान अतिरिक्त सतर्कता आवश्यक होती है।हालांकि, इस घटना के पीछे तेज बहाव, तकनीकी खराबी या चालक की लापरवाही में से किस कारण की भूमिका थी, इसकी
आधिकारिक
पुष्टि नहीं हुई है।
प्रशासन पहले ही जारी कर चुका है सुरक्षा दिशानिर्देश
भागलपुर जिला प्रशासन ने हाल ही में गंगा नदी में संचालित जहाजों और नावों की सुरक्षा को लेकर दिशानिर्देश जारी किए थे।अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में प्रशासन ने जल परिवहन के सुरक्षित संचालन के लिए 12 दिशा-निर्देश निर्धारित किए थे।जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय के नेतृत्व में घाटों की व्यवस्था का निरीक्षण भी किया गया था।प्रशासन ने बियाडा घाट, जाह्नवी चौक घाट और अन्य स्थानों पर यात्रियों के चढ़ने-उतरने के दौरान निगरानी रखने तथा सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए थे।इसके बावजूद जहाजों के करीब आने और टकराने जैसी घटना सामने आना सुरक्षा नियमों के प्रभावी पालन को लेकर सवाल खड़े करता है।
पहले भी सामने आ चुकी है जहाजों की टक्कर की घटना
भागलपुर में यात्री जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता पहली बार सामने नहीं आई है।सात अक्टूबर 2026 को भी बियाडा घाट के पास गंगा नदी में दो यात्री जहाजों की टक्कर हुई थी। उस घटना में किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की सूचना नहीं थी।उस समय भी जहाज परिचालन की व्यवस्था और यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठे थे।ऐसे में ताजा घटना के बाद सुरक्षा उपायों की समीक्षा की जरूरत और बढ़ गई है।
यात्रियों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
भागलपुर और नवगछिया के बीच जहाज सेवा स्थानीय लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।इस मार्ग से कामकाजी लोगों, छात्रों, व्यापारियों और अन्य यात्रियों का आवागमन होता है।जब तक सड़क मार्ग से यातायात पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाता, तब तक बड़ी संख्या में लोगों को जल परिवहन पर निर्भर रहना पड़ सकता है।ऐसी स्थिति में जहाजों की क्षमता से अधिक यात्रियों को सवार नहीं करना, पर्याप्त जीवनरक्षक जैकेट उपलब्ध कराना और सुरक्षित परिचालन सुनिश्चित करना जरूरी है।साथ ही जहाजों के प्रस्थान और आगमन के दौरान बेहतर तालमेल रखना भी आवश्यक है।
बड़ी दुर्घटना टली, जांच की आवश्यकता
गंगा नदी के बीच दो जहाजों की टक्कर में किसी यात्री को गंभीर चोट नहीं पहुंचने की खबर राहत देने वाली है।लेकिन यह घटना जल परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चेतावनी भी है।प्रशासन के लिए आवश्यक होगा कि जहाजों के संचालन से जुड़ी परिस्थितियों की समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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