
Jharkhand: Magadh University: मगध विश्वविद्यालय में बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) के माध्यम से नियुक्त नए असिस्टेंट प्रोफेसरों के अनुभव प्रमाणपत्रों की सघन जांच शुरू कर दी गई है। इस जांच के दौरान जब तक सत्यापन पूरा नहीं हो जाता, तब तक सभी नए शिक्षकों के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है। इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय में शिक्षकों के बीच असंतोष और चिंता का माहौल बन गया है।
यह पूरा मामला कुछ असफल अभ्यर्थियों द्वारा की गई शिकायत के बाद सामने आया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कई चयनित उम्मीदवारों ने फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों के आधार पर मेरिट सूची में जगह बनाई है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उच्च शिक्षा विभाग और आयोग ने तत्काल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
वेतन पर रोक से बढ़ी मुश्किलें
जांच प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही सभी नवनियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसरों के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है। फिलहाल इन शिक्षकों को स्थायी रूप से नियुक्त भी नहीं माना जा रहा है, क्योंकि उनके दस्तावेजों की अंतिम पुष्टि अभी बाकी है। इस कारण कई शिक्षक आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं।
स्पेशल कमेटी कर रही जांच
मगध विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष समिति (स्पेशल कमेटी) का गठन किया है। यह कमेटी शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत अनुभव प्रमाणपत्रों को संबंधित शिक्षण संस्थानों को भेजकर सत्यापन करवा रही है।
हालांकि, विश्वविद्यालय को संबंधित संस्थानों से रिपोर्ट प्राप्त होने में देरी हो रही है, जिसके कारण पूरी प्रक्रिया धीमी पड़ गई है और वेतन जारी नहीं हो पा रहा है।
नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल
गौरतलब है कि BSUSC के माध्यम से वर्ष 2024 से शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया में लिखित परीक्षा नहीं ली गई थी, बल्कि चयन पूरी तरह से शैक्षणिक रिकॉर्ड और अनुभव के आधार पर किया गया था।
कुल 100 अंकों में से 80 अंक शैक्षणिक योग्यता, पीएचडी और शिक्षण अनुभव के आधार पर दिए जाते हैं, जबकि 20 अंक इंटरव्यू के लिए निर्धारित हैं। इसी सिस्टम में अनुभव प्रमाणपत्रों का महत्वपूर्ण योगदान है, जिस पर अब सवाल उठ रहे हैं।
अनुभव अंक को लेकर विवाद
नियमों के अनुसार, किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में एक वर्ष के शिक्षण अनुभव के लिए दो अंक दिए जाते हैं। अधिकतम पांच वर्ष के अनुभव पर 10 अंक तक मिल सकते हैं। आशंका जताई जा रही है कि कुछ अभ्यर्थियों ने इसी व्यवस्था का गलत फायदा उठाकर फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र जमा किए हैं।
शिक्षकों की परेशानी और मांग
वेतन रुकने के बाद कई नए शिक्षक परेशान हैं। उनका कहना है कि यदि जांच करनी है तो प्रक्रिया को तेज किया जाए ताकि निर्दोष शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी न हो। इस मुद्दे पर कुछ शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने मगध विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. दिलीप कुमार केसरी से भी मुलाकात की और जांच में तेजी लाने की मांग की।
कुलपति का बयान
कुलपति प्रो. दिलीप कुमार केसरी ने स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। सभी प्रमाणपत्र संबंधित संस्थानों के कुलसचिवों को भेजे गए हैं और उनकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद इसे आयोग और विभाग को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
आगे की कार्रवाई
जांच पूरी होने के बाद यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित शिक्षकों पर बर्खास्तगी सहित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, सही पाए जाने वाले शिक्षकों का वेतन जारी कर दिया जाएगा।
फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और विश्वविद्यालय प्रशासन रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।





