
Bihar: बिहार के बेगूसराय पुलिस लाइन में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जहां 241 प्रशिक्षु सिपाहियों ने बिहार पुलिस में अपनी नई जिम्मेदारियों की शुरुआत की। इस समारोह में जहां एक ओर वर्दी मिलने की खुशी साफ झलक रही थी, वहीं दूसरी ओर वर्षों तक साथ रहे दोस्तों से बिछड़ने का दर्द भी कई जवानों की आंखों में आंसू बनकर नजर आया।
इसी दौरान दो प्रशिक्षु जवान लड्डू सिंह और हर्षवर्धन अपने साथियों से बिछड़ने की याद में भावुक हो गए। दोनों जवानों की आंखें उस समय भर आईं जब वे प्रशिक्षण के दिनों को याद करने लगे। उन्होंने बताया कि जब वे पहली बार बेगूसराय पुलिस लाइन पहुंचे थे, तब घर से दूर रहना और कठिन ट्रेनिंग को अपनाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन साथियों के सहयोग ने हर मुश्किल आसान कर दी।
जवानों ने बताया कि शुरुआती दिनों में घर की याद बहुत सताती थी, लेकिन धीरे-धीरे वही ट्रेनिंग सेंटर उनका दूसरा घर बन गया। सुबह की परेड, मैदान की मेहनत, अनुशासन, हंसी-मजाक और संघर्ष के पलों ने सभी के बीच गहरी दोस्ती बना दी। यही वजह है कि पासिंग आउट के दिन बिछड़ने का एहसास और भी भावुक कर देने वाला बन गया।
दोनों जवानों ने कहा कि आज वर्दी पहनने का सपना पूरा हुआ है, लेकिन उन साथियों से अलग होने का दर्द भी कम नहीं है जिनके साथ उन्होंने अपने जीवन के सबसे अहम दिन बिताए। बातचीत के दौरान वे कई बार भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
इस कार्यक्रम में कुल 241 प्रशिक्षु सिपाही बिहार पुलिस का हिस्सा बने। समारोह में एक ओर जहां परिजनों के चेहरे गर्व से चमक रहे थे, वहीं दूसरी ओर जवानों के बीच भावनाओं का सैलाब भी देखने को मिला।
यह दिन केवल एक प्रशिक्षण समाप्ति का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह संघर्ष, दोस्ती, अनुशासन और यादों का ऐसा संगम था जिसे जवान कभी नहीं भूल पाएंगे। वर्दी के साथ नई जिम्मेदारी की शुरुआत तो हो गई, लेकिन ट्रेनिंग के दौरान बनी दोस्तियां जीवनभर की पूंजी बनकर उनके साथ रहेंगी।





