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बिहार में बदलने वाला है ट्रांसपोर्ट सिस्टम, हाईस्पीड बसों की तैयारी

Saba Naaz
9 July 2026 6:30 PM IST
बिहार में बदलने वाला है ट्रांसपोर्ट सिस्टम, हाईस्पीड बसों की तैयारी
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बिहार: परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार अब पटना को बिहार के चार प्रमुख शहरों से जोड़ने के लिए रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) शुरू करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दे दी गई है। सरकार ने रूट तय करने और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए 31.59 करोड़ रुपये के बजट को भी स्वीकृति दी है।

इस परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद बिहार में लंबी दूरी का सफर पहले के मुकाबले काफी आसान और तेज हो जाएगा। रैपिड रेल के जरिए पटना और आसपास के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य है कि लोगों को कम समय में सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

प्रस्तावित योजना के तहत चार प्रमुख रूटों पर रैपिड रेल चलाने की तैयारी है। इनमें पटना-गया, पटना-भागलपुर, पटना-सोनपुर-मुजफ्फरपुर और पटना-आरा कॉरिडोर शामिल हैं। इन रूटों के जरिए राजधानी पटना को राज्य के महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ा जाएगा।

सबसे बड़ा फायदा पटना-मुजफ्फरपुर रूट पर देखने को मिलेगा। वर्तमान में इस दूरी को तय करने में सामान्य ट्रेन से करीब तीन घंटे का समय लगता है, जबकि वंदे भारत से भी लगभग डेढ़ घंटे लगते हैं। रैपिड रेल शुरू होने के बाद यही सफर करीब 60 मिनट में पूरा होने की संभावना है। इससे रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों, छात्रों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

रैपिड रेल सामान्य रेलवे और मेट्रो के बीच की एक अत्याधुनिक परिवहन प्रणाली होती है। इसे खासतौर पर बड़े शहरों और आसपास के क्षेत्रों को तेज गति से जोड़ने के लिए तैयार किया जाता है। इन ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार करीब 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है।

RRTS ट्रेनों में यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं भी मिलेंगी। इसमें पूरी तरह एसी कोच, आरामदायक सीटें, मोबाइल चार्जिंग की सुविधा, डिजिटल डिस्प्ले, कम शोर और बेहतर यात्रा अनुभव जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। प्रीमियम कोच में यात्रियों को अतिरिक्त सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

बिहार सरकार इस परियोजना को देश के पहले दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित करने की योजना बना रही है। दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर पर चलने वाली नमो भारत ट्रेनें हाईस्पीड क्षेत्रीय परिवहन का उदाहरण हैं। इसी मॉडल को ध्यान में रखते हुए बिहार में भी तेज और सुविधाजनक परिवहन नेटवर्क तैयार करने की तैयारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रैपिड रेल परियोजना से बिहार की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिल सकती है। शहरों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी होने से व्यापार, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को फायदा मिलेगा। इसके अलावा रोजगार के नए अवसर पैदा होने और निवेश बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।

फिलहाल सरकार डीपीआर तैयार करने और तकनीकी पहलुओं का अध्ययन करने की प्रक्रिया में है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद परियोजना की आगे की रूपरेखा तय की जाएगी। अगर योजना समय पर पूरी होती है तो आने वाले वर्षों में बिहार के लोग भी देश के बड़े शहरों की तरह हाईस्पीड रैपिड रेल सेवा का लाभ उठा सकेंगे।

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